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एलजेपी के बंगले में दरार! चाचा-भतीजा के बीच खींचतान से दुखी हैं परिजन

खगड़िया हिन्दुस्तान टीमMalay Ojha
Tue, 22 Jun 2021 05:44 PM
एलजेपी के बंगले में दरार! चाचा-भतीजा के बीच खींचतान से दुखी हैं परिजन

बिहार के खगड़िया जिले के अलौली प्रखंड से 12 किलोमीटर दूर शहरबन्नी पंचायत है। महादलित बाहुल्य इस पंचायत की आबादी 10 हजार से अधिक है। इसी पंचायत के बेलाही गांव में लोक जनशक्ति पार्टी के पूर्व सुप्रीमो सह दिवंगत केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान का पैतृक घर है। पार्टी और परिवार में चाचा पशुपति पारस और भतीजा चिराग पासवान के बीच विवाद के बाद घर पर लोगों के आने जाने का सिलसिला बढ़ गया है। शहरबन्नी के बंगले में दरार आ जाने से सभी परिजन दुखी हैं।

पूर्व केन्द्रीय मंत्री के भतीजे साधु शरण पासवान ने सोमवार को बताया कि लोजपा का चुनाव चिह्न बंगला है। देखिए हमारे बंगले में ही दरार आ गई है। यह आपको अच्छा लगता है क्या? हम क्या गांव का कोई भी कोई भी व्यक्ति नहीं चाहता कि बंगले में दरार रहे। इस खाई को दूर की जानी चाहिए। भाई व भतीजा के बीच जारी खींचतान से परिवार एवं समाज दोनों को नुकसान है। उन्होंने बताया कि चाचा व भतीजा दोनों राजनीति में कुशल हैं। दोनों समय से सब कुछ ठीक कर लेंगे। यह उनका विश्वास है। साथ ही कहा कि आप दुनिया भले ही जीत लें, लेकिन जब परिवार में कलह हो जाता है तो अन्य सदस्य भी किंकर्त्तव्यविमूढ़ हो जाते हैं। वे लोग नहीं चाहते हैं कि लोजपा में कोई टूट हो।  

वही भतीजा शंभू पासवान ने बताया कि हमलोग गांव में चाची राजकुमारी देवी (दिवंगत केन्द्रीय मंत्री की पहली पत्नी ) के साथ रहते हैं। चाचा व भतीजा के बीच इन दिनों पार्टी की लड़ाई की जानकारी मिली। अच्छा नहीं लगता है। पूरा गांव चाहता है कि लोजपा में आपसी समझौता हो जाना चाहिए। पासवान परिवार की पोती प्रतिभा रानी कहती हैं कि हमारे सभी दादा व चाचा में कभी किसी तरह का मतभेद नहीं देखा गया। आज जो सुन रही हूं इससे पूरा परिवार मायूस हैं। हमलोग चाहते हैं कि विवाद और आगे बढ़े, उससे पहले सुलह हो जाए।

पासवान परिवार का पोता कहलाने वाले राहुल रौशन ने बताया कि हमलोग के परिवार में कभी कुछ विवाद हुआ तो परिवार के लोग मिलकर सुलह करते रहे हैं। यह भी सुलह हो जाएगा। दादा पशुपाति पारस काफी गंभीर व्यक्ति हैं। कोई हल अवश्य निकाल लेंगे।

वहीं परिवार के एक और पोता राजीव रंजन ने बताया कि यहां के सभी लोगों से दादा पशुपाति पारस से ज्यादा ही लगाव रखते आए हैं। चाचा चिराग हो या प्रिंस राज गांव परिवार से सब दिन दूर ही रहे हैं। दोनों चाचा को न तो हमलोग समझ पाएं हैं और न ही इस गांव परिवार के लोग। उनके स्वभाव में कुछ अंतर अवश्य हुआ जिस कारण दादा (पारस) को ऐसा सोचना पड़ा। दोनों को अपने स्तर से पार्टी को मजबूती देनी चाहिए। हमलोग यही चाहते हैं कि लोजपा का विवाद समाप्त हो और आपसी एकजुटता कायम रहे।

पंचायत समिति सदस्य और भतीजा धर्मेंद्र पासवान का कहना है कि हमलोगों का तो खून का रिश्ता है। स्थानीय स्तर पर पंचायत की राजनीति का ज्ञान भी पारस चाचा से ही सीखा है। चिराग का रिश्ता गांव से कभी नहीं रहा। परंतु हमारा भाई तो है। इसे कैसे भूला जा सकता है। घर का विवाद समाप्त होना चाहिए। भतीजा रंधीर पासवान ने कहा कि लोजपा हो या दलित सेना सब तो बड़े चाचा रामविलास पासवान की ही देन है। परंतु संचालन प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से चाचा पशुपति पारस द्वारा होता रहा है। परिवार के सभी चाचा भले ही विभिन्न क्षेत्र से चुनाव लड़ते रहे परंतु कमान पारस चाचा ही संभालते थे। चिराग भाई को चाचा से मार्गदर्शन लेना चाहिए।

वहीं कंचन कुमारी ने बताया कि वह पुत्रवधू हैं। इतने दिनों से परिवार को देखती आ रही हूं। कभी भी किसी भी परिस्थिति में हमारे में खानदान में कोई विवाद सामने नहीं आया। सासू मां राजकुमारी देवी से परिवार की जानकारी लेती रही हूं। कोई सोच भी नहीं सकता है कि इस राजनैतिक घर में इस तरह का विवाद भी होगा। नए विवाद ने घर में सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। शहरबन्नी पंचायत की मुखिया शैल देवी ने कहा कि विवाद से पार्टी व परिवार दोनों बिखर जाएंगे। हमलोग कामना करते हैं कि किसी तरह परिवार व पार्टी एकजुट रहे,  नहीं तो हमलोग कहां जाएंगे यह फैसला लेना कष्टकारी होगा।

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