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बिहार की लोकसभा सीटों का हाल: लालू-शरद यादव का चुनावी अखाड़ा रहा मधेपुरा, कभी नहीं खिला कमल

मंडल की राजनीति से उभरे दो दिग्गजों- शरद यादव और लालू यादव के बीच चुनावी घमासान का केंद्र मधेपुरा रहा है। लेकिन अभी तक यहां बीजेपी का कमल नहीं खिल सका है। जबकि संगठन बूथ से पन्ना प्रमुख तक हैं।

बिहार की लोकसभा सीटों का हाल: लालू-शरद यादव का चुनावी अखाड़ा रहा मधेपुरा, कभी नहीं खिला कमल
Sandeepसरोज कुमार,मधेपुराFri, 16 Feb 2024 09:53 AM
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मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र तीन राजनीतिक दिग्गजों की वजह से देश भर में चर्चित रहा है। यहां के सांसद बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में गठित रिपोर्ट ने देश की राजनीति-समाज पर न केवल गहरा असर डाला, बल्कि इससे हिन्दी पट्टी की राजनीति में पिछड़े नेताओं का उभार भी हुआ। 1979 में भारत के सामाजिक या शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने के लिए मंडल आयोग गठित किया गया था। 1980 में आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की और केन्द्र की बी.पी. सिंह सरकार ने इसे 1990 में लागू किया। मंडल की राजनीति से उभरे दो दिग्गजों- शरद यादव और लालू प्रसाद के बीच चुनावी घमासान की वजह से भी मधेपुरा जाना जाता है। 1998 में दोनों नेताओं का पहली बार चुनाव में आमना-सामना हुआ था।

मधेपुरा संसदीय क्षेत्र वर्ष 1967 में अस्तित्व में आया। इसके पहले सहरसा संसदीय क्षेत्र के अंदर ही मधेपुरा भी शामिल था। 1967 में मधेपुरा के पहले सांसद के रूप में बीपी मंडल (संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी) निर्वाचित हुए। वह 1977 में भी दूसरी बार भारतीय लोकदल के टिकट पर जीते। इस सीट से कांग्रेस को सिर्फ तीन बार सफलता मिली। पहली बार राजेन्द्र प्रसाद यादव कांग्रेस के टिकट पर जीते। दूसरी बार 1980 में वह कांग्रेस (उर्स) के प्रत्याशी के रूप में जीत कर संसद पहुंचे थे।

तीसरी और अंतिम बार 1984 में कांग्रेस के महाबीर प्रसाद यादव सांसद रहे। मधेपुरा 1998 में तब चर्चा में आया, जब एक ही धारा की राजनीति करने वाले शरद यादव (जनता दल) और लालू प्रसाद (राजद) चुनाव मैदान में आमने-सामने हुए। जीत लालू प्रसाद की हुई। 1999 में शरद यादव ने लालू प्रसाद को हराया। वर्ष 2019 में जदयू प्रत्याशी दिनेश चंद्र यादव ने राजद प्रत्याशी शरद यादव को हराया।

मधेपुरा सीट से शरद यादव सबसे अधिक चार बार सांसद रहे। शरद को नागरिक उड्डयन मंत्री के साथ ही कई अन्य मंत्रालय संभालने का मौका मिला। उनके रहते कोसी की लाइफ लाइन कही जाने वाली एनएच 106 और एनएच 107 सड़कों का तोहफा मिला।

हालांकि, एनएच का निर्माण कार्य राजेश रंजन ऊर्फ पप्पू यादव के सांसद रहते हुए शुरू हुआ। लालू ने दी दो सौगात रेल मंत्री बनने के बाद लालू प्रसाद ने मधेपुरा को रेल स्लीपर फैक्ट्री और विद्युत रेल इंजन कारखाना के रूप में मधेपुरा को दो बड़ी सौगातें दीं। हालांकि स्लीपर फैक्ट्री बनने के बाद ही बंद हो गया। विद्युत रेल इंजन कारखाना नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अस्तित्व में आया। विद्युत रेल इंजन मालगाड़ियों को गति देने में योगदान दे रहे हैं।

मधेपुरा के पहले सांसद थे बी.पी. मंडल जो 1968 में सूबे के सीएम भी रहे

1967- बीपी मंडल, संसोपा

1971- राजेंद्र प्रसाद यादव, कांग्रेस

1977- बीपी मंडल, भारतीय लोकदल

1980- राजेंद्र प्रसाद यादव, कांग्रेस (उर्स)

1984- महाबीर प्रसाद यादव, कांग्रेस

1989- रामेंद्र कुमार यादव रवि, जनता दल

1991- शरद यादव, जनता दल

1996- शरद यादव, जनता दल

1998- लालू प्रसाद, राजद

1999- शरद यादव, जदयू

2004- लालू प्रसाद, राजद

2005- राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव, राजद

2009- शरद यादव, जदयू

2014- राजेश रंजन ऊर्फ पप्पू यादव, राजद

2019- दिनेश चंद्र यादव, जदयू

मधेपुरा लोकसभा सीट

कुल मतदाता- 2057837

पुरूष वोटर- 1067842

महिला वोटर- 989942

थर्ड जेंडर- 53

मधेपुरा में नहीं खिल सका है कमल

मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में गठबंधन का गणित काफी मायने रखता है। मधेपुरा संसदीय क्षेत्र में भाजपा का संगठन बूथ और पन्ना प्रमुख तक है। इसके बावजूद भाजपा को यहां कमल खिलने का इंतजार है। जदयू के एनडीए में रहते हुए यह सीट जदयू के खाते में चली जाती है। वर्ष 2014 में भाजपा ने मधेपुरा लोकसभा सीट से अपना प्रत्याशी उतारा लेकिन सफलता नहीं मिली। दूसरी तरफ जदयू के महागठबंधन में रहने पर इस सीट पर राजद की दावेदारी बढ़ जाती है।


ये परियोजनाएं हुईं पूरी

सदर अस्पताल को मॉडल अस्पताल के रूप में विकसित करने का काम जारी

मधेपुरा स्टेशन के नए भवन का निर्माण कार्य जारी है प्लेटफार्म पर शेड, रैंप आदि का निर्माण होना है

शहर के भिरखी रेलवे ढाला पर आरओबी निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया हो चुकी है, निर्माण कार्य शुरू होना है

चौसा के कलासन में औद्योगिक क्षेत्र के लिए जमीन चिह्लित कर ली गयी, औद्योगिक क्षेत्र में आधारभूत संरचना को विकसित करने की दिशा में काम शुरू नहीं हो सका।

मिठाई में आरओबी निर्माण का कार्य शुरू किया गया

इन योजनाओं के पूरी होने की उम्मीद

एनएच 106 और एनएच 107 का निर्माण कार्य अधूरा

मधेपुरा शहर में सीवरेज योजना को स्वीकृति मिली लेकिन काम शुरू नहीं हो सका

सहरसा में आरओबी का निर्माण नहीं हो सका

मधेपुरा में सेंट्रल स्कूल के लिए जमीन नहीं मिल सकी

सहरसा-मधेपुरा-पूर्णिया रेलखंड पर लंबी दूरी की ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ाई गयी

इलेक्ट्रिक रेल इंजन कारखाना के आसपास अनुसांगिक औद्योगिक इकाइयां स्थापित नहीं हो सकीं
 

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