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हिन्दुस्तान स्पेशलः रामायण कालीन साधना केंद्र है नवादा का लोमस ऋषि पर्वत, रक्षाबंधन पर लगता है भारी मेला

सप्तऋषि पहाड़ियों के बीच प्रकृति की गोद में बसे रजौली की धरती पर रजौली प्रखंड की रजौली पूर्वी पंचायत में स्थित लोमस ऋषि पहाड़ के पौराणिक होने के साथ-साथ यह लोगों के आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है।

हिन्दुस्तान स्पेशलः रामायण कालीन साधना केंद्र है नवादा का लोमस ऋषि पर्वत, रक्षाबंधन पर लगता है भारी मेला
Sudhir Kumarपंकज कुमार आर्य,नवादाFri, 03 Nov 2023 07:56 PM
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पर्यटक स्थल के रूप में रजौली स्थित लोमस ऋषि पर्वत विकसित होगा। पौराणिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में विख्यात रजौली का लोमस ऋषि पर्वत रामायण काल के सप्तऋषियों की साधनास्थली माना जाता है। हाल के दिनों में इसके विकास को लेकर जारी प्रयासों के कारण इसके रामायण सर्किट से जुड़ने की संभावना बढ़ गयी है। ऐसा होने पर लोमस ऋषि और याग्वल्क्य ऋषि की पर्वत गुफाओं को संरक्षित करने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा, जो नवादा की धरती के लिए युगांतकारी साबित हो सकेगा। विगत सितम्बर में पटना हाईकोर्ट ने इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए प्रधान सचिव के पत्र के आलोक में कार्रवाई शुरू कर दी है।

फोरलेन सड़क पर सिमरकोल से मात्र तीन किमी की दूरी पर है ऐतिहासिक धरोहर

फोरलेन सड़क पर सिमरकोल से तीन किलोमीटर की दूरी पर सरमसपुर गांव के पास स्थित यह क्षेत्र लोमस ऋषि के अलावा याग्वल्क्य ऋषि के आश्रम के लिए भी प्रसिद्ध रहा है। सप्तऋषि पहाड़ियों के बीच प्रकृति की गोद में बसे रजौली की धरती पर रजौली प्रखंड की रजौली पूर्वी पंचायत में स्थित लोमस ऋषि पहाड़ के पौराणिक होने के साथ-साथ यह लोगों के आस्था का केंद्र भी है। लगभग सवा सौ सीढ़ियां चढ़ कर श्रद्धालु लोमस ऋषि व याज्ञव्लक्य ऋषि आश्रम पहुंच कर अपनी इच्छित मनोकामना की पूर्ति के लिए माथा टेकते हैं।

श्रावण पूर्णिमा पर रक्षाबंधन पर लगता है मेला

पवित्र श्रावण मास की पूर्णिमा पर लोमस ऋषि व याग्वल्क्य ऋषि की पूजा-अर्चना को लेकर प्रतिवर्ष लोमस ऋषि पहाड़ पर मेले का आयोजन होता है। जिसमें रजौली प्रखंड क्षेत्र के अलावा नवादा जिले के कई क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु यहां घूमने के लिए आते हैं और पूरे दिन लगने वाले इस मेले का लुत्फ उठाते हैं।
 

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