DA Image
Friday, December 3, 2021
हमें फॉलो करें :

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ बिहारलोजपा की मांग, नीतीश सरकार अपने खर्च पर कराए जातीय जनगणना, जीतनराम मांझी बोले- फिर पीएम से मिलेंगे

लोजपा की मांग, नीतीश सरकार अपने खर्च पर कराए जातीय जनगणना, जीतनराम मांझी बोले- फिर पीएम से मिलेंगे

पटना, हिन्दुस्तान टीमMalay Ojha
Sat, 25 Sep 2021 07:53 PM
लोजपा की मांग, नीतीश सरकार अपने खर्च पर कराए जातीय जनगणना, जीतनराम मांझी बोले- फिर पीएम से मिलेंगे

लोजपा चिराग गुट के प्रवक्ता चंदन सिंह ने राज्य सरकार से अपने खर्च पर जातीय जनगणना कराने की मांग की है। कहा कि हमारी लड़ाई समाज में दबे-कुचले लोगों को मुख्यधारा में लाने की है। अगर मुख्यमंत्री को समाज के दबे-कुचले लोगों की चिंता है तो वह जाति आधारित जनगणना बिहार में अपने खर्चे पर कराएं। 

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व ‘हम’ प्रमुख जीतनराम मांझी ने कहा है क जातीय जनगणना को लेकर वे फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। उन्होंने कहा है कि जिसकी जितनी आबादी भारी, उतनी उसकी भागीदारी जरूरी है। हक दिलाने के लिए जातीय जनगणना जरूरी है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि वे इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करें। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही इस पर पहल करेंगे।  

जातीय जनगणना जरूरी : संजय झा

जल संसाधन मंत्री संजय झा ने कहा है कि हमें आज भी उम्मीद है कि जिस भावना को लेकर सभी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, उसका सम्मान करते हुए केंद्र सरकार की तरफ से कुछ साकारात्मक पहल जरूर होगी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे को पिछले 30 वर्षों से उठाते रहे हैं। जातीय जनगणना जरूरी है और यह होना चाहिए। संजय झा शुक्रवार को जदयू प्रदेश कार्यालय में जनसुनवाई कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने बिहार में अतिपिछड़ा समाज के लिए जो काम किया है, वह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने बिहार में जहां पिछड़ा और अतिपिछड़ा वर्ग के लोगों को सम्मान देने का काम किया, वहीं राजद ने 15 वर्षों के अपने शासनकाल में पिछड़ा और अतिपिछड़ा समाज को सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल किया। मौके रवीन्द्र्र ंसह व नवीन आर्य चन्द्रवंशी उपस्थित थे।  

जातीय जनगण्ना पर केन्द्र का तर्क बोगस : माले

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार द्वारा जाति गणना न कराए जाने के पक्ष में दिए गए तर्क को बोगस करार दिया है। कहा है कि आरक्षण को तर्कसम्मत बनाने तथा दलितों-पिछड़ों व अतिपिछड़ों के वाजिब हक के लिए जाति गणना जरूरी है। कहा कि यह विडंबना ही है कि आज भी हम 1931 की जाति गणना के आधार पर ही जाति समूहों का निर्धारण करते आ रहे हैं, जबकि इस बीच काफी बदलाव आ चुका है। यदि जाति आधारित गणना की जाए और नए आंकड़े सामने आएं तो निश्चित रूप से दलित-पिछड़े समूहों के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाना होगा, जो अभी 50 प्रतिशत पर अटका हुआ है। 

जनगणना पर फैसला होना बाकी : ललन

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा है कि अभी जातीय जनगणना शुरू नहीं हुई है। ना ही इस पर कोई फैसला हुआ है। अभी केंद्र सरकार ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अपनी बात रखी है। इस पर फैसला होना बाकी है। 

अपना रुख साफ करें सीएम : राजद

महागठबंधन के नेताओं ने कहा कि केन्द्र ने यह साफ कर दिया है कि वह जातीय जनगणना नहीं कराएगी। ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस मसले पर अपना स्टैंड साफ करना होगा। बिहार भाजपा को भी यह साफ करना होगा कि वह केन्द्र के रुख से असहमत है या सहमत। क्योंकि बिहार विस से इस संबंध में पारित प्रस्ताव पर उनकी सहमति थी। सीएम का रुख सामने आने के बाद महागठबंधन तय करेगा। महागठबंधन में शामिल सभी दलों के नेताओं के साथ नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मसले पर बैठक की। बैठक के बाद तेजस्वी ने कहा कि बिहार विधानमंडल से इसका प्रस्ताव दो बार सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। देश भर के 90 फीसदी लोग चाहते हैं कि जातीय जनगणना हो। केंद्र सरकार नहीं चाहती है तो बिहार विधानमंडल से सर्वदलीय पारित करने वाले प्रस्ताव में बिहार भाजपा कैसे शामिल हुई। क्या बिहार भाजपा और केन्द्र की भाजपा अलग-अलग है? बताया कि महागठबंधन की बैठक में निर्णय हुआ कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे पर अपना और राज्य सरकार का रुख तीन दिनों में साफ करें। 

सब्सक्राइब करें हिन्दुस्तान का डेली न्यूज़लेटर

संबंधित खबरें