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बिहार की लोकसभा सीटों का हालः 3 दशक से विकास की सियासत का दुर्ग नालंदा, जॉर्ज-नीतीश ने दीं कई सौगात

आजादी के बाद नालंदा लोकसभा कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा। यहां से जवाहर लाल नेहरू के करीबी लाल सिंह त्यागी, प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद के अलावा नीतीश और जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार ने जीत दर्ज किया।

बिहार की लोकसभा सीटों का हालः 3 दशक से विकास की सियासत का दुर्ग नालंदा, जॉर्ज-नीतीश ने दीं कई सौगात
Sudhir Kumarआशुतोष कुमार आर्य,नालंदाThu, 22 Feb 2024 11:24 AM
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नालंदा जितना ऐतिहासिक रूप से वैभवशाली रहा है, उतना ही राजनीतिक रूप से समृद्ध भी है। नालंदा महाविहार के खंडहर आज भी इसकी गौरवगाथा कहते हैं। यहां कई देशों के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे। प्राचीन काल में वृहत अखंड भारत के 16 जनपदों में सबसे शक्तिशाली मगध साम्राज्य की राजधानी राजगृह नगरी (राजगीर) थी।

कहा जाता है कि यह साम्राज्य पूर्वी भारत से लेकर पश्चिम तक और उतरी भारत तथा काबुल, बलूचिस्तान, गांधार तक फैला था। यह क्षेत्र चन्द्रगुप्त मौर्य की मातृभूमि तो राजनीति व अर्थशास्त्रत्त् के ज्ञाता चाणक्य की कर्मभूमि रही है। पांच चट्टानी पहाड़ियों से घिरा राजगीर पवित्र यज्ञ भूमि तथा जैन तीर्थकर महावीर और भगवान बुद्ध की साधनाभूमि भी रहा है।

आजादी के बाद नालंदा लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस का मजबूत गढ़ रहा। यहां से जवाहर लाल नेहरू के करीबी लाल सिंह त्यागी, प्रो. सिद्धेश्वर प्रसाद के अलावा रामशरण सिंह, डॉ. रामराज सिंह, श्यामसुंदर सिंह सरीखे दिग्गज सांसद चुने गए थे। लेकिन, देश का राजनीतिक समीकरण बदला तो नालंदा पर भी इसका असर पड़ा और कांग्रेस की पकड़ से यह किला निकल गया। 1977 में बीरेन्द्र प्रसाद ने राष्ट्रीय लोकदल से जीत हासिल कर कांग्रेस की जड़ें हिला दीं। इसके बाद विजय कुमार यादव (भाकपा) के तीन बार चुनाव जीतने के बाद इस क्षेत्र का राजनीतिक परिदृश्य ऐसा बना कि कांग्रेस उबर नहीं पायी। अंतिम बार 1989 में कांग्रेस के सांसद रामस्वरूप प्रसाद रहे।

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का उभार हुआ तो इसके बाद नालंदा ने नीतीश राह पकड़ी। 1996 से लेकर अब तक नालंदा पर समता पार्टी और जदयू के प्रत्याशी ही जीतते रहे हैं। नीतीश कुमार पहली बार 1985 में नालंदा जिले के हरनौत विधानसभा सीट से विधायक बने थे। इसके पहले 1977 व 1980 में वह विधानसभा चुनाव हार चुके थे। तब नालंदा और चंडी बाढ़ संसदीय क्षेत्र के अन्तर्गत थे। नीतीश कुमार ने बाढ़ से सांसद रहते हुए नालंदा पर मजबूत पकड़ बनाई। नीतीश कुमार के आमंत्रण पर 1996 में जॉर्ज फर्नांडीस समता पार्टी के प्रत्याशी बने। वे 1998 में समता पार्टी और 1999 में जदयू प्रत्याशी के रूप में जीते। 2004 में नीतीश कुमार खुद मैदान में उतरे। उन्होंने सिर्फ एक बार इस सीट का संसद में प्रतिनिधत्व किया। पिछले 28 वर्षों में नीतीश कुमार के इस मजबूत दुर्ग को भेदने की कई दलों ने कोशिश की, लेकिन कोई कामयाब नहीं हुआ।

पटना सेंट्रल का हिस्सा था

पहले चुनाव में पटना सेंट्रल का हिस्सा था 1951-52 में हुए आम चुनाव में नालंदा, पटना सेन्ट्रल ससंदीय क्षेत्र के अंतर्गत था। 1957 में नालंदा अस्तित्व में आया। पहले सांसद कांग्रेस के कैलाशपति सिन्हा रहे। नालंदा जिले के कुल सात में से दो विधानसभा क्षेत्र हरनौत व चंडी पहले बाढ़ लोकसभा क्षेत्र के हिस्सा थे। नये परिसीमन के बाद जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों को नालंदा संसदीय क्षेत्र में समाहित कर दिया गया।

इन्हें मिली केंद्रीय कैबिनेट में जगह

नालंदा से सांसद रह चुके सिद्धेश्वर प्रसाद जून 1995 से जून 2000 तक त्रिपुरा के राज्यपाल रहे। जॉर्ज फर्नांडीस वर्ष 1998 से 2004 तक देश के 22वें रक्षामंत्री रहे थे। नीतीश कुमार को कृषि राज्य मंत्री, रेल मंत्री, भूतल एवं परिवहन मंत्री बनाया गया था।

जॉर्ज-नीतीश ने दीं कई सौगात

रक्षा मंत्री रहते जॉर्ज फर्नांडीस ने नालंदा को आयुध कारखाना व सैनिक स्कूल की सौगात दी थी। रेल मंत्री रहते नीतीश कुमार ने हरनौत में सवारी रेल डिब्बा मरम्मत कारखाना की स्थापना की। जमींदारी बांध, चंडी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर वेजिटेबल्स की स्थापना लोगों के लिए वरदान साबित हुई। वहीं, मुख्यमंत्री बनने के बाद नालंदा ओपन यूनिवर्सिटी, खेल विवि, पावापुरी मेडिकल कॉलेज, रहुई डेंटल कॉलेज, नूरसराय उद्यान महाविद्यालय, बिहार पुलिस अकादमी, क्रिकेट स्टेडियम, कन्वेंशन हॉल, पावापुरी आयुर्वेद शोध संस्थान, कल्याणबिगहा में शूटिंग रेंज की स्थापना की। राजगीर में सीआरपीएफ कैम्प बना। कई पर्यटक स्थलों का विकास हुआ।

अब तक चुने गए सांसद

1952 कैलाशपति सिन्हा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

1957 कैलाशपति सिन्हा, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

1962 सिद्धेश्वर प्रसाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

1967 सिद्धेश्वर प्रसाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

1971 सिद्धेश्वर प्रसाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

1977 बीरेंद्र प्रसाद, भारतीय लोक दल

1980 विजय कुमार यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

1984 विजय कुमार यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

1989 रामस्वरूप प्रसाद, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

1991 विजय कुमार यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

1996 जॉर्ज फर्नांडीस, समता पार्टी

1998 जॉर्ज फर्नांडीस, समता पार्टी

1999 जॉर्ज फर्नांडीस, जनता दल (यूनाइटेड)

2004 नीतीश कुमार, जनता दल (यूनाइटेड)

2006 रामस्वरूप प्रसाद, जनता दल (यूनाइटेड)

2009 कौशलेंद्र कुमार, जनता दल (यूनाइटेड)

2014 कौशलेंद्र कुमार, जनता दल (यूनाइटेड)

2019 कौशलेंद्र कुमार, जनता दल (यूनाइटेड)

कुल वोटर-      22,72, 519
महिला वोटर-   10,84, 572
पुरुष वोट-      11,87, 876
थर्ज जेंडर-      71

इन योजनाओं के पूरी होने की उम्मीद

● स्मार्ट सिटी बिहारशरीफ का 2017 में चयन हुआ। दो बार विस्तार के बाद भी काम अधूरा।

● फिल्म सिटी राजगीर में जमीन अधिग्रहित। काम अधूरा है।

● आईटी सिटी फिल्म सिटी के पास भू-अधिग्रहण। काम अधूरा।

● एयरपोर्ट नालंदा विवि के पास जमीन तय है। काम शुरू नहीं।

ये परियोजनाएं हुईं पूरी

● हर घर गंगाजल, नालंदा खुला विवि का भवन निर्माण

● राजगीर अंतरराष्ट्रीय कंवेंशन सेंटर, नेचर व जू-सफारी

● सूबे का पहला मॉडल फ्लोरीकल्चर,

राजगीर में आठ सीटर रोपवे

● बिहटा-सरमेरा एसएच-78,

दनियावां-बिहार रेलखंड पर आवागमन

● बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया रेलखंड का विद्युतीकरण

सांसद का दावा

अस्पतालों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया। फतुहा-इस्लामपुर व फतुहा-दनियावां-बिहारशरीफ रेलखंडों का विद्युतीकरण किया गया। -कौशलेन्द्र कुमार, सांसद

विपक्ष का वार

बिहारशरीफ व आसपास के गांवों में पेयजल संकट है। कराय, गिरियक व एकंगर प्रखंड क्रिटकल जोन में हैं। दीर्घकालिक योजनाएं धरातल पर उतारी जानी चाहिए। -दिलीप कुमार, कांग्रेस नेता

जनता जनार्दन की राय

राजगीर में विकास का काफी काम हुआ है। पर एनएच पर सात किमी लंबा एलिवेटेड रोड बनाने की योजना को धरातल पर उतारने से रोमांच बढ़ जाता। -डॉ. सुखनारायण गुप्ता, राजगीर

राजगीर में गंगाजल की धार बहाकर निश्चय ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भागीरथी प्रयास किया है। लेकिन, अन्य प्रखंडों में भी गंगाजल की धार बहाली जाती तो बेहतर होता। -त्रियनयन कुमार, अस्थावां

मुहाने नदी का मुंह उदेरा स्थान में बंद होने से जिले के लाखों बीघे खेत में पटवन नहीं हो पा रही है। इसे पुनर्जीवित करा दिया जाये तो किसानों के लिए वरदान साबित होगा। - रामचंद्र प्रसाद, हिलसा

प्रखंड कार्यालयों में ऐसी व्यवस्था हो जिससे आम लोगों को भी चक्कर नहीं लगाने पड़ें। अधिकारी व कर्मी सलीके से पेश आएं और समस्याओं का हल करें। -कुणाल सिंह, बिहारशरीफ

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