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पटना समेत कई शहर थे निशाने पर, पीएफआई मॉड्यूल की एनआईए जांच में हुआ खुलासा

पीएफआई के अलावा दो-तीन और कट्टरपंथी विचारधारा को पोषित करने वाले संगठन बनाए गए थे। इनमें वहादत-ए-इस्लामी हिंद और वहादत-ए-इस्लामी का नाम शामिल है। ।

पटना समेत कई शहर थे निशाने पर, पीएफआई मॉड्यूल की एनआईए जांच में हुआ खुलासा
Jayesh Jetawatहिन्दुस्तान,पटनाSat, 04 Nov 2023 11:17 PM
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पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) के फुलवारीशरीफ और इससे जुड़े मोतिहारी मामले की जांच एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) पिछले वर्ष जुलाई से कर रही है। जांच का दायरा बढ़ने के साथ ही कई खुलासे हो रहे हैं। पता चला है कि फुलवारीशरीफ के अलावा पटना और आसपास के कुछ शहरों में भी पीएफआई ने ठिकाना बना रखा था। फुलवारीशरीफ स्थित नूर मंजिल को किराए पर लेकर पीएफआई के कमांड सेंटर के तौर पर उपयोग किया जा रहा था। यहां ट्रेनिंग सेंटर तो चल ही रहा था, यहां से दूसरे स्थानों के छोटे-छोटे ठिकानों का संचालन किया जा रहा था। कई और शहरों में ठिकाना बनाने की तैयारी भी थी।

कुछ दिनों पहले एनआईए की पटना स्थित विशेष न्यायालय में इस मामले के एक मुख्य अभियुक्त अनवर रासिद के खिलाफ दायर चार्जशीट में भी इस बात का उल्लेख प्रमुखता से किया गया है। एनआईए ने अब इन छोटे ठिकानों से जुड़े लोगों की तफ्तीश तेज कर दी है। जल्द ही कई और गिरफ्तार किए जा सकते हैं।


एनआईए की अब तक तक की जांच में यह बात भी सामने आई है कि सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के प्रतिबंधित किए जाने के बाद इसके मुख्य नुमाइंदों अथर परवेज, मो. जल्लाउद्दीन खान, नुरुद्दीन जंगी उर्फ एडवोकेट नुरुद्दीन, अरमान मल्लिक ने बिहार में पीएफआई की जड़े मजबूत करने के लिए खासतौर से पहल की। 

फुलवारीशरीफ के बाद मोतिहारी मॉड्यूल और पटना समेत अन्य स्थानों पर इससे जुड़े कई छोटे ठिकाने बनाए थे। पीएफआई के अलावा दो-तीन और कट्टरपंथी विचारधारा को पोषित करने वाले संगठन बनाए थे। इनमें वहादत-ए-इस्लामी हिंद और वहादत-ए-इस्लामी प्रमुख हैं। फुलवारीशरीफ वाले केस में इस संगठन से जुड़े लोगों की भूमिका प्रमुखता से सामने आई है। 

इस प्रतिबंधित संगठन के लोग भी फुलवारीशरीफ वाले केंद्र से सीधे जुड़े थे। ये अलग-अलग स्थानों पर छोटे संगठनों में लोगों खासकर युवाओं को भड़काने का काम करते थे। आतंकी फंडिंग जुटाने और पीएफआई के यहां के ठिकानों तक पहुंचाने में भी इनकी भूमिका काफी खास थी।

इसके अतिरिक्त जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि पीएफआई और इससे जुड़े अन्य छोटे संगठनों ने शुक्रवार की नमाज के बाद राज्य में कई स्थानों पर किसी मुद्दे को लेकर तनाव भड़ाने का काम किया था। पिछले वर्ष पीएफआई के फुलवारीशरीफ मॉड्यूल के खुलासे से पहले इस तरह की घटनाएं कई स्थानों पर हुई थी।

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