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लोकसभा चुनाव: भोजपुरी कलाकारों का सियासत में वर्चस्व बढ़ रहा

bhojpuri star pawan

सियासत में हिंदी फिल्मों के सितारों के साथ ही भोजपुरी कलाकारों का वर्चस्व भी बढ़ रहा है। राजनीतिक दल इन कलाकारों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। इनका उपयोग चुनाव मैदान में उतारने और प्रचार के लिए भीड़ जुटाने, दोनों ही रूपों में हो रहा है। जबकि, बिहार की अन्य क्षेत्रीय भाषाओं  मगही, मैथिली, अंगिका और बज्जिका से जुड़े कलाकारों की पूछ कम ही है। 

मनोज तिवारी, पवन और रविकिशन की बिहार में मांग 
भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष व भोजपुरी गायक मनोज तिवारी बिहार में पार्टी प्रत्याशियों के लिए चुनाव प्रचार कर चुके हैं। इसी तरह भोजपुरी कलाकार पवन सिंह का भी राज्य में प्रचार के लिए कार्यक्रम तय किया जा रहा है। भाजपा नेता रविकिशन भी लोकप्रिय कलाकारों में शामिल हैं। बिहार में प्रचार के लिए इस बार उनकी सर्वाधिक मांग है। 

कई कलाकारों को मिला टिकट  
भाजपा ने मनोज तिवारी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली सीट से लोकसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। जबकि, रविकिशन को गोरखपुर से मैदान में उतारा है। इसके अलावा दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ को आजमगढ़ से प्रत्याशी बनाया गया है। 

मैथिली कलाकार रंजना झा बनीं आइकन 
मैथिली कलाकारों को भले ही राजनीतिक दलों ने तवज्जों नहीं दी है, लेकिन निर्वाचन आयोग ने कला की इस विधा से जुड़ीं रंजना झा को सहरसा जिला का चुनाव आइकन घोषित किया है। वह मतदान के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं। 

इन कलाकारों पर नहीं पड़ी नजर  
मिथिलांचल क्षेत्र में शारदा सिन्हा, मैथिली ठाकुर, सुदर्शन चौधरी और अंगिका क्षेत्र में गौरव गर्ग, कौशल किशोर मिश्र, नवनीता वर्मा नामी कलाकार हैं। ये लोक संगीत और मिथिला पेटिंग में ख्याति प्राप्त हैं। मगर, राजनीतिक दलों की नजर अभी तक इन पर नहीं पड़ी है।  

क्षेत्रीय भाषाओं का असर  
भोजपुरी भाषा के प्रभाव क्षेत्र का दायरा काफी बड़ा है। बिहार में शाहाबाद के चार जिलों भोजपुर, रोहतास, बक्सर व कैमूर और गंगा नदी के दूसरी ओर सारण, सीवान, गोपालजगंज व पूर्वी चंपारण एवं पश्चिमी चंपारण में भोजपुरी भाषा का प्रवाह है। इसके अलावा यूपी और झारखंड के कई इलाकों में भी भोजपुरी का काफी प्रभाव है। दूसरी ओर मगही भाषा का असर बिहार के नवादा, गया, जहानाबाद, औरंगाबाद, अरवल, पटना व आसपास के इलाकों में है। अंगिका भाषा का प्रभाव क्षेत्र भागलपुर, बांका, नवगछिया व आसपास के इलाकों में हैं। वहीं, बज्जिका का असर मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर जिलों में ज्यादा है। मैथिली भाषा सीतामढी, शिवहर, समस्तीपुर, सुपौल, मधेपुरा, पूर्णिया, दरभंगा व मधुबनी समेत कई जिलों में बोली जाती है।

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  • Web Title:Lok Sabha elections Bhojpuri artists rise in politics