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बिहार में पीएम रोजगार योजना का बंटाधार, कर्ज मांगने में तीसरे नंबर पर लेकिन 100 में मात्र 32 लोन पास

प्रधानमंत्री रोजगार योजना से कर्ज मांगने के मामले में बिहार तीसरे पायदान पर है जबकि लोन स्वीकृति दर केवल 32 फीसदी है। जम्मू और कश्मीर 65 फीसदी लोन स्वीकृति के साथ पहले पायदान पर है।

बिहार में पीएम रोजगार योजना का बंटाधार, कर्ज मांगने में तीसरे नंबर पर लेकिन 100 में मात्र 32 लोन पास
Ratanलाइव हिंदुस्तान,पटनाTue, 18 Jun 2024 08:01 PM
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बिहार में प्रधानमंत्री रोजगार गारंटी कार्यक्रम का बैंकों ने बंटाधार कर दिया है। पीएम रोजगार स्कीम से कर्ज के लिए बैंकों को सबसे अधिक कर्ज प्रस्ताव भेजने के मामले में बिहार देश भर में तीसरे नंबर पर है। लेकिन बात जब इन लोन की स्वीकृति की होती है तो बैंकों के रवैये के कारण बिहार पिछड़ जाता है। बैंकों ने महज 32 फीसदी लोन आवेदन मंजूर किए हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में पीएमईजीपी के तहत बिहार से 41 हजार 152 प्रस्ताव राज्य के विभिन्न बैंकों में जमा कराए गए। इनमें से महज 13,033 (32 प्रतिशत) प्रस्तावों पर ही बैंकों ने कर्ज स्वीकृति प्रदान की। प्रस्ताव तैयार करने में बैंकों की तमाम गाइडलाइन और चेकलिस्ट का ध्यान रखा जाता है। बावजूद इसके बिहार के उद्यमियों को कर्ज देने में बैंक हिचक रहे हैं। स्टेट लेवल बैंकिंग कमेटी की बैठक में उद्योग विभाग के प्रजेंटेशन में यह बात सामने आई है।

एसएलबीसी की बैठक में उद्योग विभाग ने पीएमईजीपी के लिए बैंकों की स्वीकृति का लक्ष्य निर्धारित करने का आग्रह किया है। इस योजना के तहत औसत कर्ज 5 से 10 लाख रुपये के बीच दिया जा रहा है। 13,041 कर्ज प्रस्तावों में से केवल 1110 को ही 15 लाख रुपये से अधिक का कर्ज मिल सका है। हालांकि, इस योजना के तहत उत्पादन क्षेत्र में कर्ज सीमा 50 लाख और सेवा क्षेत्र में कर्ज सीमा 20 लाख रुपये तक है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में कर्ज का औसत टिकट साइज 8.19 लाख रुपये था। उद्योग विभाग ने एसएलबीसी से आग्रह किया कि इस कर्ज देने की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए।

जम्मू-कश्मीर को ज्यादा लाभ

देशभर में सबसे ज्यादा इस योजना के तहत बैंकों में कर्ज प्रस्ताव तमिलनाडु (45,073) और दूसरे पायदान पर जम्मू-कश्मीर (41,664) ने जमा कराए। जम्मू कश्मीर में 27,196 प्रस्तावों को बैंकों ने स्वीकृति दी। इस प्रकार यहां बैंकों ने लगभग 65 प्रतिशत कर्ज प्रस्ताव स्वीकृत किया। उत्तर प्रदेश ने विभिन्न बैंकों को 40,576 प्रस्ताव भेजे, इनमें से 49 प्रतिशत (20,023) प्रस्तावों को बैंक ने स्वीकृति दी। वहीं तमिलनाडु में कर्ज स्वीकृति का प्रतिशत 37 है। जो बिहार से बेहतर है।