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2 अक्तूबर, 2020|11:37|IST

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बिहार विधानसभा चुनाव: 243 उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट तैयार? क्‍या सच में अकेले दम पर मैदान में उतर सकती है कांग्रेस 

महागठबंधन में 75 सीटों की मांग पर अड़ी कांग्रेस ने तेजस्‍वी यादव पर दबाव बढ़ाते हुए प्रदेश की सभी 243 सीटों पर उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट तैयार तो कर ली है लेकिन क्‍या वो सच में अपने दम पर चुनावी मैदान में उतर सकती है। फिलहाल कांग्रेस के अंदर भी ऐसा मानने वाला शायद ही कोई हो लेकिन यह तय है कि 2015 में तीन दशकों के सबसे बेहतर प्रदर्शन से उत्‍साहित कांग्रेस, नीतीश से तलाक के बाद महागठबंधन में नंबर दो के साथ-साथ सीटों के मामले में भी सम्‍मानजनक स्थिति पाने के लिए अंत तक पूरा जोर लगाएगी। 

दरअसल, 1990 के बाद से राजनीतिक बनवास झेल रही कांग्रेस को 2015 के आशातीत प्रदर्शन से नई ताकत मिली थी। पार्टी तभी से बिहार में अपना आधार मजबूत बनाने में जुटी है। 2015 के चुनाव में महागठबंधन में राजद और जद यू के बीच 101-101 सीटों का बंटवारा हुआ था जबकि कांग्रेस के हिस्‍से में 41 सीटें आई थीं। इन सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन उम्‍मीद से काफी अच्‍छा रहा। उसने 27 सीटों पर जीत हासिल की। हालांकि, बाद में मोहम्मद जावेद के किशनगंज से सांसद बनने के बाद खाली हुई सीट पर पार्टी अपना कब्जा बरकरार नहीं रख पाई थी। ऐसे में पार्टी के पास अब 26 विधायक हैं। 

2015 के चुनाव के बाद से पार्टी हाईकमान ने कांग्रेस के संगठनात्‍मक ढांचे को मजबूत करने के साथ ही अपने पुराने नेताओं से सम्‍पर्क साधना शुरू किया। इस वातावरण से उपजे आत्‍मविश्‍वास के साथ कांग्रेस 70-75 सीटों की मांग पर अड़ी हुई है जबकि राजद 60 से ज्‍यादा सीटें देने को तैयार नहीं है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'हम पिछले चुनाव से अधिक सीट पर चुनाव लड़ेंगे क्योंकि अब स्थितियां अलग हैं। '

लिहाजा, कांग्रेस ने दबाव बढ़ा दिया है। पिछले दिनों स्‍क्रीनिंग कमेटी की बैठक में जिलाध्‍यक्षों के साथ एक-एक सीट पर सम्‍भावित उम्‍मीदवारों के बारे में चर्चा हुई। कमेटी के सदस्‍यों ने टिकटार्थियों से भी मुलाकात की। पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के पैनल को अंतिम रूप दे दिया है। बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मदन मोहन झा और विधायक दल के नेता सदानंद सिंह ने प्रदेश प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल और स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे के साथ लंबी बैठक की। 

पिछले दिनों बिहार प्रदेश के वरिष्ठ नेता किशोर कुमार झा ने कहा कि राजद को यह बात समझनी चाहिए कि कांग्रेस के बगैर जीत की दहलीज तक नहीं पहुंच सकता है। 2010 के चुनाव में कांग्रेस और राजद अलग-अलग चुनाव लड़े थे, उस वक्त कांग्रेस को आठ सीटें मिलीं लेकिन राजद भी सिर्फ 22 सीटों पर सिमट गई थी। वर्ष 2015 के चुनाव में फिर साथ आए, तो दोनों पार्टियों को एक-दूसरे का फायदा मिला। जाहिर है कांग्रेस, महागठबंधन और खासतौर पर तेजस्‍वी यादव को अपना यह महत्‍व समझाने का लगातार प्रयास कर रही है। साथ ही साथ 243 सीटों पर उम्‍मीदवारों की लिस्‍ट तैयार कर अकेले लड़ने का विकल्‍प भी खुला रख रही है। 

हालांकि पार्टी में अभी भी बहुत से लोग मानते हैं कि अकेले दम पर मैदान में उतरने की स्थिति फिलहाल नहीं आई है। कोरोना काल में हो रहे इस चुनाव में डिजिटल प्रचार में बढ़त के लिए हर दल प्रयास करेगा। जानकारों का कहना है कि भाजपा के मुकाबले में इस मामले में कांग्रेस की तैयारी को बहुत अच्‍छा नहीं कहा जा सकता। महागठबंधन के साथ और महागठबंधन के बगैर चुनाव लड़ने की पार्टी की स्थितियां बिल्‍कुल भिन्‍न होंगी। 2015 की आशातीत सफलता से पार्टी में 1990 के पहले के गौरवशाली अतीत को लेकर उत्‍साह तो है लेकिन फिलहाल अकेले मैदान में उतरने को लेकर कोई गंभीर मंथन नहीं हो रहा है। प्राथमिकता, अभी भी महागठबंधन के नेता तेजस्‍वी यादव को ज्‍यादा से ज्‍यादा सीटों के लिए राजी करना ही है।

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  • Web Title:Bihar vidhan sabha election congress papered its list for 243 candidates in Bihar can fight alone