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हिन्दुस्तान स्मार्ट: नेता खुशहाल हैं पर पटनावासी बदहाल

पटना में नेताओं के यहां तो धन बरसता रहा पर आम आदमी के हिस्से सम्पन्नता की एक बूंद भी नहीं आयी। यहां जमीन की कीमतें तो दिल्ली-मुंबई से ज्यादा हैं लेकिन शहर में बुनियादी सुविधाओं का हाल खराब है। जल निकासी से लेकर पीने के पानी तक की उचित व्यवस्था नहीं है। कई मोहल्ले ऐसे हैं जहां चारपहिया वाहन नहीं पहुंच सकते। सकरी गलियों में बसने वाले इस शहर में हर दूसरे घर में आपको किराएदार मिल जाएगा। 

पटना का नया नजरिया 'हिन्दुस्तान स्मार्ट' लॉन्च

58 लाख 40 हजार की आबादी वाले पटना जिले में करीब पांच लाख लोग अंत्योदय की श्रेणी में आते हैं। गरीबों में भी ये अधिक गरीब हैं, इसलिये सरकार ने इन्हें इस श्रेणी में रखा है। 

पटना की 24 फीसदी आबादी गरीब, दो लाख लोग रहते झुग्गी-झोपड़ियों में  बिहार की 48 फीसदी आबादी गरीबों की श्रेणी में आती है। पटना में यह आंकड़ा करीब 24 फीसदी है। रसोई गैस की खपत, बिजली की खपत, बेहतर घर, पेयजल की उपलब्धता, संपत्ति आदि के मानकों पर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा तैयार आंकड़ों में इसका साफ जिक्र किया गया है। पटना शहर की आधी से अधिक आबादी के पास खुद का मकान नहीं है और यह किराये के घरों में जीवन गुजारने को मजबूर है।

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20 हजार लोगों पर एक डाक्टर 

वर्ष 2017-18 के अनुसार बिहार में 40 हजार मरीजों पर एक और पटना में 20 हजार मरीजों पर एक डाक्टर  हैं। पटना जिले में प्रति लाख आबादी पर 16 नर्सें हैं, जिनमें दो ए ग्रेड की नर्सें हैं। शेष एएनएम हैं। सरकार ने वर्ष 2017-18 में पटना जिले में 55 करोड़ रुपए स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए। प्रति व्यक्ति  के हिसाब से यह खर्च 94 रुपये आता है। पटना जिले में 362 स्वास्थ्य केंद्र हैं।

आधी से अधिक आबादी मध्यमवर्गीय 

पटना में 50 प्रतिशत से अधिक आबादी निम्न मध्यमवर्गीय है। औसत मकान 900 वर्ग फीट में बने हैं। कुछ साल से फ्लैट संस्कृति विकसित हो रही है, लेकिन उनकी कीमतें भी इतनी अधिक हैं कि इन्हें उच्च मध्यमवर्गीय परिवार ही ले सकता है। शहर से दूर दो कमरे के फ्लैट की शुरुआती कीमत 40 लाख रुपए है। पटना में तकरीबन 5 लाख मकान हैं।

हालात यहां भी ठीक नहीं

40 हजार घरों में पटना में अब भी शौचालय नहीं हैं
5.1 लाख कुल बिजली कनेक्शन पटना में 
60 फीसदी घरों में ही पानी की आपूर्ति पटना शहर में

28.5% है पटना में कुपोषण दर। इसमें 11.5% बच्चे गंभीर कुपोषित हैं
58% महिलाएं एनिमिया की शिकार हैं। इनमें 40.7% गर्भवती महिलाएं शामिल हैं
30 हजार परिवार भूमिहीन हैं पटना के 
34073 परिवारों के पास पक्का मकान नहीं
119 झुग्गी बस्तियां हैं। इनमें दो लाख से अधिक लोग रहते हैं।
70.68% साक्षरता दर पटना शहर की

शहर में झुग्गियों का राज

गरीबी का स्तर देखना है तो शहर की 110 झुग्गी बस्तियों में घूम आइए। हर झुग्गी बस्ती में मच्छरों और गंदगी का अंबार है। कई बस्तियां तो शहर के बीचों बीच हैं, उसके बावजूद इनके प्रतिस्थापन की बात नहीं की जाती।

10 हजार वर्ग फीट के नेताओं के आवास 

पटना में नेताओं के आवासों की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनका आकार औसतन 7 से 10 हजार वर्ग फीट है। वहीं अपने परिवार के साथ झुग्गी में रह रहे लोग महज 500-700 वर्ग फीट में गुजारा करने को मजबूर हैं। इस तरह देखा जाए तो एक बंगले के बराबर के क्षेत्रफल की जमीन में 15 से 20 गरीब परिवारों के लिए रहने लायक घर बनाए जा सकते हैं।

बजट के अभाव में अटका विकास 

नगर निगम में कर्मचारी और बजट के अभाव की वजह से शहर के विकास में दिक्कतें आ रही हैं। राज्य सरकार का नगर निगम को सहयोग भी नहीं मिल रहा है। दूसरे जिलों के विकास में नगर निकायों को जिस तरीके से सहयोग दिया जा रहा है, उस अनुपात में पटना जैसी राजधानी को बजट नहीं मिल रहा है। 
सीता साहू, मेयर पटना नगर निगम। 

सुधार रही है बेपटरी व्यवस्था 

पटना के विकास को लेकर बड़े प्लान पर काम किया जा रहा है। इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। विकास के मामले में पटना तेजी से गति पकड़ रहा है। आने वाले दिनों में इसकी रफ्तार और तेज होगी। शहर में विकास के कई बड़े काम चल भी रहे हैं। अगले एक साल में बदलाव दिखाई देने लगेगा।
संजीव चौरसिया, विधायक दीघा

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  • Web Title:leaders are happy but patna people situation are not good