
Hindustan Special: मजदूरों के बड़े काम का है डिजिटल लेबर चौक ऐप; ऑनलाइन रोजगार, दिहाड़ी भी कर सकते हैं तय
चंद्रशेखर मंडल के स्टार्टअप ‘डिजिटल लेबर चौक’ का फायदा बिहार समेत कई राज्यों के मजदूर उठा रहे है। ऑनलाइन काम ढूंढने के साथ-साथ उचित मजदूरी दिलाने में भी मददगार है। 28 हजार श्रमिक इससे जुड़ चुके हैं।
लॉकडाउन में मजदूरों की परेशानी को देखकर बिहार में शुरू किए गए स्टार्टअप अब प्रदेश की सीमाएं लांघ चुके हैं। चंद्रशेखर मंडल के स्टार्टअप ‘डिजिटल लेबर चौक’ का फायदा बिहार समेत कई राज्यों के मजदूर और कामगार उठा रहे हैं। स्टार्टअप एप्लीकेशन से बिहार समेत 24 राज्यों से जॉब ऑफर मिल रहे हैं। यह स्टार्टअप मजदूरों को न केवल काम ढूंढ़ने में मदद पहुंचा रहा है, बल्कि श्रमिकों को उचित मजदूरी दिलाने और मजदूरों के कौशल विकास की दिशा में भी काम कर रहा है।
डिजिटल लेबर चौक स्टार्टअप राज्य के सबसे तेज गति से बढ़ने वाले स्टार्टअप में शामिल है। लॉकडाउन में दिहाड़ी मजदूरों की परेशानी को दूर करने के लिए इस स्टार्टअप को शुरू करने का आइडिया आया था। 2022 में शुरू यह स्टार्टअप महज एक साल में आठ से दस गुना तक बढ़ा।
डिजिटल लेबर चौक स्टार्टअप दिहाड़ी मजदूरों और काम प्रदाताओं (जॉब प्रोवाइडर) के बीच एक मंच प्रदान करता है। यह मजदूरों के पलायन के दौरान होने वाली समस्याओं और उनके शोषण को रोकने का सशक्त माध्यम साबित हो रहा है। स्टार्टअप संस्थापक उद्यमी चंद्रशेखर मंडल बताते हैं कि दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले श्रमिक अपने लिए रोजगार ऑनलाइन ढूंढ़ सकते हैं। संबंधित जॉब प्रोवाइडर या उनके सुपरवाइजर से मजदूरी व अन्य सुविधाओं के बारे में पहले से तय कर सकते हैं।
स्टार्टअप एप्लीकेशन दिहाड़ी मजदूरों और कामगारों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। महज एक साल के अंदर इस एप्लीकेशन से 28 हजार मजदूर जुड़ चुके हैं। इनमें से दस हजार मजदूरों ने इस स्टार्टअप की मदद से काम ढूंढ़ने में मदद भी प्राप्त की है। लाभान्वित होने वाले मजदूर बिहार के अलावा दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और झारखंड के ज्यादा है। उद्यमी मंडल बताते हैं कि इस वर्ष के अंत तक स्टार्टअप से 80 हजार कामगारों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। वे बताते हैं कि अभी अडानी पोर्ट पर दो हजार मजदूरों का नया काम पोस्ट हुआ है। मजदूरों को स्टार्टअप के माध्यम से काम पर रखा जा रहा है।
स्टार्टअप संस्थापक बताते हैं कि उनके लिए यहां तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा है। मई 2020 में मजदूरों के बीच सर्वे के बाद जब बैंकों के पास फंड लेने पहुंचा तो हर बार निराशा ही प्राप्त हुई। दिसंबर 2020 से अप्रैल 2021 के बीच प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी योजना के फंड के लिए भटके लेकिन फंड नहीं मिला। इसके बाद अप्रैल 2021 से लेकर जुलाई 2022 तक मुद्रा लोन के लिए प्रयास किया, लेकिन फंड नहीं मिला। नवंबर 2021 में एक स्टार्टअप प्रोग्राम के लिए आवेदन किया। इसमें शामिल होने के लिए उन्हें पुणे बुलाया गया। जहां उन्होंने अपने प्रोजेक्ट पर छह महीने तक काम किया।
इसके बाद सोशल इनोवेशन लैब से उनका प्रोजेक्ट पास हुआ और 10 लाख रुपये का फंड प्राप्त हुआ। इसके बाद मई 2022 में हिटाचही कंपनी व केरल स्टार्टअप मिशन द्वारा आयोजित नेशनल इनोवेशन चैलेंज में शामिल हुआ। जिसमें उनके स्टार्टअप आइडिया का चयन किया गया और 30 लाख का सीड फंड प्राप्त हुआ। सितंबर 2022 में ही उन्हें पहले वैंचर कैटालिस्ट से भी फंड प्राप्त हुआ। इसके बाद कंपनी ने मार्च 2023 में अपना प्रोडक्ट अप्लीकेशन बाजार में लॉन्च किया। जिसका बेहद उत्साहवर्द्धक नतीजे सामने आ रहे हैं।





