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बिहार के किसानों की आमदनी कैसे होगी दोगुनी? गवर्नर आरवी आर्लेकर ने दिया टिप्स

राज्यपाल ने आईसीएआर के कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि किसानों को वे प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करें। किसानों को उनके खेतों की मिट्टी जांच कर बताएं कि कैसे बेहतर प्राकृतिक खेती की जा सकती है।

बिहार के किसानों की आमदनी कैसे होगी दोगुनी?  गवर्नर आरवी आर्लेकर ने दिया टिप्स
Sudhir Kumarहिंदुस्तान,पटनाThu, 22 Feb 2024 05:31 PM
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बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि प्राकृतिक खेती से ही किसानों की आय दोगुनी होगी। प्राकृतिक खेती में 27 प्रतिशत लागत कम होता है। प्राकृतिक खेती में उपज 52 प्रतिशत तक अधिक मिलता है। बुधवार को राज्यपार राजेंद्र विश्नवाथ आर्लेकर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के 24 वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल  आर वी आर्लेकर ने  आईसीएआर के कृषि वैज्ञानिकों से कहा कि किसानों को वे प्राकृतिक खेती के लिए प्रेरित करें। किसानों को उनके खेतों की मिट्टी जांच कर बताएं कि कैसे बेहतर प्राकृतिक खेती की जा सकती है। जह हमारे किसान विकसित होंगे, तभी भारत विकसित होगा। राज्यपाल ने इस बात पर चिंता जताई कि कृषि विश्वविद्यालय में भी प्राकृतिक खेती पर क्या काम हो रहा है, यह भी नहीं बताया जाता है। उन्होंने प्राकृतिक खेती को समय की जरूरत बताते हुए इसके प्रसार पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत की कल्पना को साकार करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए देश के हर किसान को विकसित और समृद्ध होना जरूरी है। इसमें कृषि वैज्ञानिकों की बड़ी जिम्मेदारी है। आईसीएआर के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने जलवायु अनुकूल खेती की तकनीक को अपनाने पर बल दिया। बिहार पशु विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि किसानो की आय बढाने के लिये फसल विविधीकरण तथा समेकित कृषि प्रणाली अपनाना जरूरी है। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने संस्थान द्वारा विकसित धान, सब्जियों, फलों के किस्मों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन तकनीक की जानकारी दी।

कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. उज्ज्वल कुमार ने धन्यवाद दिया। मौके पर अटारी निदेशक डॉ. अंजनी कुमार, एमजीआईएफआरआई मोतिहारी के निदेशक डॉ. के. जी. मंडल, लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. बिकास दास, बीसा प्रभारी डॉ. आर. के. जाट आदि मौजूद थे। 21-23 फरवरी तक कृषि मेला एवं जन जातीय किसान सम्मेलन आयोजित है।

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