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सीएम बड़े या अधिकारी? केके पाठक पर BJP एमएलसी ने की बड़ी मांग, मुख्यमंत्री का आदेश झुठला रहे ACS?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश के बावजूद स्कूलों की टाइमिंग नहीं बदले जाने को लेकर बिहार विधानसभा में विपक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। सदस्य सदन के वेल में आकर नारेबाजी करने लगे।

सीएम बड़े या अधिकारी? केके पाठक पर BJP एमएलसी ने की बड़ी मांग, मुख्यमंत्री का आदेश झुठला रहे ACS?
Sudhir Kumarलाइव हिंदुस्तान,पटनाThu, 29 Feb 2024 02:48 PM
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बिहार विधानमंडल का बजट सत्र शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के के पाठक की भेंट चढ़ गया। सत्र के दौरान  केके पाठक द्वारा लाए जा रहे हैं नए नियम कानून के विरोध में हंगामा होता रहा। गुरुवार को भी दोनों सदनों में हंगामा हुआ। शोर-शराबे बीच  विधानसभा की कार्रवाई दोपहर 2  बजे तक स्थगित कर दी गई वहीं विधान परिषद में विपक्ष के साथ बीजेपी और जेडीयू के एमएलसी ने भी हो हल्ला किया। इस बीच राजद ने केके पाठक को सस्पेंड करने की मांग की है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश के बावजूद स्कूलों की टाइमिंग नहीं बदले जाने को लेकर बिहार विधानसभा में विपक्ष के सदस्यों ने जोरदार हंगामा किया। सदस्य सदन के वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने उन्हें समझाने की कोशिश की। लेकिन भारी हंगामा के बीच विपक्षी सदस्य वाक आउट कर गए और सदन की कार्रवाई 2 बजे दोपहर  तक के लिए स्थगित कर दी गई।

इधर विधान परिषद में भी शोर शराबे की स्थिति बनी रही। बीजेपी के एमएलसी नवल किशोर यादव भी हल्ला करते हुए देखे गए। उनके साथ जेडीयू के विधान परिषद नीरज कुमार भी मौजूद थे। नवल किशोर यादव ने कहा कि सीएम की घोषणा के बाद भी केके पाठक  स्कूलों की टाइमिंग में बदलाव नहीं ला रहे हैं।  उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने सदन में कह दिया तो फिर से अमल में क्यों नहीं लाया जा रहा है। कोई व्यक्ति सदन से बड़ा कैसे हो सकता है। यह घोर अपमान है जो लोकतंत्र में कहीं से उचित नहीं है। 

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से स्कूलों की टाइमिंग को लेकर प्रेस विज्ञप्ति निकाला जाना चाहिए। जदयू का नीरज ने कहा कि ऐसे पदाधिकारी पर विशेष अधिकार हनन का मामला चलना चाहिए इस दौरान शिक्षा मंत्री विजय चौधरी भी सदन में मौजूद थे नवल किशोर यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री के की घोषणा कोमल में नहीं लाना पूरे सदन का अपमान है इस पर आसान को संज्ञान लेकर कार्रवाई करना चाहिए शिक्षा मंत्री यह साफ करें कि राज्य में मुख्यमंत्री का आदेश चलेगा या फिर एक अधिकारी का सदन बड़ा है अधिकारी

 एमएलसी संजय सिंह भी क पाठक द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्य पदाधिकारी के वेतन पर रोक लगाई जाने का मामला उठाया उन्होंने कहा कि यह कहीं से भी उचित नहीं है इस पर रोक लगाया जाना चाहिए यह बहुत गंभीर बात है कि एक अधिकारी बी का वेतन रोक देता है इस पर नवल किशोर यादव ने भी कहा कि शिक्षा वैसे नहीं चलता है जैसे क पाठक चला रहे हैं

इधर सदन के बाहर राजद के प्रवक्ता भाई वीरेंद्र ने क पाठक को अभिलंब निलंबित करने की मांग की उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं उसे अपर मुख्य सचिव लागू नहीं करते यह राज्य में अराजकता की स्थिति है मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद स्कूलों की टाइमिंग नहीं बदलने वाले अधिकारी को तुरंत निलंबित कर देना चाहिए।

इससे पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सदन में स्कूलों की टाइमिंग को लेकर कहा था कि स्कूल 10:00 बजे से संध्या 4:00 बजे तक चलेंगे शिक्षकों को 15 मिनट पहले आना होगा और 15 मिनट ज्यादा बाद जाना होगा उन्होंने आश्वासन दिया कि क पाठक को बुलाकर बोल देंगे स्वयं शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने भी कहा था कि कम के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा लेकिन अपर मुख्य सचिव के के पाठक ने अभी तक अपनी उसे आदेश को वापस नहीं लिया है जिसमें स्कूलों की टाइमिंग सुबह 9:00 बजे से संध्या 5:00 बजे तक रखी गई है इस बीच गुरुवार को केके पाठक ने विश्वविद्यालय के पदाधिकारी पर बड़ा एक्शन लिया उन्होंने कुलपति समेत सभी पदाधिकारी का वेतन रोक दिया है और सो कैसे पूछा है इसके साथ विश्वविद्यालय के बैंक खाते को फ्रीज कर दिया है
 

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