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बिहारबिहार: एप्रोच रोड बनाते समय टूटा कारीराम पुल का पूर्वी हिस्सा, चार साल पहले यूपी सेतु निगम ने कराया था निर्माण

एक संवाददाता,नुआंवPublished By: Sneha Baluni
Fri, 11 Jun 2021 10:10 AM
बिहार: एप्रोच रोड बनाते समय टूटा कारीराम पुल का पूर्वी हिस्सा, चार साल पहले यूपी सेतु निगम ने कराया था निर्माण

यूपी-बिहार की सीमा को जोड़नेवाले अतिमहत्वपूर्ण पुल का पूर्वी हिस्सा बुधवार की देर शाम टूट गया। यह घटना तब हुई जब कर्मनाशा नदी पर कारीराम में बने पुल का एप्रोच रोड बनाने का काम चल रहा था। एप्रोच रोड बनाते समय ही पुल का पूर्वी किनारा टूट जाने से इसके निर्माण में बरती गई अनियमितता भी उजागर हो गई।

बताया जाता है कि पुल के पूर्वी हिस्से के आखिरी छोर पर जहां मिट्टी से पुल का संपर्क होना था, वहीं पर पावर रोलर से मिट्टी दबायी जा रही थी। पुल की ऊपरी रेलिंग का हिस्सा पावर रोलर के वाइब्रेशन का दबाव सहन नहीं कर सका और टूट गया। टूटे हुए हिस्से में मिट्टी भरभराकर नीचे तक फैल गई। 

बता दें कि कारीराम में छह करोड़ की लागत से इस पुल को यूपी सरकार ने बनवाया था। पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2017 में ही पूरा हो गया था। यूपी की सीमा में उसी समय एप्रोच रोड भी तैयार कर दिया गया। बिहार की सीमा में एप्रोच रोड का काम चार वर्ष से लटका हुआ था। पुल जब बना था, तब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार थी।

यूपी सेतु निगम से बने पुल के बाद बिहार की सीमा में एप्रोच रोड बनवाने के लिए तत्कालीन विधायक अशोक कुमार सिंह ने विधानसभा में भी यह मुद्दा उठाया था। हालांकि एप्रोच रोड नहीं बन पाया। फिलहाल यूपी सरकार एप्रोच रोड बनवा रही थी और पुल का हिस्सा टूट गया। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। 

ग्रामीणों का कहना है कि यह तो अच्छा हुआ कि लिंक रोड निर्माण के पहले ही पुल निर्माण की खामियां उजागर हो गई, अन्यथा वाहनों के आवागमन के दबाव से तो बड़ा हादसा भी हो सकता था।

बुलंद आगाज का बदहाल अंजाम देखना हो तो आइए कारीराम
लापरवाह सिस्टम की हैरानी भरी दास्तान देखनी-सुननी हो तो कारीराम गांव में आ जाइए। यहां आपको बुलंद आगाज का बदहाल अंजाम समेत वह सब कुछ देखने को मिलेगा। एक ऐसा पुल जो चार साल से बनकर तैयार था, लेकिन दो प्रदेशों के लोगों के दिलों को जोड़ न सका था। जब जुड़ने का समय आया तो पुल का एक हिस्सा ही टूट गया। इसके साथ ही बांस के चचरी पुल से सफर की बेबसी फिर बरकरार ही रह गई। 

यही चचरी पुल नुआंव प्रखंड व यूपी के दिलदारनगर क्षेत्र के दर्जनों गांवों के लोगों की आवाजाही का सहारा था। चालू सीजन में उम्मीद जगी थी कि बरसात के सीजन में कर्मनाशा नदी को पुल के रास्ते से पार करेंगे, लेकिन फिलहाल यह सपना रुठ गया है। अगर इस पुल से आवागमन शुरू हो गया होता तो प्रखंड के कारीराम, जैतपुरा, अकोल्ही, महरथा, बड्ढ़ा, नुआंव व एंवती समेत कई गांवों के लोगों को रोजाना यूपी के दिलदारनगर बाजार आने-जाने की पीड़ा खत्म हो गई होती। उक्त गांवों के लोगों के लिए यूपी के दिलदारनगर बाजार से बहुत पहले से खासा लगाव है। रोजमर्रा की खरीदारी व बच्चों की पढ़ाई तक का नाता दिलदारनगर से जुड़ा हुआ है।

बरसात में परेशानी के साथ जेब भी होगी ढीली
बरसात में चचरी पुल का सफर न केवल जोखिम भरा होगा, बल्कि लोगों की जेब भी ढीली करेगा। यूपी से बिहार की सीमा में आना हो या बिहार से यूपी जाना हो, चचरी पुल से पैदल नदी पार करने के लिए ग्रामीणों को पांच रुपए का शुल्क देना पड़ता है। अगर साइकिल व बाइक के साथ हैं, तब दस रुपए शुल्क देना पड़ेगा। बताया जाता है कि कारीराम घाट पर चचरी पुल का ठेका तीन लाख में यूपी प्रशासन ने किया है। ठेकेदार खजूरी गांव का बताया जाता है।

कोरोना से बंद है स्कूल वरना 500 बच्चे झेलते फजीहत 
फिलहाल कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते स्कूल-कॉलेज बंद हैं, अन्यथा प्रखंड के पांच सौ से अधिक छात्र-छात्राएं फजीहत झेलते। कोरोना काल से पहले यह बच्चे रोजाना चचरी पुल से सुबह में यूपी के स्कूल में जाते और पढ़ाई पूरी कर लौटते थे।

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