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विकास की रणनीति समावेशी, सतत् और आर्थिक प्रगति पर आधारित

lalji tandon take oath as governor of bihar

बिहार के राज्यपाल लालजी टंडन ने आज नीतीश सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि  राज्य में विकास की रणनीति समावेशी, न्यायोचित और सतत् होने के साथ आर्थिक प्रगति पर आधारित है।

टंडन ने बजट सत्र के पहले दिन बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को नवनिर्मित सेंट्रल हॉल में संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार 'न्याय के साथ विकास' का नजरिया रखते हुए सभी लोगों, क्षेत्रों और वगोर्ं को साथ लेकर चलने के लिए कृत संकल्पित है। बिहार को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए सुशासन के कार्यक्रम को पूरे राज्य में लागू किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताएं सभी राज्यवासियों को न सिर्फ मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है बल्कि आधारभूत संरचनाओं का विस्तार भी करना है।

 राज्यपाल ने कहा कि सरकार की सवोर्च्च प्राथमिकता विधि-व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए कानून का राज स्थापित कर लोगों को भयमुक्त समाज प्रदान करने की रही है । राज्य में संगठित अपराध पर कड़ाई से अंकुश लगाया गया है। राज्य में सामाजिक सौहार्द्र और साम्प्रदायिक सछ्वाव कायम है । उन्होंने राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो के अद्यतन प्रकाशित आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि दर्ज संज्ञेय अपराधों की राष्ट्रीय औसत दर प्रति लाख की जनसंख्या पर 233.6 की तुलना में बिहार में यह संख्या मात्र 157.4 है । अपराध दर के अनुसार राज्य एवं संघ शासित प्रदेशों की तुलना में बिहार का स्थान 22 वां है।

टंडन ने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार की नीति जीरो टॉलरेंस की रही है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने वर्ष 2०18 में रंगेहाथ रिश्वत लेने से संबंधित 53 मामले, आय से अधिक संपत्ति के दो मामले और पद के भ्रष्ट दुरुपयोग के चार मामले दर्ज किये हैं। पांच मामलों में विभिन्न लोक सेवकों के विरुद्ध चल-अचल संपत्ति के अधिहरण का आदेश पारित किया गया है।

राज्यपाल ने कहा कि इसी तरह आर्थिक अपराध इकाई ने आय से अधिक संपत्ति के 45 मामले दर्ज किये, जिनमें 29 मामले में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम के तहत 24 मामलों में लोक सेवकों की परिसंपत्तियों की जब्ती की कार्रवाई की जा रही है। अभी तक कुल 131 मामलों में 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग एक्ट' के तहत संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव प्रवर्तन निदेशालय को भेजा गया है, जिनमें 256 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति शामिल है।

टंडन ने कहा कि प्रशासनिक एवं वित्तीय संरचनाओं को सुदृढ़ बनाने के साथ राज्य के नागरिकों को कानूनी अधिकार देकर सशक्त बनाने की नीति पर लगातार कार्य किया जा रहा है। बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत तय सीमा में लोगों की शिकायत की सुनवाई की जा रही है। अबतक चार लाख से अधिक शिकायतों का निवारण किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम को वर्ष 2०18 के सुप्रतिष्ठित 'कलाम इनोवशन इन गर्वनेंस अवार्ड' तथा 'स्कॉच अवार्ड फॉर गुड गर्वनेंस' से सम्मानित किया गया है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय कॉमनवेल्थ एसोसिएशन ने भी इस अधिनियम के क्रियान्वयन को सर्टिफिकेट ऑफ डिस्टिंकशन प्रदान किया है।

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