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Cyber Crime: लकी ड्रा का झांसा देकर लूट लेते थ साइबर ठग, अरेस्ट हुए 12 शातिर; खुलासे से पुलिस के होश उड़े

पुलिस ने साइबर अपराधियों के एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने मीशो ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए लकी ड्रॉ में लकी ड्रा निकलने का झांसा देकर ठगी करते 12 साइबर अपराधियों को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।

Cyber Crime: लकी ड्रा का झांसा देकर लूट लेते थ साइबर ठग, अरेस्ट हुए 12 शातिर; खुलासे से पुलिस के होश उड़े
Malay Ojhaहिन्दुस्तान,नवादाThu, 04 Jan 2024 09:47 PM
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बिहार के नवादा जिले की वारिसलीगंज पुलिस ने साइबर अपराधियों के एक बड़े गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने मीशो ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए लकी ड्रॉ निकलने का झांसा देकर ठगी करते 12 साइबर अपराधियों को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अपराधियों में 01 दिल्ली, 02 झारखंड के गिरिडीह व 02 शेखपुरा जिले के रहने वाले हैं। वहीं इनमें से दो नाबालिग भी बताये जाते हैं। इनके पास से 30 मोबाइल, जिसमें 22 आईफोन, 04 एन्ड्रॉयड व 04 कीपैड मोबाइल फोन तथा 90 पेज कस्टमर डेटा शीट बरामद किये गये हैं। डेटा शीट में उपभोक्ताओं के नाम,पता व मोबाइल नंबर शामिल हैं। इसके अलावा मौके से 02 बाइक व 01 इलेक्ट्रिक साइकिल भी जब्त की गयी है। जब्त की गयी आईफोन की कीमत करीब 20 लाख बतायी जाती है। ऑनलाइन ठगी के मिले इनपुट पर नवादा एसपी अम्बरीष राहुल के निर्देश पर वारिसलीगंज पुलिस की एक टीम ने बज्रा टीम के साथ बुधवार की शाम नालंदा जिले की सीमा से सटे वारिसलीगंज थाने के सोरहीपुर गांव के बगीचे में छापेमारी कर अपराधियों को दबोच लिया। छापेमारी टीम का नेतृत्व वारिसलीगंज थानाध्यक्ष आशीष कुमार मिश्रा ने किया। 

50 से अधिक अपराधी ठगी में थे लिप्त
वारिसलीगंज थाने में गुरुवार की शाम आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में थानाध्यक्ष ने पूरे मामले का खुलासा किया। थानाध्यक्ष के मुताबिक छापेमारी के वक्त बगीचे में करीब 50 साइबर अपराधी मोबाइल से ठगी में लिप्त थे। बगीचे की घेराबंदी कर 12 अपराधियों को मौके से गिरफ्तार किया गया। जबकि सरगना समेत शेष अपराधी भाग निकले। हालांकि पुलिस ने गिरफ्तार अपराधियों की निशानदेही पर उनके ठिकानों पर छापेमारी की। परंतु कोई भी अपराधी हाथ नहीं लगा। 

छह लाख का लकी ड्रा निकलने का देते थे झांसा
पूछताछ में अपराधियों ने बताया कि उनके द्वारा मीशो नामक ऑनलाइन मार्केटिंग कम्पनी से उपभोक्ताओं के आर्डर का डिटेल्स चुरा कर ठगी की जा रही थी। उपभोक्ताओं को उनका आर्डर डिटेल्स बताने पर उन्हें यकीन हो जाता था और वे झांसे में आ जाते थे। उपभोक्ताओं को फोन कर बताया जाता था कि उनका 06 लाख का लकी ड्रा निकला है। लकी ड्रा को प्राप्त करने के लिए प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में उपभोक्ताओं से 03 हज़ार से 35 सौ रुपये मांगे जाते थे और विभिन्न बैंक खातों में राशि ट्रांसफर करा ली जाती थी। ड्रा की राशि भेजने का झांसा देकर अपराधी उनके बैंक खाता का डिटेल्स भी ले लेते थे। जिसे बाद में अपराधियों द्वारा हैक कर लिया जाता था और उनका बैंक खाता भी खाली कर दिया जाता था। 

सरगना उपलब्ध कराता था डेटा
अपराधियों के मुताबिक गिरोह का सरगना उन्हें फर्जी सिम से लेकर उपभोक्ताओं का मीशो कम्पनी का डेटा तक उपलब्ध कराता था। ठगी की रकम भी सरगना अपने ही बैंक खाते में मंगाता था। इसके एवज में उन्हें ठगी की गयी राशि का महज 30 फीसदी दिया जाता था। जबकि एटीएम से रुपये निकालने वाले को 20 फीसदी राशि दी जाती थी। शेष 50 फीसदी राशि सरगना अपने पास ही रख लेता था। पुलिस के मुताबिक अपराधियों के पास से बरामद सिम भी फर्जी पाया गया है। इनमें से कई सिम पश्चिम बंगाल के हैं। 

लालच में फंसे थे दूसरे राज्यों के युवा
पुलिस के मुताबिक अपराधियों का नेटवर्क देश के प्राय: सभी राज्यों में फैला है। जिसके कारण दूसरे राज्यों व जिले के युवा इनके संपर्क में आते रहते हैं। बातचीत करने में माहिर होने के कारण दूसरे राज्यों के युवाओं की इन अपराधियों को तलाश होती है। ऐसे में कम समय में बिना मेहनत के अधिक पैसा कमाने की लालच में युवा इस धंधे की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। गिरफ्तार किये गये दिल्ली, झारखंड व अन्य जिलों के अपराधी इसी तरह से इस गिरोह में शामिल हुए बताये जाते हैं। अपराधियों से पूछताछ में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि दूसरे गांवों व जिले के रिश्तेदार भी इस धंधे में तेजी से शामिल हो रहे हैं। शुरू में ये लोग यहां ट्रेनिंग लेते हैं और बाद में अपने घरों व गांवों में जाकर अपना खुद का सिंडिकेट चलाना शुरू कर देते हैं। 

48 अपराधियों के विरुद्ध प्राथमिकी
इस मामले में वारिसलीगंज थाने में 48 अपराधियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। इनमें 33 अपराधियों को नामजद किया गया है। इनमें गिरफ्तार 12 अपराधी शामिल हैं। वहीं 10-15 अज्ञात भी मामले में आरोपित बनाये गये हैं। 04 जनवरी को दर्ज वारिसलीगंज थाना कांड संख्या 05/24 में आरोपितों के विरुद्ध सामूहिक रूप से साजिश के तहत धोखाधड़ी करने व आईटी एक्ट के तहत आरोप लगाये गये हैं। 

कतरीसराय से सटा है सोरहीपुर
वारिसलीगंज के कोचगांव पंचायत का सोरहीपुर गांव नालंदा की सीमा से सटा है। कालांतर में साइबर ठगी का पर्याय रहा कतरीसराय थाना क्षेत्र में इसकी सीमा से लगा है। दो दशक पहले आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर फर्जी कारोबार की शुरूआत कतरीसराय से ही हुआ था। मोबाइल फोन के प्रचलन में आने के बाद यह धंधा परिवर्तित होकर चेहरा पहचानो, इनाम पाओ तथा अन्य कई प्रकार का ठगी में शामिल हो गया। धीरे-धीरे इस धंधे ने सीमा पर स्थित वारिसलीगंज के सोरहीपुर और चकवाय समेत दर्जनों गांवों को आगोश में ले लिया। 

इन्हें किया गया गिरफ्तार 
गिरफ्तार अपराधियों में नई दिल्ली के विकासपुरी जिले के रनौला थाना क्षेत्र के उत्तम नगर, विकास नगर एस ब्लॉक-15 के सच्चिदानंद राम का बेटा संतोष कुमार (26), झारखंड के गिरिडीह जिले के गावा थाना क्षेत्र के गावा गांव के देव ठाकुर का बेटा आकाश ठाकुर (32), शेखपुरा जिले के करन्डे थाना क्षेत्र के करन्डे गांव के उमेश सिंह का बेटा मुकेश कुमार (30) व  करन्डे थाना क्षेत्र के कपासी करन्डे गांव के सुबोध सिंह का बेटा बिट्टू कुमार (25), वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के कान्धा गांव के छोटेलाल चौधरी का बेटा नवीन कुमार (25) व कान्धा गांव के रविन्द्र राम का बेटा पिन्टू कुमार (25), वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के सोरहीपुर गांव के अरबिन्द सिंह का बेटा चुन्नू कुमार (28), सोरहीपुर गांव के श्रीकांत सिंह का बेटा दिलखुश कुमार (23) व सोरहीपुर गांव के राजकुमार मिस्त्री का बेटा मुकेश कुमार (26) तथा वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के कोचगांव के उमेश ठाकुर का बेटा अमित कुमार (26) शामिल हैं। इनके अलावा दो अन्य अपराधी नाबालिग बताये जाते हैं।

एसपी के निर्देश पर गठित टीम द्वारा छापेमारी कर लकी ड्रा के नाम पर ठगी कर रहे 12 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से आईफोन समेत 30 मोबाइल, 90 पेज डेटा शीट, बाइक आदि बरामद की गयी है। गिरोह के अन्य अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। 
-आशीष कुमार मिश्रा, इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष,वारिसलीगंज। 

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