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जेडीयू की भीम संसद; संविधान दिवस पर एक तीर से कई निशाना साधने की तैयारी

नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार में जाति आधारित गणना करवाई और उसके तमाम आंकड़े जारी कर दिए। बीजेपी ने आंकड़ों पर सवाल उठाए तो उसे दलित और पिछड़ा वर्ग का विरोधी बताने में महागठबंधन ने कोई कसर नहीं छोड़ा।

जेडीयू की भीम संसद; संविधान दिवस पर एक तीर से कई निशाना साधने की तैयारी
Sudhir Kumarलाइव हिंदुस्तान,पटनाSun, 26 Nov 2023 10:35 AM
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आज संविधान दिवस है। इस मौके पर नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू पटना में भीम संसद का आयोजन कर रही है। पार्टी नेता और नीतीश कुमार के करीबी मंत्री अशोक चौधरी ने इसका जिम्मा संभाला है जिसमें एक लाख से ज्यादा की भीड़ जुटने का दावा किया गया है। बिहार मे जातीय गणना के बाद इस आयोजन के माध्यम से जदयू एक तीर से एक साथ कई निशाने साधने की तैयारी में है। इस आयोजन से सर्दी  के मौसम में बिहार का सिसायी पारा हाई है।

बिहार में  सत्ता का नया समीकरण बनने के बाद से बीजेपी और जेडीयू एक दूसरे पर हमलावर हैं। भीम संसद का आयोजन कर  भाजपा पर निशाना साधने की एक और तैयारी जदयू की ओर से की गयी है। पार्टी के बैनर पोस्टर से इस आयोजन का मकसद स्पष्ट है जिसमें लिखा गया है- आरक्षण एवं दलित विरोधी चेहरे को बेनकाब करने के लिए भीम संसद एवं सम्मान समारोह का आयोजन। माना जा रहा है कि पटना के वेटरनरी कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम में 1 लाख से ज्यादा लोग जुटेंगे जिसमें नीतीश कुमार, ललन सिंह, अशोक चौधरी समेत पार्टी के कई नेता दलित समाज को बीजेपी के विरोध में खड़ा करने की पूरी  कोशिश करेंगे। 

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नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार में जाति आधारित गणना करवाई और उसके तमाम आंकड़े जारी कर दिए। बीजेपी ने इसके आंकड़ों पर सवाल उठाए तो पहले ही उसे दलित और पिछड़ा वर्ग का विरोधी बताने में महागठबंधन के दलों ने कोई कसर नहीं छोड़ा। उसके बाद आरक्षण की सीमा को 60% से 75% बढ़ाने का बिल पास करने में नीतीश सरकार कामयाब रही।

अब नीतीश कुमार ने बीजेपी और केंद्र सरकार के सामने नई मांग रख दी है। कहा गया है कि आरक्षण विस्तार कानून को केंद्र सरकार संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कर दे ताकि इसमें कोई कानूनी पचरा सामने नहीं आए। नीतीस सरकार ने  अपने कैबिनेट से यह प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। रविवार को भीम संसद में नीतीश कुमार और पार्टी के अन्य नेता इन तमाम मुद्दों को हथियार बनाकर बीजेपी पर हमला करने से बिल्कुल नहीं चूकेंगे। इतना ही नहीं 2024 में इंडिया गठबंधन की केंद्र में सरकार बनाने की मुहिम के तहत भाजपा के नेतृत्व वाली वर्तमान केंद्र सरकार पर हमला करने का  हर संभव प्रयास किया जाएगा।

नीतीश कुमार के करीबी मंत्री अशोक चौधरी भीम संसद को लेकर बहुत सक्रिय हैं। दलित समाज से आने वाले अशोक चौधरी की देखरेख में यह आयोजन हो रहा है। उनका कहना है कि पहली बार दलित और महादलित समुदाय के लिए ऐसा आयोजन किया जा रहा है। इसमें बताया जाएगा कि क्यों यह समाज 
इतना पीछे रह गया। नीतीश कुमार सरकार इन्हें आगे लाने के लिए लगातार प्रयासरत है लेकिन, कौन सी परिस्थितियों है जिनके कारण इसमें सफलता नहीं मिल रही है। मतलब साफ है कि इस भीम संसद के माध्यम से जीडीयू एक तरफ 2024 में एनडीए के खिलाफ जनमानस तैयार कर रही है तो दूसरी और 2025 में बिहार की सत्ता में कायम रहने का जुगाड़ भी लगाया जा रहा है।

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