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हिंदी न्यूज़ बिहारBihar politics: रेलवे में नौकरी के बदले जमीन; सुशील मोदी ने लालू परिवार से पूछे 5 सुलगते सवाल, शिवानंद तिवारी को भी घेरा

Bihar politics: रेलवे में नौकरी के बदले जमीन; सुशील मोदी ने लालू परिवार से पूछे 5 सुलगते सवाल, शिवानंद तिवारी को भी घेरा

सुशील मोदी ने पूछा है कि अगर लालू प्रसाद ने रेलवे में नौकरी देने के बदले लाभार्थी से जमीन नहीं लिखवायी थी तो शिवानंद तिवारी ने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को ज्ञापन देकर CBI जांच की मांग क्यों की।

Bihar politics: रेलवे में नौकरी के बदले जमीन; सुशील मोदी ने लालू परिवार से पूछे 5 सुलगते सवाल, शिवानंद तिवारी को भी घेरा
Malay Ojhaपटना वार्ताSat, 21 May 2022 05:43 PM

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बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार मोदी ने रेलवे में नौकरी देने के बदले जमीन लिखवाने के मामले में फंसे पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनके परिवार और राजद से पांच सवाल पूछे हैं। सुशील मोदी ने शनिवार को बयान जारी कर पूछा कि अगर लालू प्रसाद यादव ने रेलवे में नौकरी देने के बदले लाभार्थी से जमीन नहीं लिखवायी थी तो शिवानंद तिवारी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ज्ञापन देकर सीबीआई जांच की मांग क्यों की थी। 

उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह सही नहीं कि कांति सिंह ने पटना का अपना करोड़ों का मकान और स्व. रघुनाथ झा ने गोपालगंज का अपना कीमती मकान केंद्रीय मंत्री बनवाने के बदले लालू परिवार को गिफ्ट किया था। बीजेपी सांसद ने आगे कहा कि लालू प्रसाद यादव बतायें कि उनका परिवार 141 भूखंड, 30 से ज्यादा फ्लैट और पटना में आधा दर्जन से ज्यादा मकानों का मालिक कैसे बन गया। उन्होंने लालू से यह भी पूछा कि उन्होंने पटना एयरपोर्ट के पास स्थित टिस्को गेस्ट हाउस का स्वामत्वि कैसे हासिल कर लिया।

सुशील मोदी ने पूछा कि लालू प्रसाद यादव के खटाल में काम करने वाले ललन चौधरी और हृदयानंद चौधरी के पास करोड़ों की जमीन कहां से आयी और फिर इन लोगों ने ये कीमती भूमि राबड़ी देवी और उनकी पुत्री हेमा यादव को क्यों दान कर दी। विधान परिषद के चतुर्थवर्गीय कर्मचारी ललन चौधरी और रेलवे के ग्रुप-डी कर्मचारी हृदयानंद चौधरी के नाम सीबीआई की प्राथमिकी में दर्ज है। बीजेपी सांसद ने कहा कि शिवानंद तिवारी ने ही 2008 में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग की थी और अब जब सबूत के आधार पर कार्रवाई हो रही है, तब वे इसे राजनीतिक रंग दे रहे हैं।

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