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Hindustan Special: निर्वासन के दौरान बिहार में भी रही थीं माता सीता..., जानें कौन सी जगह है वह

सीतामढ़ी जिला जनक नंदिनी सीता की जन्मस्थली के रूप में विख्यात है। इसी बिहार राज्य में एक और सीतामढ़ी है, जो नवादा जिला के मेसकौर प्रखंड में स्थित है। यह स्थान रामायण काल की कई यादों को समेटे हुए है।

Hindustan Special: निर्वासन के दौरान बिहार में भी रही थीं माता सीता..., जानें कौन सी जगह है वह
Sudhir Kumarहिंदुस्तान,नवादाSat, 29 Jul 2023 10:51 AM
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नवादा के सीतामढ़ी स्थित मौर्यकालीन सीता मंदिर में पूजा करने से संतान की मनोकामाना पूरी होती है। ऐसा कहा जाता है कि निर्वासन काल में माता सीता यहां भी कुछ दिनों तक रही थीं। सीतामढ़ी के पास कई ऐसे गांव हैं जहां रामायण काल के साक्ष्य हैं। नवादा जिला मुख्यालय के दक्षिण-पश्चिम में लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सीतामढ़ी में 16 फीट लम्बी और 11 फीट चौड़ी प्राचीन गुफा है, जिसे मौर्य कालीन माना जाता है। गुफा के भीतर देवी लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित है। इस कारण इसकी संतान की कामना के लिए प्रसिद्धि है। इस क्षेत्र को पर्यटन विभाग ने रामायण सर्किट में शामिल किया है। हालांकि यह अपेक्षित है।

नवादा के सीतामढ़ी की है खास पहचान

सीतामढ़ी प्राचीन काल से ही एक प्रमुख सांस्कृतिक केन्द्र रहा है। यहां की प्राचीन गुफा गोलनुमा चट्टान को काटकर बनाई गई है। स्थानीय लोग इसे निर्वासन काल में माता सीता का निवास स्थल मानते हैं। गुफा के भीतर देवी लक्ष्मी की मूर्ति है।  

रामायण काल की कई यादों को समेटे हुए है सीतामढ़ी  

बिहार राज्य के सीतामढ़ी जिला जनक नंदिनी सीता की जन्मस्थली के रूप में विख्यात है। इसी बिहार राज्य में एक और सीतामढ़ी है, जो नवादा जिला के मेसकौर प्रखंड में स्थित है। यह स्थान रामायण काल की कई यादों को समेटे हुए है। पहाड़ी की गुफा में बेटे लव-कुश के साथ माता सीता की प्रतिमा विद्यमान है। मंदिर से थोड़ी दूरी पर सीता कुंड है। किवंदति है कि उसी कुंड में माता सीता स्नान किया करती थीं। उस कुंड में पहाड़ियों के बीच से स्वत: पानी का श्रोत निकलता था, लेकिन आज वह पूरी तरह सूख चुका है।

 तमसा नदी का रामायण में है उल्लेख

रामायण में जिक्र है कि तमसा नदी से थोड़ी दूरी पर मां सीता ने अपना आश्रय बनाया था। सीतामढ़ी से डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर आज भी तमसा नदी मौजूद है, जो अब तिलैया के नाम से भी जानी जाती है।

रामायण काल से जुड़े रहने के हैं कई प्रमाण

अरण्यडीह गांव 

सीतामढ़ी से दो किलोमीटर पश्चिम अरंडी अर्थात अरण्यडीह गांव है। इसी स्थान से अरण्य वन का प्रवेश होता था। बाद में अपभ्रंश के रुप में अरण्य को अरंडी कहा जाने लगा और गांव का नाम रखा गया।

लखौरा गांव 

सीतामढ़ी से डेढ़ किमी दूर पूरब दिशा में यह यह गांव है। मान्यता के अनुसार बाल्यकाल में इसी स्थान पर मां सीता के पुत्र लव खो गए थे। लव के खोने वाले स्थान को अपभ्रंश के रूप में लखौरा के रूप में जाना जाने लगा।
 

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