ट्रेंडिंग न्यूज़

अगला लेख

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

Hindi News बिहारमधुबनी में समीकरणों की जोर-आजमाइश; यादव-ब्राह्मण बहुल सीट पर BJP और RJD में दिलचस्प मुकाबला

मधुबनी में समीकरणों की जोर-आजमाइश; यादव-ब्राह्मण बहुल सीट पर BJP और RJD में दिलचस्प मुकाबला

मधुबनी में 20 मई को वोटिंग है। मुख्य मुकाबला लगातार दूसरी बार संसद पहुंचने की दावेदारी कर रहे भाजपा उम्मीदवार अशोक यादव व दरभंगा से चार बार सांसद रहे राजद प्रत्याशी अली अशरफ फातमी के बीच दिख रहा है।

मधुबनी में समीकरणों की जोर-आजमाइश; यादव-ब्राह्मण बहुल सीट पर BJP और RJD में दिलचस्प मुकाबला
Sudhir Kumarआलोक कुमार मिश्रा,मधुबनीSat, 18 May 2024 12:30 PM
ऐप पर पढ़ें

Bihar Lok Sabha Election 2024: पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के जन्म स्थान बख्सी टोल से करीब दो किमी दूर कलुआही बाजार में लाउडस्पीकर पर तेज आवाज में चुनाव प्रचार का गाना बज रहा है... अपनो बुझियो, दोसरो के बुझबियौ। रात के करीब नौ बजे, बाजार में खांटी दूध की कुल्हड़ वाली चाय की चुस्की लेता युवक गाना सुन मुस्कुराते हुए कहता है, वोटर सब बुझई छै यौ? 20 मई को लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण में यहां मतदान होने वाले हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए और लालू यादव की आरजेडी ने अपने अपने प्रत्याशियों की जीत के लिए मधुबनी में जमकर पसीना बहाया है। अमित शाह और तेजस्वी यादव ने यहां जनसभाएं कीं।

मधुबनी लोकसभा सीट पर मतदान की घड़ी करीब आ गई है। यहां मुख्य मुकाबला लगातार दूसरी बार संसद पहुंचने की दावेदारी कर रहे भाजपा उम्मीदवार अशोक यादव व दरभंगा से चार बार सांसद रहे राजद प्रत्याशी अली अशरफ फातमी के बीच दिख रहा है। यादवों व ब्राह्मणों की बहुलता वाली इस सीट पर पिछली बार लड़ाई एकतरफा थी। अशोक सूबे में सबसे बड़े अंतर से जीते थे। इस बार अशोक के सामने इसे दोहराने की कड़ी चुनौती दिख रही है। दूसरी ओर, फातमी तीन बार ये यहां जीत रही भाजपा को मात देकर पासा पलटने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। कभी कम्युनिस्टों का गढ़ रहे मधुबनी में अशोक का चुनाव प्रचार मोदी पर केंद्रित दिखता है। उन्हें दो बार संसद में मधुबनी का नेतृत्व कर चुके बेहतरीन वक्ता पिता हुकुमदेव यादव की पकड़ और यादव मतदाताओं का भरोसा है। दूसरी ओर, फातमी की उम्मीद माय समीकरण है। वे 15 साल में कोई काम नहीं होने की बात कहते हुए एक ही परिवार की सत्ता खत्म करने की बात कह वोट मांग रहे हैं। चुनाव से पहले जदयू में रहे फातमी को दरभंगा से टिकट की उम्मीद थी। वह सीट भाजपा के खाते में जाने पर वे राजद में आ गए। यहां से ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी उम्मीदवार उतारा है। पार्टी के प्रत्याशी वकार सिद्दिकी का दावा है कि उन्हें मुसलमानों का भारी समर्थन मिल रहा है। वे कहते हैं, चार विधानसभा क्षेत्रों बिस्फी, हरलाखी, जाले और केवटी में पचास प्रतिशत से अधिक मुसलमान मेरे साथ हैं।

चार चरण में ही थक कर चूर हुए तेजस्वी; पीएम मोदी पर टिप्पणी से लालू के लाल पर नीतीश की पार्टी JDU गर्म

बिस्फी विधानसभा क्षेत्र के नाजिरपुर में मुख्य सड़क से लगे श्रीचंद टोला में शाम के वक्त लोग फुर्सत में बैठे हैं। पासवान बहुल टोला है। सौ घर इसी जाति के हैं। बात शुरू होते ही भाकपा के अच्छे दिनों की झलक मिलती है। पूर्व मुखिया कियानी पासवान कहते हैं, यह टोला भोगी बाबू ने बसाया था। भाकपा के दिग्गज भोगेन्द्र झा यहां से पांच बार सांसद रहे थे। शिव कुमार पासवान, सुधीर पासवान नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि उसे कैसे वोट दें जो अब तक यहां आया भी नहीं। पवन पासवान सवाल उठाते हैं, कोई सभी पासवानों का नेता होने का दावा कैसे कर सकता है? हम तो नहीं मानते।

पाकिस्तान से प्रेम रखने वाले भारत पर बोझ न बनें, कांग्रेस-राजद समर्थकों से यूपी CM योगी की दो टूक

शिक्षक उमेश पांडे मुफ्त अनाज योजना को धोखा बताते हैं। टोले के अंतिम छोर पर बुजर्ग सुखेलाल पासवान से पूछिए तो वे उम्मीदवारों के नाम नहीं जानते। कहते हैं, पर्चा ऐब गेल। भोट द देब। बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र में प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डोकहर में राजा पासवान कहते हैं कि वह इस बार विकास, रोजगार के मुद्दे पर वोट करेंगे। साथ खड़े दिलीप पासवान कहते हैं कि उन्होंने सांसद को नहीं देखा है। फेरी लगाकर कपड़े बेचने वाले हेमंत पासवान बताते हैं किसी तरह गुजारा चल रहा है। हरलाखी विधानसभा क्षेत्र के उमगांव बाजार में दुकाने बंद होने का समय है। चर्चा शुरू करने पर ललित कुमार झा कलुआही से उमगांव की जर्जर मुख्य सड़क की पीड़ा बताते हैं। उमगांव बाजार से थोड़ी ही दूर पर कांग्रेस के वरीष्ठ नेता पूर्व सांसद डॉ. शकिल अहमद का घर है। मधुबनी में चिकित्सक डॉ. कौशल किशोर झा मानते हैं कि हर इलाके में अलग-अलग मुद्दे पर बात चल रही है। यह नहीं कहा जा सकता कि एक ही बात असर करेगी। कहीं सनातन पर बहस हो रही है तो कहीं जाति पर। डॉ. कौशल सवाल उठाते हैं कि क्या नेता पार्टी के घोषणापत्र की बातों को ले लोगों के बीच जा रहे हैं?

क्या लोग घोषणाप्रत्र देखकर, उसे समझकर अपना मन बनाते हैं? आर.के. कॉलेज के सहायक प्राध्यापक डॉ. दीपक त्रिपाठी का मानना है कि इस बार महंगाई और भष्टाचार पर बात नहीं हो रही। युवाओं में शिक्षा और रोजगार पर अधिक चर्चा दिखती है। दलों ने भी इसे भांपकर इन्हें मुद्दा बनाया है। डॉ. दीपक कहते हैं कि आरक्षण और संविधान को लेकर पक्ष-विपक्ष की खींचतान ने इसे भी चुनावी मुद्दे में बदल दिया है। लोगों में इस पर बात हो रही है। चुनाव पर इसका असर दिख सकता है।

इस बार चुनावी मैदान में हैं 12 उम्मीदवार

अशोक कुमार यादव, अली अशरफ फातमी, बिकास कुमार, अबु बकर रहमानी, उदय मंडल, कुलभूषण प्रसाद, मोहन शर्मा, मो. वकार सिद्दीकी, वैद्यनाथ यादव, सरफराज आलम, प्रिय रंजन, शिव बोधन साहू

काफी काम हुआ है। हर क्षेत्र में विकास हुआ है। फिर से मौका मिला तो आधारभूत संरचना के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के लिए कार्य करेंगे। रेलवे, राष्ट्रीय उच्च पथ व पीएम ग्रामीण सड़क के विस्तार के लिए काफी कार्य किया है। आगे भी विकास किया जाएगा। सांसद फंड से हर क्षेत्र में काम हुआ है। -अशोक कुमार यादव, भाजपा प्रत्याशी

यहां 15 साल से एक ही परिवार का कब्जा है। कहीं कोई काम नहीं हुआ है। रोजगार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों की स्थापना, केंद्रीय विद्यालय की स्थापना, चीनी मिल खोलवाने का काम करेंगेे। युवाओं, महिलाओं को स्थानीय स्तर काम मिलेगा ताकि पलायन रुके। इसके लिए हरसंभव प्रयास होंगे। -अली अशरफ फातमी, राजद प्रत्याशी

छह विधानसभा क्षेत्र, 5 पर एनडीए और 1 पर इंडी गठबंधन

मधुबनी लोकसभा सीट के अंतर्गत छह विधानसभा क्षेत्र मधुबनी, हरलाखी, बेनीपट्टी, बिस्फी, केवटी और जाले आते हैं। मधुबनी से राजद के समीर महासेठ, हरलाखी से जदयू के सुधांशु शेखर, बेनीपट्टी से भाजपा के विनोद नारायण झा, बिस्फी से भाजपा के हरिभूषण ठाकुर बचौल, केवटी से भाजपा के मुरारी मोहन झा और जाले से भाजपा के जीवेश मिश्रा विधायक हैं।

देखिए कौन किस पर भारी पड़ता है

मधुबनी शहर से लेकर कलुआही के उमगांव तक सफर कीजिए तो समय ठहरा सा दिखता है। कहीं लंबे समय से सड़कों का काम चल रहा है, तो कहीं उधड़ी सड़क उद्धार का इंतजार कर रही है। बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र के कलुआही बाजार में फर्नीचर का काम करने वाले बैजू शर्मा कहते हैं, देश को मजबूत बनाना है। जो हमारे काम आए उसको ही चुनेंगे न? एक युवक अपनी बात तो रखता है, लेकिन नाम बताने से बचता है। बोलता है, देखिए क्या होता है? जात वाला भारी पड़ता है कि धर्म वाला?