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नशे में धुत टीचर ने समय से पहले स्कूल में छुट्टी दी, गुस्साए ग्रामीणों ने कर डाला ये हाल

सासाराम में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जब नशे में टल्ली शिक्षक ने समय से पहले ही स्कूल की छुट्टी कर दी। गुस्साए ग्रामीण उसे बांधकर पुलिस थाने ले गए। गिरफ्तारी बाद उसे सस्पेंड कर दिया है

नशे में धुत टीचर ने समय से पहले स्कूल में छुट्टी दी, गुस्साए ग्रामीणों ने कर डाला ये हाल
Sandeepसंवाददाता,सासारामFri, 01 Mar 2024 06:51 AM
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बिहार में इन दिनों सरकारी स्कूलों की टाइमिंग को लेकर काफी सख्ती है। शिक्षा विभाग के एसीएस केके पाठक की सख्ती के चलते शिक्षक स्कूल टाइम पर पहुंच रहे हैं। लेकिन सासाराम से जो मामला सामने आया है। उससे तो यही लगता है, इन मास्टर साहब पर केके पाठक की सख्ती का कोई असर ही नहीं है। दरअसल नौहट्टा थाना क्षेत्र के कैमूर पहाड़ी पर स्थित मध्य विद्यालय कोरहास के शिक्षक रविशंकर भारती ने शराब के नशे में स्कूल की छुट्टी कर दी। जिसके बाद नाराज ग्रामीण स्कूल पहुंचे। और फिर शिक्षक के हाथ-पांव बांधकर पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने नशे में होने की पुष्टि के बाद शिक्षक को गुरुवार को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 


दरअसल बुधवार की सुबह शिक्षक रविशंकर भारती शराब पीकर स्कूल पहुंचे और बच्चों की छुट्टी कर दी। बच्चे जब घर पहुंचे तो अभिभावकों ने पूछा की अभी क्यों आ गए। बच्चों ने बताया की सर ने स्कूल की छुट्टी कर दी। आक्रोशित ग्रामीण स्कूल पहुंचे तो शिक्षक को नशे में पाया। ग्रामीण उनके दोनों हाथ-पैर बांधकर जंगल में बाइक तक लाए। बाइक पर जबरदस्ती बैठाया तथा उसे पचास किलोमीटर दूर नौहट्टा थाना लाकर पुलिस को सौंप दिया। बीईओ सच्चिदानंद साह ने बताया कि नियोजन इकाई को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा। वहीं जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि गिरफ्तारी होने के बाद शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है।

शराब पीकर स्कूल पहुंचने का ये कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले बीते महीने में खगड़िया में दो शिक्षक शराब के नशे में स्कूल पहुंचे थे। और कई दिनों से नशे में विद्यालय पहुंचते थे। और बच्चों से गाली-गलौज करते थे। जिसके बाद ग्रामीणों ने दोनों को कमरे में बंद कर पुलिस को इस बात की सूचना दी थी। और फिर आरोपी शिक्षकों को गिरफ्तार कर लिया गया था। बिहार में 2016 से शराबबंदी लागू है, इसके बावजूद स्कूल जैसी जगहों पर भी शिक्षक ही शराब पीकर पहुंच रहे है। ऐसे टीचर्स पर केके पाठक की सख्ती भी बेअसर साबित हो रही है।

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