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12 जुलाई, 2020|2:45|IST

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कोराेना वायरस : एक महीना पहले डेंजर जोन में था पटना, अब पहुंचा ग्रीन जोन में

कोरोना वायरस ने जहां पूरे मानव समुदाय को घरों में कैद कर दिया है ,वहीं वातावरण स्वच्छ हो गया है। हवा, जल और ध्वनि प्रदूषण काबू में है। लंबे समय बाद  शुद्धता और स्वच्छता का साथ दिखा है। एक महीना पहले पटना शहर में सांस लेना मुश्किल था। यहां की हवा जहरीली थी। धूलकण और अधिक ध्वनि प्रदूषण से लोग बीमार हो रहे थे लेकिन 20 अप्रैल की हवा लोगों को स्वस्थ बना रही है।

ऐसा केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण पर्षद द्वारा जारी राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक से स्पष्ट हो रहा है। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के बाद से ही वातावरण स्वच्छ हो रहा है। एक माह बाद सोमवार को देश के नक्शे पर करीब 80 फीसदी हिस्से पर वायु गुणवत्ता सूचकांक सिर्फ ग्रीन ही दिख रहा है। इसमें पटना भी शामिल है। शहर के गांधी मैदान, बेली रोड, बोरिंग रोड, डाकबंगला चौराहा, आयकर गोलंबर, ईको पार्क समेत इस सटे हुए सभी क्षेत्र ग्रीन जोन में आ चुके हैं। ईको पार्क का वायु गुणवत्ता सूचकांक 67 है तो गांधी मैदान का सूचकांक 93 है। वहीं बेली रोड में पीएम 2.5 यानी महीन धूलकण का औसत सूचकांक 36 है। इसी प्रकार पटना की वायु में धूलकण अब तैर नहीं रहे हैं। शुद्ध हवा और सांस लेने योग्य हवा होने से घरों में कैद लोगों को बड़ी राहत मिली है।

मुजफ्फरपुर भी पहुंचा ग्रीन जोन में

वायु प्रदूषण के मामले में मुजफ्फरपुर हमेशा पटना से कदमताल करता रहा है। यहां पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा खतरनाक स्तर पर अक्सर बनी रहती थी। लेकिन इस पिछले एक महीने में यहां की भी हालत पटना जैसी हो गई है। करीब एक महीना पहले मुजफ्फरपुर की वायु गुणवत्ता सूचकांक अधिकतम 500 तक थी लेकिन 20 अप्रैल को सूचकांक 79 तक आ गया है। हालांकि गया शहर फिलहाल ग्रीन जोन में नहीं है लेकिन यहां भी लॉकडाउन का असर साफ दिखा है। गया का गुणवत्ता सूचकांक घटकर 148 पहुंच गया है जो कि एक महीना पहले यहां अधिकतम 400 के करीब रहता था।

80 फीसदी वायु प्रदूषण मानव जनित

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार घोष ने बताया कि पटना, मुजफ्फरपुर और गया का वायु प्रदूषण के स्तर में संतोषजनक सुधार हुआ है। लॉक डाउन ने यह साबित कर दिया है कि वायु प्रदूषण फैलाने में 80 फीसदी हिस्सा मानव द्वारा जनित है। फिलहाल अभी हमारी प्राथमिकता है कोविड-19 से पार पाना। लॉकडाउन पशु-पक्षी पर नहीं बल्कि मानव पर लगाया गया है। जिससे सड़कों पर वाहन नहीं चल रहे हैं। ईंट भट्ठे बंद हैं और इनके इको फ्रेंडली होने से लाभ हुआ है। वहीं, सड़कों के किनारे कोयले और लकड़ी से छोटी-बड़ी दुकान और ढाबा बंद होने से फायदा हुआ। लोगों का मूवमेंट कम हुआ है। जिसके कारण वायु गुणवत्ता संतोषजनक स्तर पर पहुंचा है। लोगों को अब अपनी जीवनशैली में बदलाव करने का समय आ गया है।

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  • Web Title:coronavirus Patna was in Danger Zone a month ago now reached Green Zone Central Pollution Control Board air water and noise pollution