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Hindi News बिहारसीमांचल में एक सीट पर मोदी की गारंटी, तीन पर राहुल का 'न्याय'

सीमांचल में एक सीट पर मोदी की गारंटी, तीन पर राहुल का 'न्याय'

सीमांचल में मोदी फैक्टर फीका रहा। सिर्फ एक सीट अररिया पर मोदी की गारंटी चली,तो वहीं 3 सीटों किशनगंज, कटिहार और पूर्णिया में NDA प्रत्याशी की जीत हुई। जबकि PM मोदी ने कटिहार, पूर्णिया में जनसभा की थी।

सीमांचल में एक सीट पर मोदी की गारंटी, तीन पर राहुल का 'न्याय'
Sandeepधीरज,पूर्णियाThu, 06 Jun 2024 11:52 AM
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तपती धूप में सही सांसद को चुनने के लिए लगी मतदाताओं की कतार। इस बीच प्रधानमंत्री का चुनाव प्रचार। मगर सीमांचल में एनडीए का एक दशक पुराना फार्मूला फुस्स हो गया। सीमांचल की एक सीट अररिया से भाजपा मैदान में उतरी। यहां मोदी की सभा भी हुई। सीमांचल में एकमात्र इस सीट से एनडीए चुनाव जीतने में सफल रहा। मगर बाकी तीन सीटों पर राहुल गांधी को ‘न्याय’ मिला। 30 जनवरी को राहुल गांधी न्याय यात्रा पर सीमांचल पहुंचे थे। उनके बंगाल से बिहार में प्रवेश करने से ठीक पहले बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपना नया ‘सियासी घर’ ढूंढ लिया था। 

सीमांचल में इस बात का आक्रोश लोगों में दिखा। नतीजन काफी संख्या में राहुल की न्याय यात्रा के दौरान सड़क पर लोग उमड़ पड़े थे। राहुल ने अररिया में रात्रि विश्राम किया था। पूर्णिया में किसानों के साथ उन्होंने चौपाल भी सजाई थी। राहुल की न्याय यात्रा का नतीजा रहा कि किशनगंज सीट को कांग्रेस ने बरकरार रखा। कटिहार सीट जदयू से हथिया ली। पूर्णिया सीट से पप्पू यादव निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतने में सफल रहे।

कटिहार और पूर्णिया के एनडीए प्रत्याशी की जीत के लिए मोदी ने चुनावी सभा भी की। इसके बाद कुछ सियासी फिजा तो बदली मगर ‘मोदी मैजिक’ इन सीटों पर नहीं चल पाया। बता दें कि सीमांचल में 2014 में जदयू और भाजपा ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। इसमें जदयू को सफलता मिली थी। 2019 के चुनाव में जदयू और भाजपा एक साथ मिलकर मैदान में उतरी। नतीजा 2014 के जैसा ही रहा। मगर 2024 में हालात बदल गए। इस बार सीमांचल में मिली हार के बाद एनडीए को नये सिरे से इस पर विचार करना होगा

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सीमांचल में पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज के प्रत्याशी पिछले चुनाव की तरह इस बार भी मोदी मैजिक के भरोसे ही रह गए। मोदी लहर को देखते हुए प्रत्याशी फील गुड महसूस करने लगे। ऐसे में उनके मेहनत पर भी इसका असर पड़ा। यही नहीं सीमांचल में जदयू को तीन सीट देने का दर्द भी अंदर ही अंदर कुछ भाजपाइयों में था। इसलिए कई भाजपाई खुलकर जदयू के साथ नहीं चले। इसका भी खामियाजा एनडीए को सीमांचल में उठाना पड़ा।

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भागलपुर में भले ही एनडीए ने जीत हासिल कर ली है, लेकिन 2019 के मुकाबले कम अंतर से जीत यह दर्शाता है कि वोट बैंक फिसला है। 2019 में जदयू प्रत्याशी सांसद अजय कुमार मंडल को 6,18,254 वोट मिले थे। एनडीए के पक्ष में 59.27 प्रतिशत मतदाताओं ने विश्वास जताया। लेकिन 2024 में एनडीए का वोट बैंक घटकर 50.38 प्रतिशत हो गया। एनडीए के पक्ष में 5,36,031 मतदाता आए। मात्र पांच साल में 82,223 वोटों का अंतर यह दर्शाता है कि सहयोगियों ने पूरी तन्मयता से सहयोग नहीं किया। ऐसे में भीतरघातियों की पहचान में एनडीए और महागठबंधन में मंथन हो रहा है।