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सासाराम लोकसभा: जगजीवन राम परिवार से रिश्ता टूटा, मुद्दे बहुत लेकिन वोटर पर जाति हावी

सासाराम एससी सुरक्षित लोकसभा सीट से पूर्व उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम के परिवार का दशकों पुराना रिश्ता टूट गया है। 2019 तक लड़ीं उनकी बेटी मीरा कुमार के बेटे अंशुल अविजित पटना साहिब से लड़ रहे हैं।

सासाराम लोकसभा: जगजीवन राम परिवार से रिश्ता टूटा, मुद्दे बहुत लेकिन वोटर पर जाति हावी
Ritesh Vermaहिन्दुस्तान टाइम्स,प्रसून कुमार मिश्रा, सासारामWed, 29 May 2024 01:42 PM
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Sasaram Lok Sabha Election: देश के चौथे उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम और उनके परिवार से जुड़ी दक्षिण बिहार की सासाराम लोकसभा सीट बिहार का वह एससी आरक्षित चुनाव क्षेत्र है जहां सबसे अधिक आदिवासी आबादी है। बिहार का सबसे बड़ा वन्यजीव अभ्यारण्य भी सासारम में है। आजादी की लड़ाई और केंद्रीय मंत्री के तौर पर दलितों के मान-सम्मान को बढ़ाने में अपनी भूमिका की वजह से बाबूजी के नाम से मशहूर जगजीवन राम 1952 से 1984 तक लगातार जीतकर एक रिकॉर्ड बनाया था। 

उनकी बेटी मीरा कुमार ने 2019 तक उनकी विरासत को संभाला जो उनका आखिरी लोकसभा चुनाव था। 2004 और 2009 में सासाराम से सांसद बनीं मीरा 2014 और 2019 में बीजेपी के छेदी पासवान से हार गईं। केंद्र में मंत्री, लोकसभा अध्यक्ष और फिर राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की कैंडिडेट रहीं मीरा ने 2024 का चुनाव लड़ने से मना कर दिया और उसके साथ ही जगजीवन राम के परिवार से सासाराम सीट का नाता टूट गया है। अनुसूचित जाति की मीरा के पति मंजुल कुमार ओबीसी में शामिल कोइरी जाति से हैं जिस वजह से उनका बेटा अंशुल अविजित एससी आरक्षित सासाराम सीट से नहीं लड़ सकता।

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कांग्रेस ने उनके बेटे अंशुल अविजित कुशवाहा को भाजपा के गढ़ पटना साहिब सीट से टिकट दिया है जहां वो बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद से लड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कद्दावर नेताओं को लोकसभा भेजने के बावजूद सासाराम में बिजली, स्वास्थ्य, सिंचाई और शिक्षा की व्यवस्था पिछड़ी हुई है। 150 साल पुराने सोन नहर से खेत सींचने वाले यहां के किसान जमकर धन उपजाते हैं। पहाड़ी इलाकों में गरीब आदिवासियों की हालत में कोई सुधार नहीं हो पाया है जिनको माओवादी भड़काते रहते हैं।

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सासाराम लोकसभा के अंदर आने वाली छह विधानसभा सीटों में तीन पर आरजेडी, एक-एक पर कांग्रेस, भाजपा और जेडीयू के विधायक हैं। जेडीयू का विधायक बसपा के टिकट पर जीता था लेकिन बाद में पार्टी बदल ली। महागठबंधन के खासे प्रभाव के बावजूद 2014 और 2019 में यह सीट भाजपा ने जीती। सासाराम सीट पर दस कैंडिडेट हैं लेकिन भाजपा के शिवेश राम, कांग्रेस के मनोज कुमार और बसपा के संतोष कुमार मुख्य उम्मीदवार हैं। भाजपा को सवर्ण, वैश्य, कुर्मी-कोइरी और अति पिछड़े वोटों का भरोसा है वहीं कांग्रेस यादव, मुस्लिम, महादलित और कुछ कुशवाहा वोट की उम्मीद कर रही है।

सासाराम में कुशवाहा और दलित वोटों पर मीरा कुमार की पकड़ रही है। बसपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां 86 हजार वोट जुटा लिया था और तब मायावती की पार्टी के कैंडिडेट रहे मनोज कुमार को इस बार कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बना लिया है। बीजेपी ने दो बार से जीत रहे मौजूदा सांसद छेदी पासवान का टिकट काट दिया है जिनका पासवान और कुछ ऊंची जातियों पर प्रभाव है।

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सासाराम के सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कुमार कहते हैं- "मुद्दे बहुत हैं लेकिन कोई इस समय भी उठाने को तैयार नहीं है।" आम लोगों के मुद्दों पर जातीय राजनीति के हावी होने से दुखी राजेश ने कहा कि लोकतंत्र की भलाई के लिए अवसरवादी गठबंधन बंद होना चाहिए। किसान मजदूर संघ, कैमूर के अध्यक्ष विजय बहादुर सिंह ने कहा कि किसानों सबसे बुरी हालत में हैं लेकिन नेता उनको जातीय आधार पर बांट देते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों के असली दुश्मन नेता हैं जो चुनाव जीतने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

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सासाराम के चैनपुर और चेनारी विधानसभा क्षेत्र में काफी आदिवासी वोटर हैं लेकिन वो जंगल के सामान पर अधिकार की लड़ाई लड़ रहे हैं जिस पर पारंपरिक तौर पर उनका जीवनयापन निर्भर है। 1505 वर्ग किमी में फैले इस पहाड़ी और जंगली इलाके को 1979 में वन्यजीव अभ्यारण्य का दर्जा दिया गया था। तब से देश भरे में आदिवासी संगठन जंगल पर पारंपरिक तरीकों से जीने लायक अधिकार मांग रहे थे। कैमूर मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष बालकेश्वर सिंह खरवार कहते हैं कि 2006 में सरकार ने वन अधिकार कानून बनाया जिससे पुश्तैनी रूप से जंगल में रह रहे आदिवासियों को जंगल और जमीन पर जरूरत भर अधिकार मिले लेकिन बिहार की सरकार ने उसे लागू नहीं करके हमारी हालत और खराब कर दी है। 

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बीजेपी कैंडिडेट शिवेश राम इलाके में किसानों की नाराजगी की बात को खारिज करते हुए कहते हैं कि इस जिले ने एनडीए सरकार के दौरान कई कीर्तिमान बनाए हैं। चमचमाती सड़कें, पुल, स्वास्थ्य सुविधा और कई विकास और कल्याणकारी योजनाओं ने लोगों का भाग्य बदल दिया है। शिवेश का दावा है कि एनडीए सबका सफाया कर देगा। मौजूदा सांसद छेदी पासवान सासाराम और चुनाव प्रचार से दूर हैं। माना जा रहा है कि वो शिवेश राम को नुकसान पहुंचा सकते हैं जिसका फायदा मनोज कुमार को होगा।

सासाराम (अनुसूचित जाति) आरक्षित सीट 

कुल वोटर

19.04 लाख 

मतदान की तारीख

1 जून 2024, शनिवार

सासाराम लोकसभा सीट के मुख्य उम्मीदवार

शिवेश राम, भाजपा

मनोज कुमार, कांग्रेस

संतोष कुमार, बसपा

सासाराम सीट पर पिछले दो लोकसभा चुनाव के विजेता

2019- छेदी पासवान, भाजपा

2014- छेदी पासवान, भाजपा

सासाराम लोकसभा क्षेत्र के अंदर आने वाली विधानसभा सीटें

मोहनिया (एससी), भभुआ, चैनपुर, चेनारी (एससी), सासाराम और करगहर