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Hindi News बिहारबिहार में हीटवेव ने बिगाड़ा बिजली सप्लाई का गणित, नॉर्मल और पीक आवर का अंतर खत्म; टूटा खपत का रिकॉर्ड

बिहार में हीटवेव ने बिगाड़ा बिजली सप्लाई का गणित, नॉर्मल और पीक आवर का अंतर खत्म; टूटा खपत का रिकॉर्ड

इस साल अप्रैल से ही गर्मी पड़ रही है। मई-जून में गर्मी की मार लोगों को अधिक सता रही है। इस कारण बिजली से चलने वाले उपकरण खासकर एसी की जमकर खरीदारी हुई है। दिन में भी एसी का सहारा लेना पड़ रहा है।

बिहार में हीटवेव ने बिगाड़ा बिजली सप्लाई का गणित, नॉर्मल और पीक आवर का अंतर खत्म; टूटा खपत का रिकॉर्ड
Sudhir Kumarहिन्दुस्तान,पटनाSun, 16 Jun 2024 08:54 AM
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बिहार भीषण गर्मी और जानलेवा हीटवेव की चपेट में है। गर्मी से अब तक बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है। इस साल पड़ रही भीषण गर्मी ने राज्य में बिजली खपत का गणित गड़बड़ा दिया है। अब दिन और रात में होने वाली बिजली आपूर्ति में मामूली अंतर रह गया है। पहले के वर्षों में जितनी बिजली पीक आवर यानी रात में आपूर्ति होती थी उतनी अब दिन में बिजली दी जा रही है।

पिछले साल गर्मी में दो-चार दिन ही रात की तरह दिन में बिजली की खपत हुई थी। इस साल अप्रैल से ही गर्मी पड़ रही है। मई-जून में गर्मी की मार लोगों को अधिक सता रही है। इस कारण बिजली से चलने वाले उपकरण खासकर एसी की जमकर खरीदारी हुई है। इस बार दिन में भी लोगों को एसी का सहारा लेना पड़ रहा है। इस कारण सुबह आठ बजे से ही बिजली की मांग बढ़ जा रही है। अभी हर रोज दिन में औसतन सात हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति हो रही है। पहले पीक आवर यानी रात आठ बजे से 12 बजे के बीच सात हजार मेगावाट बिजली आपूर्ति होती थी। भीषण गर्मी के कारण पीक आवर में भी वृद्धि हो गई है। पहले रात के आठ बजे से 12 बजे सबसे अधिक बिजली खपत होती थी। कंपनी इसे पीक आवर मानती थी। अब रात आठ बजे से दो बजे तक सबसे अधिक बिजली खपत हो रही है। दो बजे रात के बाद खपत में कमी होती है। लेकिन सुबह आठ बजे के बाद खपत बढ़ जा रही है। सुबह 11 बजे से शाम पांच बजे तक रात की तरह ही बिजली खपत हो रही है। इस कारण पिछले साल जहां दिन और रात की बिजली खपत में एक हजार से डेढ़ हजार मेगावाट का अंतर रहा करता था, वहीं इस बार बमुश्किल चार-पांच सौ मेगावाट का ही अंतर रह पा रहा है।

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इस साल खपत का रिकॉर्ड बना

पिछले साल कंपनी ने जुलाई में अधिकतम 7576 मेगावाट बिजली आपूर्ति की थी। यह रिकॉर्ड इस बार जून में ही टूट गया। कंपनी ने रिकॉर्ड 7588 मेगावाट बिजली आपूर्ति कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि बिहार में जिस तरह बिजली खपत में वृद्धि हो रही है, इस साल आठ हजार मेगावाट का आंकड़ा पार होना तय है। यह रिकॉर्ड जून-जुलाई में ही बन सकता है।

उपकरणों के रखरखाव में हो रही है परेशानी

दिन-रात एक समान बिजली खपत से उपकरणों के रखरखाव में परेशानी हो रही है। पहले दिन में खपत कम होने के कारण पावर सब-स्टेशन और फीडर की मरम्मत आसानी से हो जाया करती थी। अब एक समान खपत होने के कारण फीडर और सब-स्टेशनों को बंद करने में परेशानी हो रही है। उपकरणों के लगातार चलते रहने के कारण ट्रिपिंग की समस्या अधिक बढ़ गई है।