DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

बिहार: नक्सल इलाकों में बदले जाएंगे बूथ स्थल, राज्य निर्वाचन आयोग ने मांगा प्रस्ताव 

symbolic image

बिहार में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बूथ स्थल में फेरबदल किया जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा एवं विधि-व्यवस्था के आधार पर बूथों के लोकेशन को बदलने की जरूरत की समीक्षा करेगा और इसके बाद निर्णय लिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के कार्यालय ने इस संबंध में नक्सल प्रभावित जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर स्थानीय स्तर पर बूथों के लोकेशन की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, बिहार के कार्यालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के पहाड़ी इलाकों से मतदान केंद्रों को मैदानी इलाकों में लाया जाएगा। कैमूर के अघौरा पहाड़ स्थित कुछ मतदान केंद्रों को मैदानी इलाकों में आवासीय क्षेत्रों में लाने पर विचार किया जा रहा है। इस प्रकार नवादा, गया, औरंगाबाद व जमुई के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से भी बूथों को स्थानांतरित किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने नक्सल प्रभावित जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस संबंध में अपना प्रस्ताव राज्य कार्यालय को उपलब्ध कराएं। जिलों में प्रस्ताव तैयार करने के पूर्व जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी व अनुमंडल विकास पदाधिकारियों से रिपोर्ट तलब की जाएगी। फिर इसकी समीक्षा होगी। इसके बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर उनकी सहमति ली जाएगी। इसके बाद इसे चुनाव आयोग को उपलब्ध कराया जाएगा। 

चुनाव से पहले नक्सल इलाकों में आसमान से भी रखी जाएगी नजर

अर्द्धसैन्क बलों की 55 कंपनियां आएंगी

लोकसभा चुनाव के लिए बिहार में केन्द्रीय बलों के आने का सिलसिला शुक्रवार से शुरू हो जाएगा। ये बल चुनाव पूर्व सुरक्षा तैयारियों के लिए राज्य को मिले हैं। इनमें से ज्यादतर फोर्स को प्रथम चरण वाले मतदान क्षेत्रों में प्रतिनियुक्त किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने केन्द्रीय बलों को प्रतिनियुक्त करने की तैयारी पूरी कर ली है। चुनाव के दौरान केन्द्रीय बलों की प्रतिनियुक्ति दो चरणों में होती है। प्रथम चरण में अर्द्धसैनिक बलों को चुनाव पूर्व सुरक्षा इंतजाम को चाक-चौबंद करने के लिए भेजा जाता है। इसी के तहत चुनाव पूर्व अभियान के लिए बिहार को अर्द्धसैनिक बलों की 55 कंपनी दी गई हैं। इन बलों को राज्य के विभिन्न हिस्सों में प्रतिनियुक्त किया जाएगा। साथ ही वाहन जांच, जिलों की सीमाओं पर नाकेबंदी और नक्सल विरोधी अभियान में लगाया जाएगा। वहीं बाकी के बल मतदान से कुछ दिनों पहले बिहार पहुंचेंगे। 

सुरक्षा के लिहाज से प्रथम चरण संवेदनशील

बिहार में प्रथम चरण में औरंगाबाद, गया, नवादा और जमुई लोकसभा के लिए वोट डाले जाएंगे। ये लोकसभा क्षेत्र सर्वाधिक नक्सल प्रभावित हैं। ऐसे में सुरक्षाबलों के लिए प्रथम चरण का चुनाव सुरक्षा के लिहाज से सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण होगा। नक्सलियों पर लगाम लगाने के साथ मतादान संपन्न होने तक नक्सल गतिविधियों को हर हाल में रोकना होगा। इसके लिए पहले से ही एरिया डोमिनेशन किया जाता है। इसके अलावा मतदान से ठीक पहले रोड ओपनिंग पार्टी लगानी पड़ती है ताकि बूथों पर आनेजाने में मतदान कर्मी और सुरक्षाबलों को खतरों का सामना न करना पड़े। 

कितनी कंपनियां मिलेंगी, तय नहीं

लोकसभा चुनाव के लिए बिहार को कितने बल मिलेंगे, अभी यह तय नहीं है। वैसे बिहार पुलिस ने 180 कंपनी अर्द्धसैनिक बल की मांग रखी है, लेकिन 125 से 150 कंपनी मिलने की संभावना है। .

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:for lok sabha elections Booths locations will be changed in Naxal areas in bihar