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बिहार में अब मत्स्य, डेयरी और पॉल्ट्री को भी मिलेगा केसीसी लोन

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बिहार में तमाम बैंकों की दिलचस्पी पैसा जमा कराने में तो है लेकिन ऋण देने में नहीं। यही कारण है कि वर्ष 2018-19 में बैंकों की सीडी रेशियो और एसीपी (एन्युअल क्रेडिट प्लान) का आंकड़ा वर्ष 2017-18 की तुलना में और घट गया है। इन तमाम बातों पर बुधवार को मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक में मंथन हुआ।

वर्ष 2019-20 के लिए 1.45 लाख करोड़ ऋण बांटने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बैंक मत्स्य, डेयरी और मुर्गी पालन (पॉल्ट्री) करने वाले किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड से लोन देंगे। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बैठक में वर्ष 2018-19 की समीक्षा की गई मगर आंकड़े संतोषजनक नहीं हैं। बैंकों ने 1.30 लाख करोड़ के एसीपी की तुलना में 84.29 प्रतिशत ऋण बांटे, जबकि वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 95.85 प्रतिशत था।

सीडी रेशियो (साख जमा अनुपात) में भी एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। कहा कि ऋण देने में खराब प्रदर्शन करने वाले दस जिलों की पहचान की गई है। इसमें मधुबनी, गोपालगंज, कटिहार, शिवहर, बांका, सुपौल, मधेपुरा, जहानाबाद, सीवान शामिल हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन जिलों के बैंक अधिकारियों से भी बात की गई है। श्री मोदी ने कहा कि स्टेट बैंक के मुख्य महाप्रबंधक से ऐसे जिलों में जाकर समीक्षा करने को कहा गया है।कहा कि बिहार में फसल बीमा योजना की जगह फसल सहायता योजना लागू है। मगर किसान क्रेडिट कार्ड से ऋण के लिए फसल बीमा योजना में पंजीकरण की बाध्यता है। इसे खत्म कराने के लिए केंद्र सरकार से बात की जा रही है। इसे 21 जून को दिल्ली में होने वाली बैठक में उठाएंगे। कहा कि समय पर ऋण लौटाने वाले किसानों को चार प्रतिशत ब्याज देना होता है। इसमें भी एक प्रतिशत राज्य सरकार दे रही है। कहा कि गत वित्तीय वर्ष में 10 लाख किसान क्रेडिट कार्ड बनाने का लक्ष्य था पर 2.19 लाख ही बनाए गए। 31 मार्च 2019 तक राज्य में बैंकों का एनपीए 15 हजार करोड़ था। इसमें कृषि क्षेत्र का अधिक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि लोन समय पर लौटाएं। पिछले 12 वर्षों में बैंकों का ऋण वितरण 10 गुना बढ़ा है।

केसीसी बनवाने बैंक न जाना पड़े: 
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जब बिहार सरकार की सारी योजनाओं का लाभ लोगों को ऑनलाइन मिल सकता है तो सभी बैंकिंग सुविधाएं क्यों नहीं। बैंकों से कहा गया है कि ऐसी तकनीक विकसित करें कि लोगों को किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने या अन्य लोन लेने के लिए बैंक न आना पड़े। इस मामले को वे दिल्ली की बैठक में उठाएंगे। बैठक में नेशनल चेंबर के अध्यक्ष पीके अग्रवाल ने बैंकों द्वारा सिक्के न लेने का मामला उठाया। उपमुख्यमंत्री इस समस्या को भी दिल्ली में उठाएंगे।

ये रहे मौजूद : 
बैठक में कृषि मंत्री प्रेमकुमार, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश कुमार शर्मा, उद्योग मंत्री श्याम रजक, सहकारिता मंत्री राणा रणधीर, विकास आयुक्त सुभाष शर्मा, अपर मुख्य सचिव अतुल प्रसाद, प्रधान सचिव वित्त डॉ. एस. सिद्धार्थ सहित विभिन्न विभागों के प्रधान सचिव, सचिव, बैंक और आरबीआई के अधिकारी मौजूद रहे।

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  • Web Title:Fishery dairy and poultry will also get KCC loan in Bihar