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चिराग बेदखल, पारस की हुई लोजपा, रामविलास पासवान की पार्टी पर छोटे भाई ने जमाया कब्जा

पटना, हिन्दुस्तान टीमPublished By: Malay Ojha
Mon, 14 Jun 2021 10:24 PM
चिराग बेदखल, पारस की हुई लोजपा, रामविलास पासवान की पार्टी पर छोटे भाई ने जमाया कब्जा

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के संस्थापक रामविलास पासवान के पुत्र चिराग पासवान पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं। इसके छह में से पांच सांसदों ने एकजुट होकर अपना नेता पशुपति कुमार पारस को चुन लिया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी पारस को लोजपा संसदीय दल के नेता के रूप में मान्यता दे दी है। रामविलास पासवान के छोटे भाई पशुपति कुमार पारस अब चुनाव आयोग में जाकर अपनी पार्टी लोजपा के चुनाव चिह्न पर बंगला छाप और पार्टी के झंडा पर दावा ठोकेंगे। 

इसके पहले रविवार की देर शाम पार्टी के पांच सांसदों ने पशुपति कुमार पारस को अपना नेता चुन लिया था। श्री पारस खुद हाजीपुर के सांसद हैं। इसके अलावा उनके साथ चिराग को छोड़ चौधरी महबूब अली कैशर, वीणा सिंह, सूरजभान के भाई सांसद चंदन सिंह और रामचन्द्र पासवान के पुत्र प्रिंस राज हैं। पारस के भतीजे प्रिंस बिहार लोजपा के अध्यक्ष भी हैं। सभी सांसदों ने पारस को नेता चुनने के बाद रविवार की रात में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को इसका पत्र सौंप दिया था। उसके बाद सोमवार को अध्यक्ष ने उन्हें मान्यता दे दी। इसकी जानकारी अध्यक्ष ने श्री पारस के साथ सांसदों को बुलाकर दे दी। इससे पहले सोमवार को भी सभी पांच सांसद वीणा देवी के दिल्ली आवास पर बैठक करते रहे। आगे की रणनीति और राजनीतिक गठबंधन को लेकर चर्चा होती रही। दिन में श्री पारस ने मीडिया को पूरी घटना की जानकारी दी। पहले के प्लान के अनुसार सभी पांच सांसदों को शाम तीन बजे प्रेस वार्ता करनी थी, लेकिन चुनाव आयोग से फैसला होने तक इसे टाल दिया गया। 

मान मनौव्वल का प्रयास विफल 
पूरे मामले की सूचना मिलते ही पार्टी में खलबली मच गई। चिराग ने देर रात तक पार्टी के दूसरे नेताओं के साथ बैठक की और आगे की रणनीति बनाते रहे। उन्होंने रात में श्री पारस से बात करने का भी प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिली। रात में बनी रणनीति के तहत सोमवार की सुबह चिराग दिल्ली स्थित पारस के घर पहुंचे। प्रिंस राज भी वहीं पारस के साथ ही रहते हैं, लेकिन चिराग को अपने चाचा के घर में प्रवेश लगभग आधे घंटे के इंतजार के बाद मिली। तब तक पारस प्रिंस को लेकर वहां से निकल चुके थे। 

तीन घंटे तक करते रहे इंतजार 
चिराग तीन घंटे तक उनके घर पर अपने चाचा पारस का इंतजार करते रहे। अंत में निराश होकर उन्हें लौटना पड़ा। उनकी बात चाची यानी पारस की पत्नी से होती रही। लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि पारिवारिक बात के अलावा कोई राजनीतिक बात वह नहीं कर सकतीं। 

एनडीए में रहने की है उम्मीद 
लोजपा तो अभी भी केन्द्र में एनडीए में रहने का दावा करती रही है, लेकिन बिहार में चिराग एनडीए के घटक जदयू के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं। इस बीच यह कयास लगाया जा रहा है कि ‘नई’ लोजपा एनडीए के साथ रहेगी। खासकर जदयू के समर्थन में वह मुखर होगी। दो दिन पहले जदयू संसदीय दल के नेता ललन सिंह से पशुपति कुमार पारस की मुलाकात भी हुई थी। सूत्रों के अनुसार पारस असली लोजपा होने के साथ केन्द्रीय मंत्रिपरिषद में रामविलास पासवान की जगह का दावा करेंगे। जदयू भी इस मुहिम में उनके साथ होगी। चिराग ने विधानसभा चुनाव में खुलकर जदयू का ना सिर्फ विरोध किया था, बल्कि उसके खिलाफ अपना उम्मीदवार भी उतारा था। केन्द्र में एनडीए के साथ होना और बिहार में घटक दल जदयू का विरोध करने के कारण चिराग विवाद में पड़ गये और रामविलास की जगह कैबिनेट में उन्हें अब तक नहीं मिली। उधर पारस चिराग के इस फैसले का खुलकर समर्थन नहीं करते थे। ऐसे में इसका लाभ उन्हें मिल सकता है। 

लोजपा के छह सांसदों में पांच उनके साथ हैं। लिहाजा लोजपा पर उन्हीं का दावा बनता है। हम चुनाव आयोग में जाकर अपना दावा प्रस्तुत करेंगे। चिराग पासवान ने पार्टी में लोकतंत्र के समाप्त कर दिया था। बड़े भाई राम विलास पासवान के सपनों को पूरा करने का संकल्प उनकी पार्टी ने लिया है। 
- पशुपति कुमार पारस, नेता लोजपा संसदीय दल

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