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बिहार की लोकसभा सीटों का हाल: लव कुश की कर्मभूमि वाल्मीकिनगर, किसी MP के मंत्री नहीं बनने का है मलाल

1989 में देश में नई राजनीति की आंधी में यहां कांग्रेस का किला ढहा और फिर वह यहां वापसी नहीं कर सकी। कांग्रेस की जमीन पर समाजवाद के पौधे लहलहाने लगे। बीच में एक बार भगवा रंग भी चढ़ा।

बिहार की लोकसभा सीटों का हाल: लव कुश की कर्मभूमि वाल्मीकिनगर, किसी MP के मंत्री नहीं बनने का है मलाल
Sudhir Kumarसुधीर कुमार,बगहाMon, 19 Feb 2024 01:05 PM
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बिहार में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की तालिका में पहला स्थान वाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र का है। यह क्षेत्र वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व, हरे-भरे जगलों और भारत-नेपाल सीमा पर अवस्थित गंडक बराज के लिए जाना जाता है।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक यहां गंडक किनारे महर्षि वाल्मीकि का आश्रम था, जहां माता सीता ने दो पुत्रों-लव व कुश के साथ निर्वासित जीवन व्यतीत किया था। यह क्षेत्र 1952 से 1989 तक कांग्रेस का दुर्ग रहा। इस दौरान सिर्फ 1977 में एक बार उसके किले में सेंध लगी थी। तब यह सीट बगहा संसदीय क्षेत्र कही जाती थी।

1989 में देश में नई राजनीति की आंधी में यहां कांग्रेस का किला ढहा और फिर वह यहां वापसी नहीं कर सकी। कांग्रेस की जमीन पर समाजवाद के पौधे लहलहाने लगे। बीच में एक बार भगवा रंग भी चढ़ा। 1952 से लेकर 2009 तक बगहा और वाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र से सात चेहरे सांसद बने। लेकिन, किसी को केंद्रीय कैबिनेट में जगह नहीं मिली। इसका मलाल क्षेत्र की जनता को है।

1952 में अस्तित्व में आने के साथ ही बगहा लोकसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गया। इसलिए राजनीति भी इसी फैक्टर के ईद-गिर्द सिमटी रही। 1952 से 1971 के चुनाव तक यहां से भोला राउत रिकॉर्ड सात बार जीते। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में भारतीय संसदीय दल का प्रतिनिधित्व भी किया। 1977 में जनता पार्टी के जगन्नाथ प्रसाद स्वतंत्र को जीत मिली। 1980 और 1984 में भोला राउत ने पुन वापसी की। 1989 से 1999 के चुनाव तक महेन्द्र बैठा ने अलग-अलग पार्टियों से चुनाव मैदान मारा। 2004 में जदयू के कैलाश बैठा ने जीत दर्ज की।

2009 में बदला नाम 2009 के चुनाव में बगहा का नाम बदलकर वाल्मीकिनगर हो गया। वाल्मीकिनगर के पहले सांसद जदयू के ही वैद्यनाथ प्रसाद महतो हुए। 2014 के चुनाव में सतीश चन्द्र दूबे ने यहां भाजपा का झंडा लहराया। हालांकि, 2019 के चुनाव में वैद्यनाथ प्रसाद महतो ने अपनी सीट वापस छीन ली। श्री महतो के असमय निधन के बाद 2020 में हुए उपचुनाव में उनके पुत्र सुनील कुमार ने जीत दर्ज की।

वर्तमान राजनीतिक समीकरण वाल्मीकिनगर लोकसभा क्षेत्र की राजनीति पिछड़ों के इर्द-गिर्द केन्द्रित रही है। एमवाई समीकरण के साथ ही अनुसूचित जनजाति थारु, उरांव भी चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। मिनी चंबल के नाम से मशहूर रहा बगहा क्षेत्र अपराध के खिलाफ वोट करने के लिए भी जाना जाता है।

वाल्मीकिनगर आए थे नेहरू

पहला महत्वपूर्ण काम भारत-नेपाल सीमा पर गंडक बराज का निर्माण रहा। उद्घाटन करने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू आये थे। उसके बाद महेन्द्र बैठा के कार्यकाल में यूपी-बिहार को जोड़ने के लिए गंडक पर रेल सह सड़क पुल बना। कैलाश बैठा के समय धनहा-रतवल पुल की आधारशिला रखी गई। सतीश चंद्र दूबे के समय एनएच 28बी (वर्तमान एनएच 727) का सुदृढ़ीकरण हुआ। बगहा में बन रहा आरओबी भी महत्वपूर्ण उपलब्धि में शामिल रहा।


बगहा लोकसभा सीट से अब तक सांसद

1952 भोला राउत, कांग्रेस

1957 भोला राउत, कांग्रेस

1962 भोला राउत, कांग्रेस

1967 भोला राउत, कांग्रेस

1971 भोला राउत, कांग्रेस

1977 जगन्नाथ प्रसाद स्वतंत्र, जनता पार्टी

1980 भोला राउत, कांग्रेस

1984 भोला राउत, कांग्रेस

1989 महेन्द्र बैठा, जनता दल

1991 महेन्द्र बैठा, जनता दल

1994 महेन्द्र बैठा, समता पार्टी

1996 महेन्द्र बैठा, समता पार्टी

1998 महेन्द्र बैठा, समता पार्टी

1999 महेन्द्र बैठा, जदयू

2004 कैलाश बैठा, जदयू

वाल्मीकिनगर सीट से अब तक सांसद

2009 वैद्यनाथ प्रसाद महतो, जदयू

2014 सतीश चन्द्र दूबे, भाजपा

2019 वैद्यनाथ प्रसाद महतो, जदयू

2020 सुनील कुमार, जदयू (उपचुनाव)

2009 में बगहा को वाल्मीकिनगर लोस क्षेत्र के नाम से किया गया परिवर्तित

ये परियोजनाएं हुईं पूरी

● गंडक नदी पर गौतम बुद्ध सेतु बना। इससे विकास से अछूते चार प्रखंड ठकराहा, मधुबनी, भितहा व पिपरासी को बड़ा लाभ मिला।

● बगहा शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए रेल ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ। हालांकि, काम अभी पूरा नहीं हो सका है।

इन योजनाओं के पूरी होने की उम्मीद

● बगहा के चार प्रखंड ऐसे हैं जहां रेल मार्ग नहीं है। गंडक पार के इस क्षेत्र में रेल परियोजना की शुरुआत हुई, लेकिन मुकाम तक नहीं पहुंची चारों प्रखंडों को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए शुरू हुई तमकुही-छितौनी रेल परियोजना अधर में ही लटकी रह गयी।

● वाल्मीकिनगर से पटना को जलमार्ग से जोड़ने के लिए घोषणा हुई, लेकिन रेवा पुल की ऊंचाई कम होने के कारण यह अमल में नहीं आया। जलमार्ग के लिए स्टेशन बनाने का सर्वे शुरू किया गया, लेकिन बीच मे ही रुक गया।

● मधुबनी में टेक्सटाइल पार्क का निर्माण कार्य अधूरा रह गया। जिला प्रशासन की ओर से जगह चिन्हित कर भेजा गया लेकिन इसे टेक्सटाइल पार्क के लिए नहीं चुना गया।


जनता जनार्दन की राय

शहर जाम से कराह रहा है। बाइपास नहीं होने से गन्ना ढुलाई में परेशानी होती है। बेलगाम ट्रैक्टरों से कई जानें गई हैं। इस पर पहल हो।-अमरेंद्र कुमार, पठखौली, बगहा

सांसद ने जनता दरबार लगाकर समस्याएं सुनीं और उसे दूर करने का प्रयास किया। गन्ना किसानों के लिए चालान का मुद्दा उठाया। इससे सुविधा हुई। -सदाकांत शुक्ला, रामनगर

छितौनी-तमकुही रेल परियोजना, डिग्री कॉलेज, मधुबनी को अनुमंडल बनाने, चारों प्रखंडों को बाढ़ से बचाने समेत अन्य कार्यों का इंतजार है।-विंध्याचल राम, मंझरिया, पिपरासी

सांसद आम लोगों की पहुंच में हैं। लोग उनसे मिलकर अपनी समस्याएं रख पाते हैं। कई लोगों की मुश्किलें इससे हल हुई हैं। -नंदन चौधरी, नरकटियागंज


सांसद का दावा

बगहा आरओबी निर्माण शुरू हुआ। मसान नदी पर गाइड बांध के निर्माण को स्वीकृति मिली। मदनपुर माई स्थान प्रसाद योजना में शामिल हुआ। प्रधानमंत्री राहत कोष व मुख्यमंत्री राहत कोष से सौ से अधिक मरीजों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। -सुनील कुमार, सांसद, वाल्मीकिनगर

विपक्षी का वार

जनता ने जिस आकांक्षा के साथ सांसद को चुना था, वे उस उम्मीद पर खरा नहीं उतर सके। सांसद का कार्यकाल बेहतर नहीं रहा। वर्तमान सांसद के पिता के निधन के बाद जनता ने उन्हें बड़ी आशाओं के साथ वोट दिया था। -प्रवेश मिश्रा, कांग्रेस, निकटतम प्रतिद्वंद्वी

कुल वोटर-   14, 56, 576
पुरुष वोटर-    7, 86, 297
महिला वोटर-  6, 70, 279

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