विधानसभा में बोले राजद विधायक, बिना पिए नहीं सोते हैं कई नेता और अधिकारी
बिहार विधानसभा में बुधवार को शराबबंदी के मामले पर विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों ने शराबबंदी को पूर्णतः विफल बताते हुए...

बिहार विधानसभा में बुधवार को शराबबंदी के मामले पर विपक्षी दलों ने जमकर हंगामा किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों ने शराबबंदी को पूर्णतः विफल बताते हुए सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने शराबबंदी के खिलाफ बोलते हुए यहां तक कह दिया कि कई अधिकारी और नेता बिना पिए नहीं सोते हैं।
विधानसभा में बोलते हुए राष्ट्रीय जनता दल के विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा कि राज्य में धड़ल्ले से शराब की बिक्री हो रही है। अधिकारी और राजनीति के लोग हर दिन बिना शराब पिए सोते नहीं हैं। वहीं राजद के ही ललित यादव ने भी कहा कि राज्य में शराबबंदी पूरी तरह से विफल है। मंत्री को भी तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
राजद के सर्वजीत कुमार ने कहा कि बिहार में शराबबंदी पूरी तरह से विफल है। शराब माफिया और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण आसानी से शराब की बिक्री हो रही है। उन्होंने कहा कि मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार शराब माफिया अपनी काली कमाई का हिस्सा हर महीने अधिकारियों को दे रहे हैं, जिसके कारण शराबबंदी पूरी तरह से विफल हो गई है।
राजद विधायक ने कहा कि मंत्री ने कल ही सदन में दावा किया था कि राज्य में शराबबंदी पूरी तरह से सफल है और उन्होंने इस बात पर खुशी व्यक्त की थी कि गोपालगंज में शराबबंदी कानून की वजह से नौ लोगों को फांसी की सजा हुई है। उन्होंने पूछा कि सरकार बताए कि क्या शराबबंदी कानून सिर्फ गरीबों को फांसी देने के लिए है। सर्वजीत कुमार ने सरकार से मांग की कि जिस इलाके में शराब की बिक्री हो रही हो या बरामदगी होती है वहां के थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक को अविलंब बखार्स्त किया जाए।
वहीं कांग्रेस के अजीत शर्मा ने चुनौती देते हुए कहा कि सदन में एक भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता है कि राज्य में शराब की बिक्री नहीं हो रही है। सच यह है कि शराब की बिक्री आसानी से हर जगह हो रही है। दूसरे प्रदेशों से शराब खरीद कर लाई जाती है और बरामदगी पर उसे नष्ट किया जाता है। इससे बिहार का पैसा दूसरे राज्यों में जा रहा है और राज्य को राजस्व की भारी क्षति हो रही है। उन्होंने कहा कि इससे अच्छा होता कि या तो पूर्ण शराबबंदी हो या शराब की कीमत बढ़ाकर उसकी बिक्री की अनुमति दी जाए। इससे जो भी राजस्व प्राप्त होगा उसका उपयोग रोजगार के अवसर बढ़ाने में किया जा सकेगा।
लेखक के बारे में
Abhishek Tiwariअभिषेक तिवारी
और पढ़ें

