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ठंडे बस्ते में बिहार के पहले एक्सप्रेस वे का निर्माण, जानिए कहां फंसा है पेच?

बिहार के पहले एक्सप्रेस का निर्माण बीते एक साल से ठंडे बस्ते में हैं। वन विभाग की आपत्ति की वजह से एजेंसी चयन के एक साल बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। और सड़क निर्माण अधर में लटका है।

ठंडे बस्ते में बिहार के पहले एक्सप्रेस वे का निर्माण, जानिए कहां फंसा है पेच?
Sandeepहिन्दुस्तान ब्यूरो,पटनाSun, 23 Jun 2024 08:40 PM
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बिहार को उत्तरप्रदेश, झारखंड व बंगाल से जोड़ने वाले काशी (वाराणसी)-कोलकाता एक्सप्रेस-वे का निर्माण नहीं शुरू हो पा रहा है। एक साल पहले एजेंसी चयन के बावजूद वन विभाग की मंजूरी नहीं मिलने के कारण इस सड़क का निर्माण अधर में लटक गया है। पिछले वर्ष ही इस सड़क को एनएच का दर्जा मिला था। राज्य के 61वें एनएच के रूप में अधिसूचित यह सड़क बिहार का पहला एक्सप्रेस वे है। अधिकारियों के अनुसार वन विभाग ने पहले इस सड़क के निर्माण में 70 हजार पेड़ों के नष्ट होने का हवाला दिया। हालांकि, एनएचएआई ने जांच के दौरान मात्र 30 हजार पेड़ों के ही नष्ट होने की बात कही। लेकिन, वन विभाग अपनी ही बात पर अड़ा रहा। 

तब एनएचएआई की ओर से कहा गया कि अगर विभाग अनुमति दे तो वह विकल्प के तौर पर एलिवेटेड का भी निर्माण कर सकता है। वन विभाग ने यह भी कहा कि इस सड़क के निर्माण में 140 हेक्टेयर वन की जमीन का उपयोग हो रहा है। इसके समतुल्य जमीन वन विभाग को दी जाए। तब बिहार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें सहमति बनी कि वन विभाग को बांका और जमुई में समतुल्य जमीन दी जाएगी ताकि उसे वह वन क्षेत्र के रूप में विकसित कर सके। इस मसले पर सहमति बने हुए भी लंबा समय बीत चुका है पर यह मामला भी ठंडे बस्ते में चला गया है। अब तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से एजेंसी सड़क का निर्माण शुरू नहीं कर पा रही है। 

वाराणसी के रेवासा गांव से शुरू होकर बिहार के चांद में प्रवेश करेगी                                        उत्तरप्रदेश के वाराणसी के रेवासा गांव के निकट एनएच 19 से यह सड़क शुरू होकर चंदौली होते हुए बिहार के चांद में प्रवेश करेगी। चैनपुर, रामपुर, तिलौथू, कुटुम्बा, इमामगंज, संग्रामपुर होते हुए झारखंड के हंटरगंज में प्रवेश करेगी। चतरा, पत्थलगड़ा, सेमरिया, चुरचू, पेटरवार, कसमार, जयपुर, पुरुलिया, पुंछा, तलडंगरा, गहरबेटा, घाटल होते हुए पश्चिम बंगाल में बगनान के निकट एनएच 16 पर जाकर यह सड़क समाप्त होगी। इस सड़क की कुल लंबाई लगभग 672 किलोमीटर है। इसमें यूपी में 22.8 किलोमीटर, बिहार में 161.60 किमी, झारखंड में 202.60 किमी तो पश्चिम बंगाल में 285 किलोमीटर है।  

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सात पैकेज में होना है निर्माण                                                                                                    बिहार में इस सड़क का निर्माण सात पैकेज में होना है। इसमें से छह का टेंडर जारी हो चुका है। छह में पांच का काम भी अवार्ड हो चुका है। एजेंसी का चयन कर लिया गया है। पैकेज चार में कैमूर व सासाराम के बीच सुरक्षित इलाके (वन्यजीव अभ्यारण्य) में टनल का निर्माण होना है। एनएचएआई की ओर से इसका जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा। पैकेज एक कुल 27 किलोमीटर का है। इसमें 22 किलोमीटर यूपी की सीमा में है तो पांच किलोमीटर बिहार की सीमा में है। बाकी छह पैकेज पूरी तरह बिहार की सीमा में अवस्थित है। एक्सप्रेस वे में सोन नदी पर एक पुल भी बनना है। यह पुल छह लेन का होगा। तिलौथू के समीप इस पुल का निर्माण होगा। ब्रिज व एप्रोच को मिलाकर इसकी कुल लंबाई लगभग 10.7 किलोमीटर है।  

यूपी, झारखंड और बंगाल आना-जाना होगा आसान
राज्य की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में से एक इस एक्सप्रेस-वे के बनने से बिहार के लोगों को यूपी, झारखंड और बंगाल आना-जाना आसान होगा। छह लेन के इस एक्सप्रेस-वे के बनने से वाराणसी से कोलकाता की दूरी 14 घंटे के बदले मात्र सात घंटे में पूरी की जा सकेगी। आवागमन के साथ ही यूपी,  झारखंड व पश्चिम बंगाल के बीच बिहार के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। विशेषकर हल्दिया बंदरगाह तक मालों की आवाजाही आसान होगी। एक्सप्रेस वे के निर्माण पर 35228 करोड़ खर्च होगा और यह 18 शहरों से सीधा जुड़ जाएगा।  

एनएचएआई, पटना के क्षेत्रीय अधिकारी वाईबी सिंह ने बताया कि बिहार के लिए यह महत्वपूर्ण परियोजना है। इसी वित्तीय वर्ष में इस परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू करने की मंशा है। अगर निर्माण कार्य शुरू हो जाए तो परियोजना को समय पूरा कर लिया जाएगा।