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केके पाठक का हॉट फरमान, डीएम का आदेश नहीं मानें डीईओ, शीतलहर में स्कूल नहीं होंगे बंद

किसी भी सूरत में स्कूलों को बंद नहीं करना है जबकि नालंदा और पटना के डीएम ने भीषण सर्दी और शीत लहर को देखते हुए अपने अपने जिलों में 23 जनवरी तक स्कूलों को बंद रखने का आदेश दे रखा है।

केके पाठक का हॉट फरमान, डीएम का आदेश नहीं मानें डीईओ, शीतलहर में स्कूल नहीं होंगे बंद
Sudhir Kumarहिंदुस्तान,पटनाMon, 22 Jan 2024 06:28 PM
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शिक्षा विभाग में अपर मुख्य सचिव के रूप में दूसरी पारी खेल रहे की के पाठक का नया फरमान सामने आया है। उनके आदेश से जिलों के शिक्षा विभाग और वहां के जिलाधिकारी के बीच प्रशासनि विवाद की स्थिति बनती दिख रही है। केके पाठक ने कहा है कि किसी भी सूरत में स्कूलों को बंद नहीं करना है जबकि नालंदा और पटना के डीएम ने भीषण सर्दी और शीत लहर को देखते हुए अपने-अपने जिलों में 23 जनवरी तक स्कूलों को बंद रखने का आदेश दे रखा है।

शुक्रवार को केके पाठक ने छुट्टी से लौटकर अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग का पदभार संभाला और शनिवार को एक्शन में आ गए। उन्होंने शीतलहर को लेकर स्कूलों में बंदी का विरोध करते हुए सभी जिलाधिकारी और कमिश्नर को पत्र लिखा। हिदायत दी कि धारा 144 का दुरुपयोग ना करें। उन्होंने कहा कि ऐसी कौन सी सर्दी है जो सिर्फ स्कूलों में पढ़ती है बाजार में नहीं। केके पाठक ने सभी जिला अधिकारियों और कमिश्नर को धारा 144 का मतलब ही समझाया और कहा कि छुट्टी का आदेश वापस लें।

उसके बाद बिहार के दो जिलों में जिलाधिकारी ने केके पाठक के आदेश को दरकिनार करते हुए पहले से आ रही छुट्टी को बढ़ा दिया। नालंदा के डीएम शुभंकर और पटना के जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह ने सीआरपीसी की धारा 144 का प्रयोग करते हुए अपने-अपने जिलों में 23 जनवरी तक स्कूल बंद रखने का आदेश दिया है। इधर केके पाठक ने 22 जनवरी को नया फरमान जारी कर दिया है।

शिक्षा विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशक कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव ने पटना जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र लिखा है और कहा है कि हर हाल में स्कूल खुलना चाहिए। शिक्षा विभाग के पत्र में कहा गया है कि 23 जनवरी तक स्कूल बंद रखने का डीएम का आदेश गलत है। अपर मुख्य सचिव केके पाठक के द्वारा कहा गया था कि स्कूल बंदी का आदेश देने से पहले शिक्षा विभाग से अनुमति ले लें। पटना और नालंदा के जिलाधिकारी ने ऐसा कोई आदेश नहीं लिया। उसके बाद केके पाठक ने डीएम के आदेश को ही गलत करार दे दिया है।

इस हालिया ऑर्डर से सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी बुरे फस गए हैं। एक और उन्हें अपने विभागीय पदाधिकारी के आदेश की फिक्र है तो दूसरी ओर जिलाधिकारी का विद्यालय में पठन-पाठन और व्यवस्था सुनिश्चित करने में जिला प्रशासन की अहम भूमिका होती है। डीएम अपने जिले में हर विभाग के सबसे बड़े अधिकारी  होते हैं।  इस आदेश से बड़ा प्रशासनिक विवाद पैदा हो सकता है।

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