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बिहार की लोकसभा सीटों का हालः जगजीवन का अभेद्य किला था सासाराम, कांग्रेस-बीजेपी का रहा दबदबा

सासाराम लोकसभा सीट कभी बाबू जगजीवन राम की पहचान थी। रिकॉर्ड 32 साल तक वो इस सीट से सांसद रहे। उपप्रधानमंत्री से लेकर कई मंत्रालयों में केंद्रीय मंत्री तक रहे। इस सीट पर कांग्रेस-बीजेपी का ही दबदबा रहा

बिहार की लोकसभा सीटों का हालः जगजीवन का अभेद्य किला था सासाराम, कांग्रेस-बीजेपी का रहा दबदबा
Sandeepतारिक महमूद,सासारामFri, 09 Feb 2024 08:25 AM
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सासाराम कभी शेरशाह सूरी के शासन का केंद्र था। शेरशाह ने सिर्फ पांच साल (1540-45) में देश की अर्थव्यवस्था व शासन प्रणाली में सुधार और लोक कल्याण के ऐसे काम किए कि उसकी बानगी आज भी दी जाती है। सासाराम (सु.) संसदीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (पुराना नाम जीटी रोड) देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देता है। जीटी रोड भी शेरशाह की देन है। लेकिन, सासाराम संसदीय क्षेत्र को अभी विकास की उम्मीद पूरी होने का इंतजार है। धान का कटोरा कहे जाने वाले इस इलाके के लोग उच्च शिक्षा व बेहतर इलाज के लिए पड़ोसी राज्य यूपी पर निर्भर हैं।

सासाराम (सु) संसदीय सीट से जगजीवन राम ने लगातार 32 वर्षों तक सांसद बनकर रिकॉर्ड कायम किया था। कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे बाबू जी ने 1952 से 1984 तक लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। यहां तक कि 1977 में कांग्रेस से मनमुटाव के बाद जब उन्होंने इससे नाता तोड़ लिया, तब भी सासाराम उनके साथ मजबूती से खड़ा रहा।

1984 में खुद की पार्टी बनाकर चुनाव में उतरे तब भी वह जीते। 32 साल तक एक ही क्षेत्र से सांसद रहने वाले जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार भी 2004 और 2009 में सासाराम सांसद रहीं। 1989 में छेदी पासवान ने यह सीट कांग्रेस से छीनी। वह चार बार जीत चुके हैं। 1996 में मुनिलाल ने भाजपा का खाता खोला।

दुर्गावती जलाशय योजना जगजीवन राम की देन उपप्रधानमंत्री रहे जगजीवन राम की क्षेत्र को सबसे बड़ी देन दुर्गावती जलाशय परियोजना है। रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने रेलवे के आधुनिकीकरण का ठोस खाका पेश किया। संचार मंत्री रहते डाकघरों का जाल बिछाने व विमानन कंपनियों के राष्ट्रीयकरण में भी भूमिका निभाई।

4 मार्च 1977 से 28 जुलाई 1979 तक जगजीवन राम भारत के उपप्रधानमंत्री रहे थे। रक्षा मंत्री, श्रम मंत्री, संचार मंत्री व रेल मंत्री भी वे रहे थे। मुनि लाल को 1999 में केंद्रीय श्रम व राज्य मंत्री के तौर पर कैबिनेट में जगह मिली थी। वहीं मीरा कुमार 2009 व 2014 में लोकसभा अध्यक्ष रह चुकी हैं।

अबतक चुने गए सांसद 

1952 जगजीवन राम (शाहाबाद दक्षिण सीट), राम सुभग सिंह (शाहाबाद दक्षिण सीट) दोनों कांग्रेसी थे।

1957 जगजीवन राम, कांग्रेस

1962 जगजीवन राम, कांग्रेस

1967 जगजीवन राम, कांग्रेस

1971 जगजीवन राम, कांग्रेस

1977 जगजीवन राम, जनता पार्टी

1980 जगजीवन राम, जनता पार्टी

1984 जगजीवन राम, कांग्रेस(जगजीवन)

1989 छेदी पासवान, जनता दल

1991 छेदी पासवान, जनता दल

1996 मुनि लाल, बीजेपी

1998 मुनि लाल, बीजेपी

1999 मुनि लाल, बीजेपी

2004 मीरा कुमार, कांग्रेस

2009 मीरा कुमार, कांग्रेस

2014 छेदी पासवान, भाजपा

2019 छेदी पासवान, भाजपा

मौजूदा सियासी समीकरण
2014 और 2019 में जीत हासिल कर चुके भाजपा के सांसद छेदी पासवान इस बार हैट्रिक लगाने की तैयारी में हैं। वहीं मीरा कुमार भी राजनीतिक विरासत बचाने की तैयारी कर रही हैं। जदयू के फिर से एनडीए में शामिल हो जाने से भाजपा को राहत मिली है। वैसे सासाराम लोकसभा के अंतर्गत आने वाली पांच विधानसभा सीटों पर इंडिया गठबंधन का कब्जा है। तीन पर राजद और दो पर कांग्रेस काबिज है। कैमूर जिले की चैनपुर सीट जदयू के पास है। चुनाव में पहली बार मतदाता सूची में जुड़े युवाओं के मत भी निर्णायक होंगे।

1984 में सिर्फ 1372 वोट से जीते थे जगजीवन राम
वर्ष 1984 में पूरे देश में कांग्रेस के पक्ष में सहानुभूति की लहर थी। सासाराम सीट पर बाबू जगजीवन राम का मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार महावीर पासवान से था। समाहरणालय परिसर में बनाए गए मतगणना केंद्र में दो दिनों तक गिनती जारी रही। सभी की सांसें अटकी हुईं थीं। कभी जगजीवन राम आगे तो कभी महावीर पासवान। अंतिम चक्र की गिनती के बाद नतीजों की घोषणा हुई। जगजीवन राम को 1372 मतों के अंतर से विजयी घोषित किया गया। जगजीवन राम को 207275 एवं महावीर पासवान को 205903 मत मिले थे।

सासाराम से सांसद छेदी पासवान का कहना है कि पंडुका पुल का शिलान्यास मेरे कार्यकाल के दौरान हुआ। पॉलिटेक्निक कॉलेज, अधौरा पहाड़ स्थित गांवों में सोलर लाइट, मुंडेश्वरी रोपवे व रोहतास रोपवे को लेकर पहल की गई है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 50 से अधिक गांवों में सड़क निर्माण व सांसद मद से एक दर्जन से अधिक गांवों में विकास कार्य कराये गए हैं।

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष, मीरा कुमार का कहना है कि सासाराम लोकसभा क्षेत्र से मेरा पुराना रिश्ता रहा है। मैंने क्षेत्र के विकास लिए अपना पूरा जीवन लगाया है। पिता जी ने भी आखिरी सांस तक क्षेत्र के विकास व मान-सम्मान के लिए काम किया। इस बार के चुनाव में मुझे पूरा यकीन है कि यहां की जनता मुझे फिर से सिर आंखों पर बैठायेगी। सासाराम क्षेत्र की जनता के लिए अभी विकास के कई कार्य किए जाने हैं।

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