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बिहार की लोकसभा सीटों का हाल: कभी कांग्रेस का गढ़ था पूर्णिया, दो दशकों से BJP-JDU का कब्जा, पप्पू यादव भी रेस में

एक वक्त पूर्णिया लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी। लेकिन जेपी की लहर में ये सीट कांग्रेस से छिन गई। बीते दो दशकों से पूर्णिया पर बीजेपी-जेडीयू का कब्जा रहा है। वहीं पप्पू यादव भी रेस में है।

बिहार की लोकसभा सीटों का हाल: कभी कांग्रेस का गढ़ था पूर्णिया, दो दशकों से BJP-JDU का कब्जा, पप्पू यादव भी रेस में
Sandeepधीरज,पूर्णियाSun, 25 Feb 2024 11:01 PM
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पूर्णिया पूर्वोत्तर बिहार का सबसे बड़ा शहर है। नेपाल और बंगाल से सटे इस शहर के बीचोबीच होकर एनएच 31 गुजरता है जो ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर का हिस्सा है। यह उत्तर भारत को पूर्वोत्तर से जोड़ता है। यहां गुलाबबाग कोसी और सीमांचल की सबसे बड़ी अनाज मंडी है। क्षेत्र की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर करती है। समय-समय पर फसल बदलना यहां के किसानों की फितरत रही है।

कभी इस इलाके में गन्ने की खेती होती थी। बनमनखी में चीनी मिल भी खुला जो बाद में बंद हो गया। जूट में हाथ आजमाने के बाद किसानों का रुझान केले की खेती की ओर बढ़ा। मौजूदा समय में मक्का की खेती प्रमुखता से हो रही है। मखाना भी पूर्णिया को पहचान दिला रही है। मगर फसलों में बदलाव की तरह राजनीतिक मैदान में यहां बदलाव देखने को नहीं मिला है। इस बार भी चुनाव मैदान में यहां के पुराने धुरंधर ही मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

माधुरी सिंह एकमात्र महिला सांसद आजादी के बाद से 1971 तक यह सीट कांग्रेस का गढ़ रहा। फणि गोपाल सेन पहले सांसद बने, उन्होंने 1962 तक इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। 1977 में जेपी लहर में यह सीट कांग्रेस की झोली से छिन गयी। लषनलाल कपूर यहां के गैर कांग्रेसी सांसद बने। माधुरी सिंह की जीत के साथ 1980 में यह सीट फिर कांग्रेस की झोली में चली गयी। वह 1980 से 1989 तक यहां की सांसद रहीं। पूर्णिया लोकसभा सीट से माधुरी सिंह एकमात्र महिला सांसद रही हैं।

1989 में जनता दल के टिकट पर मो तस्लीमुद्दीन सांसद बने। बिना सांसद के भी रह चुका है पूर्णिया 1991 के चुनाव में मतदान के दिन प्रमुख दलों ने चुनाव आयोग से बूथ लूटने और धांधली की शिकायत की। इस पर तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषण ने नतीजे पर रोक लगा दी थी। मामला कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने चार साल बाद पुनर्मतदान का आदेश दिया। इस बीच पूर्णिया 1991-95 चार साल तक बिना सांसद के ही रहा। मार्च 1995 में आयोग ने निर्दलीय प्रत्याशी राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को विजेता घोषित किया।

1962 तक फणि गोपाल सेन गुप्ता (कांग्रेस)

1971 मोहम्मद ताहिर (कांग्रेस)

1977 लषन लाल कपूर (जनता पार्टी)

1980 व 1984 माधुरी सिंह (कांग्रेस)

1989 मो. तस्लीमुद्दीन (जनता दल)

1996 राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (सपा)

1998 जय कृष्ण मंडल (भाजपा)

1999 राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (निर्दलीय)

2004 उदय सिंह (भाजपा)

2009 उदय सिंह (भाजपा)

2014 संतोष कुशवाहा (जदयू)

2019 संतोष कुशवाहा (जदयू)

2019 में मिले मतों का आंकड़ों

जदयू- 55%
कांग्रेस- 30%
अन्य- 15%

पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र

कुल मतदाता- 2194490
पुरूष वोटर- 1136090
महिला वोटर- 1058323
थर्ड जेंडर- 77
नए मतदाता- 20000

पुराने धुरंधरों के बीच मुकाबला होने के आसार

अभी तक के सियासी समीकरणों के मुताबिक इस बार भी यहां पुराने धुरंधरों के बीच ही मुकाबला होने के आसार हैं। मौजूदा जदयू सांसद संतोष कुशवाहा, पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह एवं राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव चुनावी बाजी मारने के लिए जोर आजमाइश में जुटे हैं। तीनों नेता यहां से दो-दो बार सांसद रह चुके हैं। अभी सियासी दलों के नेताओं के बीच टिकट को लेकर दावेदारी चल रही है। पप्पू यादव पहले ही चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। उदय सिंह कांग्रेस में हैं। जदयू के संतोष कुशवाहा अब एनडीए का हिस्सा हैं।

बिना सांसद के भी रह चुका है पूर्णिया 

1991 के चुनाव में मतदान के दिन प्रमुख दलों ने चुनाव आयोग से बूथ लूटने और धांधली की शिकायत की। इस पर तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषण ने नतीजे पर रोक लगा दी थी। मामला कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने चार साल बाद पुनर्मतदान का आदेश दिया। इस बीच पूर्णिया 1991-95 चार साल तक बिना सांसद के ही रहा। मार्च 1995 में आयोग ने निर्दलीय प्रत्याशी राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को विजेता घोषित किया।

सांसद संतोष कुशवाहा का दावा

पूर्णिया में कृषि व इंजीनियरिंग कॉलेज, विवि के बाद अब मेडिकल कॉलेज भी शुरू हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग के जाल के साथ शहर में सिक्स लेन रोड का निर्माण हुआ है। नई ट्रेनों की भी सौगात मिली है। इंडस्ट्री आ रही है। इससे रोजगार भी मिलेंगे। पूर्णिया एयरपोर्ट भी जल्द बनकर तैयार हो जाएगा। 

पप्पू यादव, पूर्व सांसद का वार

पूर्णिया जिला देश के पिछड़े जिलों में है। यहां गरीबी व अशिक्षा है। स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। सरकारी दफ्तरों में सिस्टम से काम नहीं होता है। इंसपेक्टरी राज है। युवा बेरोजगार हैं। किसानों को उसका हक नहीं मिल रहा है। जाति-धर्म के नाम पर बांटा जाता है। विकास की बात होनी चाहिए। 

ये परियोजनाएं हुईं पूरी

पूर्णिया मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार, छात्रों का नामांकन, स्वास्थ्य सुविधा बढ़ी।

पूर्णिया-कटिहार और पूर्णिया सहरसा नेशनल हाइवे समेत सिक्स लेन का निर्माण।

पूर्णिया सहरसा के बीच बड़ी रेल लाइन, जनहित और जनसेवा एक्सप्रेस का विस्तार।

उद्योग हो रहे स्थापित, गुलाबबाग मंडी के जीर्णोद्धार का काम, बिजली की अच्छी स्थिति

इन योजनाओं की उम्मीद बाकी

पूर्णिया एयरपोर्ट का मामला दशकों से लंबित, एमओयू के बावजूद उड़ान शुरू होने का अधूरा अरमान।

शहर में ड्रैनेज सिस्टम। मानसूनी बारिश के बीच शहर जलमग्न हो जाता है। इससे लोगों को काफी परेशानी होती है।

मखाना और मक्का का पैदावार होने के बावजूद यहां प्रासेसिंग इंडस्ट्री नहीं है।

बस अड्डा के जीर्णोद्धार की मांग, रेलवे स्टेशन के सौंदर्यीकरण के साथ नई ट्रेनों की भी मांग।

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