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बिहारः निचले स्तर के अस्पतालों के लिए 1116 करोड़, बढ़ेंगी ये सुविधाएं

बिहार के पंचायतों व शहरी क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में स्थित सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज को लेकर सुविधाएं बढ़ेंगी। स्वास्थ्य विभाग सबसे निचले स्तर पर संचालित किए जा रहे अस्पतालों में सामान्य...

बिहारः निचले स्तर के अस्पतालों के लिए 1116 करोड़, बढ़ेंगी ये सुविधाएं
Sudhir Kumarहिनदुस्तान ब्यूरो,पटनाSun, 23 Jan 2022 08:53 AM

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बिहार के पंचायतों व शहरी क्षेत्र के विभिन्न वार्डों में स्थित सरकारी अस्पतालों में मरीजों के इलाज को लेकर सुविधाएं बढ़ेंगी। स्वास्थ्य विभाग सबसे निचले स्तर पर संचालित किए जा रहे अस्पतालों में सामान्य मरीजों के लिए जांच व इलाज की व्यवस्था करेगा। इसके लिए नये-नये उपस्कर, कमरों के निर्माण एवं अन्य जरूरतों को पूरा किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार पंचायतों व शहरी क्षेत्रों के वार्डों में स्थित स्वास्थ्य उप केंद्र एवं अन्य अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं के विकास को लेकर 1116 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनमें ग्राम पंचायतों में स्थित सरकारी अस्पतालों पर 904 करोड़ रुपये जबकि शहरी क्षेत्रों के वार्डों में स्थित अस्पतालों पर 212 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

सभी जिलों में जिला स्तरीय कमेटी का हुआ गठन

अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों के विकास व आवश्यकताओं को चिन्हित करने के लिए केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुरूप जिलों में जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया जा चुका है। इन कमेटियों से प्राप्त अनुशंसा के आधार पर विभिन्न अस्पतालों में मशीन, उपस्कर, जांच सुविधाएं एवं अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति की जाएगी। इसका लाभ ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को प्राप्त होगा।

स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से रुपये खर्च किये जाएंगे

जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने राज्य के पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों के वार्ड में स्थित अस्पतालों के विकास के लिए 15वें केंद्रीय वित्त आयोग की अनुशंसा पर यह राशि बिहार को सौंपी है। पूर्व में यह राशि पंचायतीराज विभाग एवं नगर विकास विभाग के माध्यम से खर्च की जानी थी। लेकिन राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि इस राशि का उपयोग स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से किया जाएगा। चूंकि, स्वास्थ्य विभाग पहले से ही सरकारी अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण को लेकर कार्य कर रहा है और बिहार चिकित्सा सेवा एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (बीएमएसआइसीएल) के माध्यम से कई कार्य किए जा रहे है। इसलिए केंद्र से प्राप्त राशि का बेहतर उपयोग हो सके, इसकेलिए स्वास्थ्य विभाग को ही इसकी जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

निजी एंबुलेंस में भी प्रशिक्षित पारा मेडिकल स्टाफ होंगे

राज्य में चल रहे सभी निजी एंबुलेंस चालकों को अब प्रशिक्षित पारा मेडिकल स्टाफ के साथ-साथ आपातकालीन सुविधा रखनी होगी। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

फरवरी 2022 से वैसे एंबुलेंस, जो पारा मेडिकल स्टाफ के बिना चलाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। राज्य के सभी सरकारी और निजी एंबुलेंस का टेलीफोन नंबर एक हो जायेगा। 102 को कॉल करने पर सरकारी हो या प्राइवेट एंबुलेंस पीड़ितों को सहायता पहुंचाने के लिए घटनास्थल पर तुरंत पहुंचेंगे। परिवहन विभाग ने सड़क हादसों में मौत की संख्या कम करने के लिए यह निर्णय लिया है। परिवहन विभाग के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया है। आपातकालीन नंबर से जुड़ने के बाद सभी निजी एंबुलेंसों का राज्य स्तर पर डेटाबेस बनेगा, जो हर जिले में स्वास्थ्य कार्यालय के पास रहेगा। इस सरकारी निगरानी में आये एबुंलेंस चालकों को सरकार की ओर से निर्धारित किराया लेना होगा। दुर्घटना में घायल लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाये जाने को लेकर यह व्यवस्था बनाई जा रही है।

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