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लोकसभा चुनाव : मुंगेर में 1984 के बाद से कांग्रेस का सांसद नहीं, 2024 में आरजेडी और जेडीयू में मुकाबले के आसार

लोकसभा चुनाव 2024 में मुंगेर सीट से जेडीयू और आरजेडी में सीधा मुकाबला हो सकता है। जेडीयू से मौजूदा सांसद ललन सिंह तो आरजेडी से मनोज विद्यार्थी का नाम चर्चा में है।

लोकसभा चुनाव : मुंगेर में 1984 के बाद से कांग्रेस का सांसद नहीं, 2024 में आरजेडी और जेडीयू में मुकाबले के आसार
Jayesh Jetawatराजेश कुमार, हिन्दुस्तान,मुंगेरThu, 01 Feb 2024 07:59 AM
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उत्तर वाहिनी गंगा के किनारे बसा मुंगेर ऋषि मुद्गल की धरती रही है। साल 1763 में मुंगेर बंगाल के नवाब मीर कासिम की राजधानी थी। यहां का किला अपने अंदर कई ऐतिहासिक धरोहरों को समेटे हुए है। आजादी के बाद अप्रैल 1952 में पहली बार मुंगेर लोकसभा का चुनाव हुआ। तब से साल 2019 तक बीस लोकसभा चुनाव हुए। यहां से सात बार कांग्रेस ने परचम लहराया। मगर 1984 के बाद कांग्रेस कभी नहीं जीत पाई, वामपंथ और समाजवाद की धारा बहने लगी। मतदाताओं ने 1989 से लेकर 2009 तक के चुनावों में जनता दल, भाकपा, समता पार्टी, आरजेडी, लोजपा और जेडीयू को बारी-बारी से मौका दिया।

2009 में परिसीमन के बाद मुंगेल जिले के संग्रामपुर, तारापुर, असरगंज, टेटिया बंबर और हवेली खड़गपुर का कुछ हिस्सा कटकर जमुई संसदीय क्षेत्र में जुड़ गया। मोकामा और बाढ़ भी मुंगेर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है जो पटना जिले में आते हैं। मुंगेर की सीमा पटना साहिब लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से लगती है। वर्तमान में जदयू के राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह सांसद हैं।

साल 1984 तक रहा कांग्रेस का वर्चस्व 
नब्बे के दशक तक इस क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी का वर्चस्व रहा। कांग्रेस के मथुरा प्रसाद मिश्र पहले सांसद बने थे। लेकिन, 1984 के बाद के किसी चुनाव में कांग्रेस को वापसी का मौका नहीं मिला। ब्रह्मानंद मंडल (अब स्वर्गीय) यहां से तीन बार सांसद चुने गए। सबसे पहले वर्ष 1991 में वे भाकपा प्रत्याशी के रूप में जीते। इसके बाद 1996 में समता पार्टी से व तीसरी बार 1999 में जेडीयू से निर्वाचित हुए।

समाजवादी नेता मधु लिमये रहे थे चर्चित सांसद 
साल 1962 में कांग्रेस सांसद बनारसी प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद 1964 में हुए उपचुनाव में महाराष्ट्र के पुणे से आए समाजवादी नेता मधु लिमये मुंगेर से सांसद बने। दोबारा 1967 में भी ये मुंगेर के सांसद चुने गए। देश के चर्चित समाजवादी धारा के नेता रहे मधु लिमये कांग्रेस नीतियों के प्रखर विरोधी थे और देश के प्रमुख प्रतिपक्ष के नेता के रूप में जाने जाते थे। वे राममनोहर लोहिया के अनुयायी एवं रामसेवक यादव व जार्ज फर्नांडीज के सहकर्मी थे। उन्होंने गोवा मुक्ति आंदोलन में भी सक्रिय रूप से भाग लिया था।

गंगा पुल के लिए ब्रह्मानंद मंडल ने किया था अनशन 
2016 में शुरू हुआ मुंगेर का गंगा पुल (श्रीकृष्ण सेतु) पुल एनएच-31 को जोड़ता है। इससे उत्तर बिहार के कई जिलों में सुगमतापूर्वक कम समय में पहुंचा जा सकता है। पुल निर्माण के लिए यहां के नेताओं को काफी संघर्ष और आंदोलन करना पड़ा था। पुल निर्माण से जुड़ी मुंगेर संघर्ष समिति के बैनर तले 1996 में तत्कालीन सांसद ब्रह्मानंद मंडल ने 11 दिनों का उपवास रखा था। पुल से जुड़ा एक दिलचस्प वाकया यह है कि कांग्रेस सांसद डीपी यादव कहते थे कि उत्तरवाहिनी गंगा की तेज धार के कारण यहां पुल नहीं बन सकता। यदि मुंगेर में गंगा पर पुल बन जायेगा तो हथेली पर सरसों पैदा कर लूंगा। हालांकि, बाद में उन्होंने ही पुल के अलाइनमेंट को एनएच से जोड़वाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी।

केंद्र में मंत्री रहे दो सांसद 
मुंगेर से दो सांसद केंद्र में भी मंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस सांसद डीपी यादव केंद्रीय उप शिक्षा मंत्री तो आरजेडी के सांसद जयप्रकाश नारायण यादव केंद्र सरकार में जल संसाधन राज्य मंत्री रहे थे।

मुंगेर लोकसभा सीट से सभी चुनावों में जीते प्रत्याशियों का नाम-
1952 मथुरा प्रसाद मिश्र, कांग्रेस
1952 सुरेश चंद्र मिश्रा, कांग्रेस
1957 बनारसी प्रसाद सिन्हा, कांग्रेस
1957 नयन तारा दास, कांग्रेस
1962 बनारसी प्रसाद सिन्हा, कांग्रेस
1964 (उपचुनाव) मधु लिमये, एसएसपी
1967 मधु लिमये, एसएसपी
1971 देवेंद्र प्रसाद यादव, कांग्रेस
1977 श्रीकृष्ण सिंह, जनता पार्टी
1980 देवेंद्र यादव, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (उर्स)
1984 देवेंद्र प्रसाद यादव, कांग्रेस
1989 धनराज सिंह, जनता दल
1991 ब्रह्मानंद मंडल, भाकपा
1996 ब्रह्मानंद मंडल, समता पार्टी,
1998 विजय कुमार विजय, राजद
1999 ब्रह्मानंद मंडल, जदयू
2004 जय प्रकाश नारायण यादव, राजद
2009 राजीव रंजन सिंह, जदयू
2014 वीणा देवी, लोक जनशक्ति पार्टी
2019 राजीव रंजन सिंह, जदयू

वर्तमान राजनीतिक समीकरण
हाल के सियासी घटनाक्रम को लेकर मुंगेर क्षेत्र में भी दलों की ओर से गोलबंदी तेज हो गई है। जातिगत समीकरण बनाने की कवायद तेज है। एनडीए के घटक दल जेडीयू की यह सीटिंग सीट है। ऐसे में जेडीयू का स्वाभाविक दावा है। वैसे सीट बंटवारा और प्रत्याशियों के नाम तय होना बाकी है। आरजेडी खेमे से मुकेश विद्यार्थी दावेदारी पेश कर सकते हैं। सवर्ण बाहुल्य क्षेत्र में पिछड़ी जाति के 14.9 और मुस्लिम 6.5 मतदाता असरदार भूमिका में रहते हैं।

कांग्रेस जिलाध्यक्ष अजय कुमार का कहना है कि दो बार सांसद रहने पर भी ललन सिंह ने कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया। मैंने डकरा नाला प्रोजेक्ट का मामला दो बार विधानसभा में उठाया था। आज उसका श्रेय ये ले रहे हैं। किसानों के आर्थिक विकास के लिए कोई बड़ा काम नहीं हुआ।

वहीं सांसद ललन सिंह का कहना है कि उन्होंने चुनावी वादे को ईमानदारी से पूरा किया। हर विधानसभा क्षेत्र में विकास का काम किया। जमालपुर रेल डीजल लोकोमोटिव कारखाने इलेक्ट्रिक में तब्दील करने का काम किया। क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को भी लोकसभा में उठाया

ये परियोनाएं हुईं पूरी-
- गंगा ब्रिज के संपर्क पथ का निर्माण
- हवेली खड़गपुर की सिंचाई परियोजना
- जमालपुर डीजल शेड को इलेक्ट्रिक शेड में बदलना
- मुंगेर में मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास
- घोरघट पुल से परिचालन शुरू
- मोकामा के टाल क्षेत्र का विकास

ये परियोजनाएं पूरी होने की आस
- डकरा नाला सिंचाई परियोजना
-  मेडिकल कॉलेज अस्पताल का निर्माण
- मोकामा के रेफरल अस्पताल को ट्रामा सेंटर बनाने की घोषणा पूरी नहीं हुई
- टाल क्षेत्र को जलजमाव की समस्या से अबतक नहीं मिली निजात

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