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Hindi News बिहारबहुत टाइट है फाइट; जहानाबाद सीट पर पांचतरफा लड़ाई में फंसी जेडीयू, भूमिहार-यादव वोट का खेल

बहुत टाइट है फाइट; जहानाबाद सीट पर पांचतरफा लड़ाई में फंसी जेडीयू, भूमिहार-यादव वोट का खेल

जहानाबाद लोकसभा सीट आखिरी चरण की हॉट सीट है जिसे जेडीयू के चंदेश्वर प्रसाद चंद्रवंशी ने 2019 में महज 1751 वोट के अंतर से आरजेडी के सुरेंद्र प्रसाद यादव को हराकर जीता था। दोनों फिर आमने-सामने हैं।

बहुत टाइट है फाइट; जहानाबाद सीट पर पांचतरफा लड़ाई में फंसी जेडीयू, भूमिहार-यादव वोट का खेल
Ritesh Vermaहिन्दुस्तान टाइम्स,सुभाष पाठक, जहानाबादWed, 29 May 2024 04:40 PM
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बिहार में आखिरी चरण के लोकसभा चुनाव की सबसे हॉट सीट जहानाबाद है जहां 2019 में 1751 वोट से जीते जेडीयू के सांसद चंदेश्वर चंद्रवंशी 2024 में आरजेडी के सुरेंद्र यादव, बसपा के अरुण कुमार, निर्दलीय आशुतोष कुमार और मुनिलाल यादव के साथ पांचतरफा लड़ाई में फंस गए हैं। जहानाबाद से 1998 में एक बार सांसद रह चुके सुरेंद्र 2019 में छह में चार विधानसभा सीट अरवल, जहानाबाद, मखदुमपुर और घोसी से लीड लेने के बावजूद हार गए थे। चंदेश्वर को सिर्फ दो सीट कुर्था और अतरी से इतनी बढ़त मिली कि वो हारते-हारते 1751 वोट की महीन मार्जिन से जीत गए।

इलाके में प्रभाव रखने वाले भूमिहार जाति के दो कैंडिडेट अरुण कुमार और आशुतोष कुमार ने एनडीए कैंप की परेशानी बढ़ा रखी है। पूर्व विधायक मुनिलाल यादव आरजेडी की मुसीबत बन गए हैं। भूमिहार आम तौर पर भाजपा और एनडीए को वोट देते हैं। चंदेश्वर, सुरेंद्र और अरुण 2019 के चुनाव में भी मैदान में थे। अरुण को तब 34 हजार वोट मिला था। इस बार अरुण को बसपा ने टिकट दिया है इसलिए वो कुछ दलित वोट भी जोड़ सकते हैं। अरुण 1999 में जेडीयू और 2004 में उपेंद्र कुशवाहा की पुरानी पार्टी रालोसपा के टिकट पर एनडीए के लिए जहानाबाद जीत चुके हैं।

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काको गांव के मेवालाल चौधरी कहते हैं- "नरेंद्र मोदी की लहर में चंदेश्वर प्रसाद पिछली बार जीत गए लेकिन बाकी नेताओं की तरह उसके बाद वो भी हमारे गांव नहीं आए।" इसी गांव के मुंशी प्रसाद बताते हैं कि सुरेंद्र यादव गया जिले की बेलागंज सीट से एमएलए हैं और बुलाने पर हर जगह जाते हैं। जहानाबाद सामाजिक व राजनीतिक रूप से सजग जिला रहा है। पुनपुन, सोन और फलगू नहीं की पानी से लहलहाती खेतों के बीच समाजवाद और साम्यवाद जहानाबाद में इस सदी के अंत तक हावी रही।

आजादी के बाद से जहानाबाद में कांग्रेस, सीपीआई, जनता पार्टी और आगे जनता पार्टी की वंशज आरजेडी, जेडीयू और रालोसपा जीतती रही है। जहानाबाद लोकसभा सीट के अंदर की छह विधानसभा सीटों में तीन जहानाबाद, दो अरवल और एक गया जिले की है। इन छह सीटों में चार पर आरजेडी और दो पर सीपीआई माले का कब्जा है। 1984 से 1996 तक यहां सीपीआई के रामाश्रय प्रसाद सिंह जीते। आरजेडी से तालमेल टूटते ही सीपीआई का किला ढह गया। 1998 में आरजेडी से सुरेंद्र यादव, 1999 में जेडीयू से अरुण कुमार, 2004 में आरजेडी से गणेश प्रसाद सिंह, 2009 में जेडीयू से जगदीश शर्मा, 2014 में रालोसपा से अरुण कुमार और 2019 में जेडीयू से चंद्रेश्वर चंद्रवंशी जीते।

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यादव और भूमिहार बहुल जहानाबाद में 1998 के बाद से समाजवादी धारा की पार्टियों के कैंडिडेट ही दोनों तरफ से लड़ रहे हैं। नोनही गांव के रामजतन शर्मा तफसील से बताते हैं- "इस बार समीकरण बदल सकता है। यादव और मुसलमान आरजेडी के समर्थन में एकजुट हो गए हैं। दलितों का भी एक हिस्सा राजद को वोट दे सकता है। 2019 में सीपीआई की कुंती देवी को 26 हजार वोट मिला था जबकि राष्ट्रीय समता पार्टी से लड़े अरुण कुमार को 34 हजार वोट आया था। भूमिहार और दलितों के बीच अच्छी साख रखने वाले अरुण इस बार बसपा के टिकट पर लड़ रहे हैं जिससे जेडीयू के लिए मुसीबत बढ़ रही है।"

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लेकिन, केशवपुर नोनही गांव के रंजन पटेल मानते हैं कि मुफ्त राशन और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कारण वंचित तबके के वोटर में बिखराव नहीं होगा। पटेल ने कहा- "नीतीश जी ने अति पिछड़ों और दलितों को मजबूत किया है। ये एनडीए का भरोसेमंद वोट है।" वइना गांव के भगत सिंह ने कहा कि किसान और खास तौर पर भूमिहार समाज ने अब तक मन नहीं बनाया है। भगत बताते हैं- "पिछले लोकसभा चुनाव में पूर्व सांसद जगदीश शर्मा और मुंगेर के सांसद ललन सिंह ने क्षेत्र में भूमिहार वोटरों को जेडीयू के लिए गोलबंद किया था। अब जगदीश शर्मा खुद किनारे लगे हुए हैं।"

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घोसी के अनिल शर्मा कहते हैं कि भूमिहार वोटों की गोलबंदी की जेडीयू की कोशिश को आशुतोष कुमार खराब कर सकते हैं। शर्मा ने कहा- "हम उनको कैसे धोखा दे सकते हैं। वो हमारी जाति के लिए लड़ रहे हैं। पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हेना शहाब भी उनके लिए प्रचार करेंगी।" जहानाबाद में 1 जून को आखिरी चरण में मतदान है जिसके लिए कुल 15 उम्मीदवार मैदान में हैं। मजेदार बात ये है कि जेडीयू उम्मीदवार चंदेश्वर प्रसाद का एक हमनाम चंदेश्वर प्रसाद निर्दलीय लड़ रहा है। भूमिहार नेता आशुतोष और निर्दलीय आशुतोष विनय कुमार के नाम से भी भ्रम फैल सकता है।