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Hindi News बिहारमौसम की मारः मॉनसून की बेरुखी खेती पर भारी, बारिश नही होने से 40% भी नहीं गिरा धान का बीज

मौसम की मारः मॉनसून की बेरुखी खेती पर भारी, बारिश नही होने से 40% भी नहीं गिरा धान का बीज

21 जून तक राज्य में लक्ष्य के विरुद्ध महज 39.28 प्रतिशत यानी 1.43 लाख हेक्टेयर में ही बीज लगे हैं। जो बीज लगे हैं वे पानी की कमी से सूखने लगे हैं। किसान इन्हें बचाने की जद्दोजेहद में जुटे हैं।

मौसम की मारः मॉनसून की बेरुखी खेती पर भारी, बारिश नही होने से 40% भी नहीं गिरा धान का बीज
Sudhir Kumarहिन्दुस्तान,पटनाSun, 23 Jun 2024 05:39 AM
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मॉनसून की बेरुखी बिहार में खेती किसानी पर भारी पड़ रहा है। बिहार में प्रवेश करने के बाद मॉानसून धीमा पड़ गया है। एक दिन की बारिश से भीषण गर्मी से थोड़ी राहत तो मिल गई है लेकिन खेती बाड़ी की गतिविधियां शुरू करने लायक वर्षा नहीं हुई। धान का बीज गिराने का सबसे अच्छा समय रोहिणी नक्षत्र माना जाता है। रोहिणी नक्षत्र बीत चुका है। अब तो आद्रा भी प्रवेश कर चुका है। अभी तक बारिश नहीं हुई है। इससे किसान परेशान हैं। राज्य में इस साल कृषि विभाग ने 36.56 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य है।

इसके लिए 3.56 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई (बिचड़ा के लिए) का लक्ष्य है। लेकिन 21 जून तक राज्य में लक्ष्य के विरुद्ध महज 39.28 प्रतिशत यानी 1.43 लाख हेक्टेयर में ही बीज लगे हैं। जो बीज लगे भी हैं वे पानी की कमी से सूखने लगे हैं। किसान इन्हें बचाने की जद्दोजेहद में जुटे हैं। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले 10 दिनों तक बारिश नहीं हुई तो 15 से 20 प्रतिशत तक धान का उत्पादन घटेगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, जून के पहले हफ्ते तक बीज गिर जाने चाहिए थे। 21 दिन में बीज तैयार होता है। ऐसे में 15 जून के बाद धान की रोपनी आरंभ हो जाती। पर, बारिश न होने से सूखे का संकट मंडराने लगा है। उत्तर बिहार में अब तक लगभग सभी जिलों में शत प्रतिशत धान का बीज लग जाता था। इस साल औसतन 65 से 70 प्रतिशत तक बीज लगा है। सबसे अधिक किशनगंज में 76.48 प्रतिशत और मुंगेर में सबसे कम 0.04 प्रतिशत बिचड़ा लगा है।

बिचड़ा बचाने को डीजल अनुदान: धान का बिचड़ा बचाने के लिए राज्य सरकार ने तीन पटवन तक डीजल अनुदान का प्रावधान किया गया है। प्रति हेक्टेयर तक 10 लीटर डीजल 75 रुपए प्रति लीटर की दर से प्रावधान है।

किसान मध्यम अवधि के धान का बिचड़ा लगाएं

वीर कुंवर सिंह कृषि कॉलेज डुमरांव के सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. अजय कुमार कहते हैं कि अब लंबी अवधि 150 से अधिक दिन वाले धान के प्रभेद लगाने का समय समाप्त हो चुका है। ऐसे में किसान 110 से 135 दिनों के कम और मध्यम अवधि वाले धान लगा सकते हैं। बारिश नहीं हो रही है, ऐसे में उत्पादन घटेगा। कम और मध्यम अवधि वाले धान बीपीटी 5204, राजेंद्र श्वेता, राजेंद्र भगवती, श्वेता, एमटीएच 1001, सबौर श्री, सहभागी, राजेंद्र नीलम, सबौर दीप, प्रभात लगाना ठीक होगा। सुगंधित धान में सबौर सुरभित, राजेंद्र कस्तुरी, राजेंद्र सुभाषिणी लगा सकते हैं। हाइब्रिड धान की वेराइटी भी लगाना ठीक होगा।

कहते हैं किसान

पिछले साल की तुलना में धान का बीज गिराने में बहुत देर हो चुकी है। अभी 4 दिन पहले बीज डाला है। बोरिंग से पानी पटा कर बीज तो लगाया है, लेकिन बारिश नहीं हुई तो बहुत नुकसान हो जाएगा।-बिट्टू कुमार, सीवान (रघुनाथपुर) के किसान

अभी तक धान का बीज नहीं लगा सके हैं। बारिश नहीं होने से खेती चौपट होने की आशंका है। वैकल्पिक तौर पर एक बीघा में मड़ुआ लगा रहे हैं। -परशुराम सिंह पश्चिम चंपारण (मझौलिया)

धान की बुआई प्रतिशत में
किशनगंज 76.48

मधुबनी 74.60

दरभंगा 74.59

पूर्वी चंपारण 69.70

कटिहार 65