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Hindi News बिहारकार चलाते वक्त आई झपकी; कंटेनर से जोरदार टक्कर, हादसे में इकलौते बेटे और भाई की मौत

कार चलाते वक्त आई झपकी; कंटेनर से जोरदार टक्कर, हादसे में इकलौते बेटे और भाई की मौत

एक परिवार के लिए खुशियां अचानक गम में बदल गई। जब काठमांडू से घूमकर लौट रहे परिवार की गाड़ी कंटेनर से टकरा गई। जिसमें अश्विनी के इकलौते बेटे और फुफेरे भाई की मौत हो गई। झपकी आने से हादसा हुआ।

कार चलाते वक्त आई झपकी; कंटेनर से जोरदार टक्कर, हादसे में इकलौते बेटे और भाई की मौत
Sandeepहिन्दुस्तान,हाजीपुरTue, 11 Jun 2024 07:41 AM
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हाजीपुर जिले के गवानपुर थाना क्षेत्र के रतनपुरा पेट्रोल पंप के पास सोमवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे हाजीपुर-मुजफ्फरपुर एनएच-22 पर सड़क किनारे खड़े कंटेनर से एक कार टकरा गई। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई। जबकि चार लोग गंभीर रूप से घालय हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से क्षतिग्रस्त कार का दरवाजा तोड़कर घायलों को बाहर निकाला गया और इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया। सदर अस्पताल में बच्चे अथर्व की मौत हो गई, जबकि चार अन्य लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद दिनभर भर्ती रखने के बाद छुट्टी दे दी गई। 

हादसे में कार चला रहे अश्वनी के फूफेरे भाई और उनके इकलौते बेटे की मौत हो गई। रोते-बिलखते अश्वनी कुमार ने बताया कि कैसे झपकी आई उन्हें इसका एहसास भी नहीं हुआ और हादसा हो गया। हादसे के बाद सूचना मिलते ही परिजन नालंदा और नवादा से हाजीपुर सदर अस्पताल पहुंचने लगे। जैसे-जैसे परिचितों को हादसे के बारे में पता चलते गया, वैसे-वैसे लोग सदर अस्पताल पहुंचने लगे। 

घटना के संबंध में परिजनों ने बताया कि अश्वनी कुमार अपनी पत्नी रंजीता पाल, पुत्र अथर्व कुमार और पुत्री आश्वी आर्या के साथ काठमांडू घूमने के लिए गए थे। काठमांडू से घूमकर आने के बाद रविवार की रात को रक्सौल में फूफेरे भाई के यहां ठहर गए। इसके बाद अश्वनी कुमार रक्सौल से अपने फुफेरे भाई नागेन्द्र पाल और भाभी शांति देवी के साथ पटना के लिए निकले। सोमवार की अहले सुबह करीब 4 बजे सभी लोग कार में बैठकर पटना की ओर निकले थे। 

परिजनों ने बताया कि कार चलाते समय अश्वनी को झपकी आ गई, जिससे यह हादसा हो गया। हादसे में अश्वनी के घर के चिराग अथर्व की मौत हो गई। अथर्व की मां बार-बार यही कह रही थी कि मेरा बेटा कहां है, ठीक तो है ना..। यह कहते हुए सदर अस्पताल में वह बेहोश होकर गिर जाती। होश में आने पर बार-बार यही कहती कि एक बार मेरे बेटे का मुंह दिखा दो....। किसी तरह लोगों ने उसे संभाला और दिलासा देने की कोशिश करते रहे कि उनका पुत्र सही सलामत है।

काठमांडू घूमने के दौरान अथर्व ने अपने लिए दूरबीन के साथ कई खिलौने खरीदे। ताकि घर जाकर अपनी बहन के साथ दूरबीन और अन्य खिलौना से खेलेगा, लेकिन, होनी को कुछ और ही मंजूर था, हादसे के वक्त अर्थव अपने हाथों में दूरबीन से सड़क किनारे का नजारा देख रहा था। उसे पता नहीं था कि उसका आज अंतिम दिन है। कंटेनर से टकराने के बाद जिस सीट पर अर्थव बैठा था दूरबीन उसी जगह पर गिरी पड़ी मिली। मृत किशोर अथर्व के माता रंजीता पाल विद्युत विभाग एवं पिता अश्विन कुमार जल संसाधन विभाग में कार्यरत है।

आंख खुली तो हम सदर अस्पताल में थे अश्वनी कुमार ने बताया कि मुझे झपकी कब आई, मुझे पता नहीं चला। जब आंख खुली तो हम सदर अस्पताल के वार्ड में भर्ती थे। इतना जल्दी सब कुछ हो गया, कुछ समझ में नहीं आया। हादसे में मेरा सब कुछ चला गया और कहते हुए रोने लगे।

हादसे के बाद पोस्टमार्टम कराने को लेकर दोनों के शव को सदर अस्पताल लाया गया। जहां नागेन्द्र पाल के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। वहीं अर्थव के मृत शरीर का पोस्टमार्टम कराने को लेकर मनाकर दिया गया। नागेन्द्र पाल का दाह संस्कार नालंदा में पैतृक गांव में किया जाएगा, वहीं अर्थव के पार्थिव शरीर को पैतृक घर नवादा ले जाया गया।