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पटना साहिब लोकसभा सीट जब से बनी बीजेपी का कमल खिलता रहा, फिल्म स्टार भी उतरे मैदान में

फिल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा पटना साहिब लोकसभा सीट से दो बार सांसद रहे। इसके अलावा एक्टर शेखर सुमन, भोजपुरी कलाकार कुणाल सिंह भी यहां से चुनाव लड़ चुके हैं।

पटना साहिब लोकसभा सीट जब से बनी बीजेपी का कमल खिलता रहा, फिल्म स्टार भी उतरे मैदान में
Jayesh Jetawatरंजीत कुमार सिंह, हिन्दुस्तान,पटनाTue, 06 Feb 2024 10:34 AM
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Patna Sahib Lok Sabha Equation: बिहार की राजधानी से जुड़ा होने की वजह से पटना संसदीय क्षेत्र का राजनीतिक रूतबा कुछ अलग रहा है। परिसीमन के बाद पटना संसदीय क्षेत्र अपने नए स्वरूप और नए नाम के साथ 2009 में पटना साहिब लोकसभा सीट के रूप में अस्तित्व में आया। पटना लोकसभा सीट कांग्रेस, वामपंथ और समाजवाद का मजबूत गढ़ रहा था। लेकिन पटना साहिब के गठन के बाद से यहां कमल खिल रहा है। साल 2009 से 2019 के बीच हुए तीन चुनावों में बीजेपी के आगे किसी दल की नहीं चली। यहां तक कि मतदाताओं ने प्रत्याशी की बजाए दल को अहमियत दी। 

यही वजह रही कि 2009 और 2014 के चुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज करने वाले शत्रुघ्न सिन्हा जब बीजेपी से पाला बदल 2019 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे तो मतदाताओं ने उन्हें नकार दिया। बीजेपी के रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस के शत्रुघ्न सिन्हा को दो लाख से अधिक मतों से पराजित किया। परिसीमन के बाद 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में शत्रुघ्न सिन्हा बीजेपी के टिकट पर सांसद बने थे।

हालांकि, पटना साहिब बनने से पहले पटना कांग्रेस और भाकपा का गढ़ रहा। यहां से पहले सांसद कांग्रेस के सारंगधर सिन्हा थे। 1962 में क्षेत्र की पहली महिला सांसद कांग्रेस की नेत्री रामदुलारी सिन्हा बनीं। इसके बाद भाकपा के रामावतार शास्त्री ने कांग्रेसियों से सीट छीन ली। शास्त्री तीन बार 1967, 1971 और 1980 में सांसद हुए। इंदिरा विरोधी लहर में 1977 में यहां से जनता पार्टी के महामाया प्रसाद सिन्हा ने समाजवाद का परचम लहराया। प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सीपी ठाकुर ने एक बार कांग्रेस और दो बार भाजपा प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की। जदयू-भाजपा के फिर साथ आने से समीकरण 2019 की तरह है।

1984 के बाद यह समाजवादियों और भाजपा का गढ़ बन गया। इस पर जनता दल, राजद और भाजपा का बारी-बारी से कब्जा रहा। 1987 में भाजपा के प्रो. शैलेंद्र नाथ श्रीवास्तव ने कांग्रेस और वाम के किले को ध्वस्त कर दिया। रामकृपाल यादव 1993 और 1996 में जनता दल और 2004 में आरजेडी के टिकट पर सांसद बने।

फिल्मी सितारे उतरते रहे मैदान में 
2009 में कांग्रेस ने इस सीट पर अभिनेता शेखर सुमन को उतारा था। भाजपा से अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा मैदान में थे। चुनाव हारने के बाद शेखर ने राजनीति से किनारा कर लिया। तब कांग्रेस ने 2014 में भोजपुरी अभिनेता कुणाल सिंह पर दांव खेला। हालांकि वह भी हार गए। 2019 में कांग्रेस ने भाजपा के बागी शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट दिया।

पटना ने दिए कई मंत्री
इस सीट के कई सांसद मंत्री भी बने। पहले सांसद सारंगधर सिन्हा संविधान सभा के सदस्य बने। रामदुलारी देवी भी केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल रहीं। महामाया सिन्हा यहां से सांसद बनने से पहले 1 वर्ष बिहार के सीएम रहे। डॉ. सीपी ठाकुर, शत्रुघ्न सिन्हा व सांसद रविशंकर प्रसाद भी केंद्र में मंत्री रहे।

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