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हिंदी न्यूज़ बिहारबिहार: बिना जांच के गाड़ियों को दिया जा रहा फिटनेस सर्टिफिकेट, लोगों की जान और सेहत से खिलवाड़

बिहार: बिना जांच के गाड़ियों को दिया जा रहा फिटनेस सर्टिफिकेट, लोगों की जान और सेहत से खिलवाड़

हिन्दुस्तान ब्यूरो,पटनाSudhir Kumar
Wed, 27 Oct 2021 09:46 AM
बिहार: बिना जांच के गाड़ियों को दिया जा रहा फिटनेस सर्टिफिकेट, लोगों की जान और सेहत से खिलवाड़

बिहार में तय मानकों की उपेक्षा कर गाड़ियों को धड़ल्ले से फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जा रहा है। फिटनेस के लिए परिवहन विभाग के कार्यालय आने वाली गाड़ियों में 97 फीसदी को पास कर दिया जा रहा है। एक फीसदी से भी कम गाड़ियों को ही फिटनेस में फेल किया जा रहा है। जबकि दो फीसदी गाड़ियों को फिटनेस देने का मामला पेंडिंग में है। मानकों की उपेक्षा कर वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट देकर परिवहन विभाग लोगों की जान और सेहत से खिलवाड़ कर रहा है।

ये है फिटनेस की शर्त

नियमानुसार किसी भी गाड़ी को सड़क पर चलने के लिए फिटनेस प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। इसके लिए सरकार की ओर से कई मानक तय हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों को फिटनेस प्रमाण पत्र देने के लिए पहले उन मानकों पर जांच करनी है। इसके लिए वाहनों को परिवहन कार्यालय ले जाना होता है। प्रमाण पत्र जारी करने के पहले गाड़ी का इंजन, उसकी फ्रंट और बैक लाइट की जांच की जानी है। साथ ही इंडिकेटर, हॉर्न, फॉग लाइट, फर्स्ट एड बॉक्स, रिफ्लेक्टर, डेंट-पेंट और नंबर प्लेट आदि की जांच होनी है। नंबर प्लेट में यह देखा जाना है कि गाड़ी मालिक ने हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट लगा रखा है या नहीं। सब कुछ सही हो तभी फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किया जाना है।

खटारा वाहनों को भी मिल रहा प्रमाणपत्र

हाल के वर्षों का आंकड़ा देखें तो थ्री व्हीलर में मात्र 43 को फिटनेस में फेल किया गया। ट्रैक्टर का व्यावसायिक उपयोग करने वालों में 49 तो ट्रेलर का व्यावसायिक उपयोग करने वाले 25 को फिटनेस में फेल किया गया है। गुड्स कैरेज में 64 तो कैब में 12 गाड़ियों को फेल किया गया है। 35 बस को फिटनेस में फेल किया गया। सड़क पर खटारा दिखने वाहनों को भी फिटनेस देने में परिवहन विभाग तेजी दिखा रहा है। गौरतलब है कि निजी गाड़ियों को 15 साल बाद तो व्यावसायिक गाड़ियों में नई खरीदने पर पहले के आठ सालों में हर दो साल पर तो इसके बाद हर साल फिटनेस प्रमाण पत्र लेना है।

वर्षवार गाड़ियों के फिटनेस की स्थिति

साल       पास  ,,  फेल    पेंडिंग     कुल

2021--   96532,  44,   5518    102094

2020--  133855  87    2603     136545

2019 -- 182028  121  1254     183403

2018--  97833     53    869       98755

जांच के लिए पर्याप्त उपकरण भी नहीं

परिवहन विभाग के पास तय मानकों की जांच के लिए पर्याप्त उपकरण भी नहीं हैं। इस कारण पटना सहित तमाम जिलों में फिटनेस देने के मामले में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। वाहन मालिक केवल कागजात लेकर परिवहन कार्यालय आते हैं और तय रकम से अधिक भुगतान कर फिटनेस प्रमाण पत्र प्राप्त कर रहे हैं। अन्य मानकों की कौन कहे, विभाग ने तय किया है कि अगर कोई पुरानी गाड़ी का पुनर्निबंधन, पता परिवर्तन या दुरुस्ती प्रमाण पत्र लेने के लिए जिला परिवहन कार्यालय आए तो अनिवार्य रूप से उन गाड़ियों में हाई सिक्यूरिटी नंबर प्लेट लगाए जाएं, लेकिन डीटीओ कार्यालय में इस नियम का भी पालन नहीं हो रहा है।


 

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