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Hindi News बिहारलालू-तेजस्वी से कोइरी वोट बचाने की कोशिश में जेडीयू? नीतीश ने बिहार चुनाव से पहले कुशवाहा पर खेला दांव

लालू-तेजस्वी से कोइरी वोट बचाने की कोशिश में जेडीयू? नीतीश ने बिहार चुनाव से पहले कुशवाहा पर खेला दांव

लोकसभा चुनाव में कोइरी-कुशवाहा वोटरों के एनडीए से छिटकने के कारण महागठबंधन को मगध और शाहाबाद क्षेत्र की अधिकतर सीटों पर जीत मिली। इस कारण बिहार में इस वोटबैंक पर सभी दलों की नजर है।

लालू-तेजस्वी से कोइरी वोट बचाने की कोशिश में जेडीयू? नीतीश ने बिहार चुनाव से पहले कुशवाहा पर खेला दांव
nitish kumar lalu yadav
Jayesh Jetawatलाइव हिन्दुस्तान,पटनाTue, 25 Jun 2024 02:40 PM
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लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजे आने के बाद बिहार में कोइरी वोटबैंक की राजनीति चरम पर है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) अपना लव-कुश वोटबैंक बचाने की जद्दोजहद में दिख रही है। इसकी एक बानगी बिहार विधान परिषद के उपचुनाव में दिख रही है। जेडीयू ने एमएलसी उपचुनाव के लिए भगवान सिंह कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है। इसे कोइरी वोटबैंक को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने जेडीयू के कोर माने जाने वाले कोइरी वोटबैंक में सेंधमारी की सफल कोशिश की थी। चुनाव नतीजों के बाद औरंगाबाद से सांसद चुने गए अभय सिंह कुशवाहा को लालू ने आरजेडी संसदीय दल का नेता भी बना दिया। इससे नीतीश का लव-कुश वोटबैंक गड़बड़ा गया।

अब नीतीश की पार्टी ने भगवान सिंह कुशवाहा को बिहार विधान परिषद उपचुनाव में टिकट देकर इस वोटबैंक को लालू-तेजस्वी से बचाने की कोशिश की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जेडीयू समेत एनडीए के अन्य घटक दल भी कुशवाहा जाति को साधने के लिए और कदम उठा सकते हैं। हालांकि, ये कदम कितने सफल साबित होंगे यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

टिकट कटने से नाराज हो थे भगवान सिंह, अब एमएलसी बना रही जेडीयू
भगवान सिंह कुशवाहा भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। जगदीशपुर से वे चार बार विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे नीतीश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने उनका टिकट काट दिया था और लोजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा था। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली थी। 2021 में वे जेडीयू में वापस आ गए थे। अब नीतीश उन्हें एमएलसी बनाकर विधान परिषद में भेज रहे हैं।

एनडीए से छिटके कोइरी वोटर, महागठबंधन को मिला फायदा
लोकसभा चुनाव 2024 में एनडीए को बिहार में आखिरी चरण की 8 में से 6 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था। इनमें अधिकतर सीटें दक्षिण बिहार के मगध और शाहाबाद क्षेत्र की हैं। राजनीतिक विश्लेषणों और बीजेपी की चुनाव रिजल्ट पर आंतरिक रिपोर्ट में सामने आया कि कोइरी-कुशवाहा वोटरों के छिटकने से एनडीए को आखिरी चरण में भारी नुकसान हुआ। काराकाट लोकसभा सीट पर पवन सिंह के निर्दलीय उतरने से राजपूत उनके पक्ष में गोलबंद हो गए।

इसके विरोध में कोइरी वोटर एंटी पोलराइज्ड हो गए और एनडीए को छोड़ महागठबंधन के पक्ष में चले गए। इससे काराकाट में एनडीए के प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा को हार का सामना करना पड़ा और सीपीआई माले के राजाराम सिंह कुशवाहा जीत गए। इसका असर आसपास की आरा, बक्सर, सासाराम, पटना साहिब जैसी सीटों पर भी देखने को मिला। इन लोकसभा सीटों पर भी आरजेडी और सीपीआई माले के प्रत्याशियों की जीत हुई। 

औरंगाबाद में कुशवाहा फैक्टर काम कर गया, लालू के दांव से नीतीश हुए परेशान 
दक्षिण बिहार की औरंगाबाद लोकसभा सीट पर भले ही पहले चरण में चुनाव हुआ, लेकिन यहां भी लालू यादव का कुशवाहा फैक्टर काम कर गया। आरजेडी ने बिहार का चित्तौड़गढ़ कही जाने वाली औरंगाबाद सीट पर कोइरी उम्मीदवार के रूप में जेडीयू से आए अभय कुशवाहा को टिकट दिया। उन्होंने आरजेडी को पहली बार यहां जीत का स्वाद चखाया। इसके साथ ही वे यहां से पहले गैर-राजपूत सांसद भी बन गए।

बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर लालू ने कोइरी वोटरों को साधने के लिए एक और दांव खेला। औरंगाबाद से पहली बार सांसद बने अभय कुशवाहा को लालू ने लोकसभा में आरजेडी का संसदीय दल का नेता भी बना दिया। लालू के इस दांव की गूंज से एनडीए के खेमे में खलबली मच गई। खासकर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को अपने लवकुश वोटबैंक के स्थायी रूप से खिसकने का डर सता रहा है। ऐसे में अब नीतीश कुशवाहा वोटरों को बिखरने से रोकने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। भगवान सिंह कुशवाहा को जेडीयू से एमएलसी बनाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।