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बिहारउतार-चढ़ाव से नहीं टूटेगा भारत-नेपाल का नैसर्गिक रिश्ता

मुजफ्फरपुर। विभेष त्रिवेदीPublished By: Abhishek Kumar
Wed, 24 Jun 2020 10:52 AM
उतार-चढ़ाव से नहीं टूटेगा भारत-नेपाल का नैसर्गिक रिश्ता

भारत-नेपाल बॉर्डर पर हाल में कई जगहों पर आकस्मिक तनाव और झड़पों का कोई राजनीतिक कारण नहीं दिखता है। हालांकि नेपाल में हाल के दिनों में नए नागरिकता कानून को लेकर जो बहस छिड़ी है उससे दोनों तरफ के लोग चिंतित हैं। इसके बावजूद नेपाल के शिक्षाविदों, कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि उतार-चढ़ाव के बावजूद दोनों देशों का रिश्ता अटूट है। विवाद का एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि कोरोना संकट से बचने के लिए नेपाल सीमा को सख्ती से सील किया गया है। दोनों देशों के सीमावर्ती जिलों के नागरिक खेती, व्यवसाय एवं रिश्तेदारी के लिए बेरोकटोक आने-जाने के अभ्यस्त रहे हैं। सीमा पर उनकी गतिविधियों पर रोक से तकरार की नौबत आ रही है।

अर्थशास्त्र के रिटायर प्रोफेसर एवं नेपाल के प्रदेश-दो के योजना आयोग के उपाध्यक्ष भोगेन्द्र झा कहते हैं कि सीमा पर हिंसक झड़प के संबंध में दोनों ओर से जो बातें कही जा रही हैं, उनमें सच्चाई कम व तात्कालिक आक्रोश अधिक है। सीतामढ़ी में सोनबरसा की घटना का सीमा के नक्शा से कोई संबंध ही नहीं है। जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। नेपाल हो या भारतीय, किसी इंसान का मारा जाना दुखद है। इस घटना का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। प्रो. भोगेंद्र झा बताते हैं कि कोरोना संकट के दौरान दोनों देशों के लोगों की आवाजाही रोकने के लिए सशस्त्र पुलिस की तैनाती की गई है। यह कहना कि जानबूझकर पहाड़ी मूल की पुलिस की तैनाती की गई है, गलत है। जबकि यह जमीनी सच्चाई है कि सशस्त्र पुलिस में नेपाल के पहाड़ी मूल की संख्या अधिक है।

जनकपुरधाम और काशी हम सबका

प्रो. भोगेन्द्र झा ने बताया कि दोनों देशों के बीच पहले भी रिश्तों में उतार-चढ़ाव होता रहा है, लेकिन इससे कभी रिश्ता नहीं टूटेगा। भारत-नेपाल के बीच नैसर्गिक, आत्मीय, धार्मिक और सांस्कृतिक रिश्तों की जड़ें बहुत मजबूत हैं। इसे कोई कभी नहीं तोड़ पाएगा। जनकपुर धाम जितना हमारा है, उतना ही भारतीयों की आस्था का भी केन्द्र है। काशी विश्वनाथ मंदिर हम नेपाल के लोगों का भी है। गया में पुरखों को पिंडदान करने हम भी जाते हैं। कुछ लोग राजनीतिक लाभ के लिए वैमनस्य फैलाना चाहते हैं।

एहतियातन सीमा सील

महोत्तरी जिला के मटिहानी के मेयर हरि मंडल कहते हैं कि दोनों देशों के सीमावर्ती लोग एक-दूसरे पर आश्रित हैं। नेपाल का दूध भारतीय बाजार में जाता है तो भारत की हरी सब्जियां नेपाल के बाजार पहुंचती। मटिहानी में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। एहतियातन सीमा पर आवाजाही रोकी गई है। कल भी मटिहानी-मधवापुर बॉर्डर पर एसएसबी और सशस्त्र प्रहरी की संयुक्त पेट्रोलिंग हुई है।

एक को मनाऊं तो दूजा रूठ जाता

सप्तरी जिला निवासी जानकी कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट के प्रो. अरविंद ठाकुर कहते हैं कि लॉकडाउन की वजह से सीमा के विवादों की वास्तविकता सामने नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक बनावट और आर्थिक जरूरतों की वजह से नेपाल उत्तर में चीन और दक्षिण में भारत पर आश्रित हैं। स्थिति ‘एक को मनाऊं तो दूजा रूठ जाता है वाली है। तराई क्षेत्र में मधेसी समुदाय के लोग रहते हैं, जिनकी भाषा व जीवनशैली भारतीयों जैसी है। इसके ठीक उलट पहाड़ी क्षेत्र की स्थिति है।

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