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Lok Sabha Election: बिहार में कुल कितने वोटर? कितने मतदाता करेंगे पहली बार वोटिंग? चुनाव आयोग ने बताया

राजीव कुमार ने कहा कि बिहार में कम मतदान चिंता का विषय है, क्योंकि यह वह भूमि है जहां माना जाता है कि लोकतंत्र का जन्म हुआ और जहां के नागरिक अभी भी राजनीतिक रूप से अधिक जागरूक हैं।

Lok Sabha Election: बिहार में कुल कितने वोटर? कितने मतदाता करेंगे पहली बार वोटिंग? चुनाव आयोग ने बताया
Malay Ojhaभाषा,पटनाWed, 21 Feb 2024 06:27 PM
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बिहार में लगभग 7.64 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से दो करोड़ से अधिक 30 वर्ष से कम आयु के हैं।  9.26 लाख मतदाताओं की उम्र 18-19 वर्ष के बीच हैं और वे पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। अन्य 1.6 करोड़ की आयु 20 से 29 वर्ष के बीच है। उन्होंने यह भी कहा कि 2019 के बाद से राज्य में 31.09 लाख महिला मतदाता शामिल हुई हैं, जिनमें से 4.5 लाख 18-19 वर्ष आयु वर्ग की हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने बुधवार को राजधानी पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ये बातें कहीं। 

उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से समग्र चुनावी लिंग अनुपात में लगातार वृद्धि हुई है जब यह 877 से बढ़कर 892 हो गया और अब 909 हो गया है। राज्य के 243 विधानसभा क्षेत्रों में से 117 में यह अनुपात राज्य के औसत से अधिक था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिला मतदाताओं की कुल संख्या 3.64 करोड़ है जबकि ट्रांसजेंडर मतदाताओं की संख्या 2290 है। 

सीईसी ने कहा कि 6.30 लाख दिव्यांग मतदाता हैं जबकि 14.50 लाख अति वरिष्ठ नागरिकों की श्रेणी में आते हैं, जिनमें से 21,680 शतायु हैं। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए मतदान केंद्रों पर व्हीलचेयर जैसी व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बीच हुए 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में हमने पहली बार मतदान अधिकारियों को दिव्यांग एवं वरिष्ठ नागरिकों के घरों पर भेजने की सुविधा की शुरूआत की थी ताकि वे वहां अपना वोट डाल सकें। यह सुविधा जारी रहेगी। 

चुनाव आयोग में बिहार में कम मतदान पर जताई चिंता
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि बिहार में कम मतदान चिंता का विषय है, क्योंकि यह वह भूमि है जहां माना जाता है कि लोकतंत्र का जन्म हुआ और जहां के नागरिक अभी भी राजनीतिक रूप से अधिक जागरूक हैं। वैशाली के प्राचीन लोकतांत्रिक गणराज्य का स्पष्ट संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार को लोकतंत्र की जननी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य के लोग राजनीतिक रूप से जागरूक माने जाते हैं, फिर भी यहां मतदान प्रतिशत खराब रहा है। 2019 में यह न केवल राष्ट्रीय औसत से कम था बल्कि देश में कम मतदान के मामले में दूसरे स्थान पर रहा था। जम्मू-कश्मीर में सबसे कम मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया था।

सीईसी ने कहा कि मतदान में सुधार सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां यह विशेष रूप से कम मतदान हुआ था। उन्होंने कहा कि हमने देखा है कि 2019 में शहरी क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत कम था। राज्य में 16 विधानसभा क्षेत्र हैं जो मुख्य रूप से शहरी हैं। इनमें से 12 में (शहरी विधानसभा क्षेत्रों का 75 प्रतिशत) मतदान राज्य के औसत 57.33 प्रतिशत से कम था।

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