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3 मार्च, 2021|6:29|IST

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बिहार: सासाराम, मोतिहारी, बेतिया, मधुबनी और समस्तीपुर बनेंगे नए नगर निगम, कैबिनेट की बैठक में मिली मंजूरी

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बिहार में शहरीकरण अब रफ्तार पकड़ेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में शनिवार को हुई राज्य कैबिनेट की विशेष बैठक में 111 नए शहरी निकायों को मंजूरी दे दी गई। इनमें 103 नई नगर पंचायतें और आठ ऐसी नगर परिषद शामिल हैं, जिन्हें सीधे ग्राम पंचायत से परिषद बनाया गया है। वहीं, सासाराम, मोतिहारी, बेतिया, मधुबनी और समस्तीपुर नगर परिषद को अपग्रेड कर नगर निगम बनाया गया है। 32 नगर पंचायतों को अपग्रेड कर नगर परिषद का दर्जा दिया गया है। जबकि नगर निगम बिहार शरीफ और 11 नगर परिषद का क्षेत्र विस्तार किया गया है। इन इलाकों में अब विकास की गति तेज होगी।

राज्य कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए नगर विकास एवं आवास सचिव आनंद किशोर ने बताया कि नए निकायों के गठन की जानकारी मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से लोगों को दी जाएगी। अगर किसी को आपत्ति होगी तो वो इसे लिखित में संबंधित जिला पदाधिकारी और प्रमंडलीय आयुक्त को देंगे। जिलों के माध्यम से यह आपत्तियां विभाग में आएंगी। आपत्तियों का निराकरण करने के बाद अंतिम रूप से नए निकायों के गठन की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। सारी प्रक्रिया एक माह में पूरी होगी। 

राज्य में होगा शहरी इलाकों का विस्तार  
नए निकायों के गठन से कई लाभ होंगे। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार का शहरीकरण महज 11.27 प्रतिशत है, जो देश में सबसे कम है। राष्ट्रीय औसत 31.16 प्रतिशत है। नए निकाय बनने से राज्य में शहरीकरण 18 प्रतिशत के करीब हो जाएगा। निकाय बनने पर राज्य में शहरी इलाकों का विस्तार होगा। उन इलाकों में विकास कार्यों में तेजी आएगी। केंद्र की विभिन्न योजनाओं में शहरों को ही फंडिंग किए जाने का प्रावधान है। इनका लाभ भी निकाय गठन पर उन इलाकों को मिल सकेगा।

तेजी से विकास का लोगों को होगा लाभ 
शहरों को ग्रोथ इंजन यानि विकास का वाहक माना जाता है। नए शहरी निकाय बनने के बाद राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति और तेज होगी। संबंधित क्षेत्रों में सुनियोजित ढंग से विकास होगा। नागरिक सुविधाओं बढ़ेंगी। पानी, बिजली, सड़क, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज, मशीनों के जरिए सफाई, पार्क सहित अन्य सामुदायिक सुविधाओं की व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। ऐसे इलाके में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। जमीनों के कीमतों में भी वृद्धि होगी। वित्त आयोग से शहरी निकायों को गांव की अपेक्षा ज्यादा अंशदान मिलने लगेगा। राज्यांश और केंद्रांश की भी हिस्सेदारी मिलने लगेगी।

मानकों में बदलाव से साफ हुई निकाय गठन की राह
राज्य में शहरीकरण के पुराने मानक के अनुसार शहरी निकाय गठन के लिए कुल जनसंख्या की 75 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर नहीं होनी चाहिए थी। दरअसल वर्ष 2011 की जनगणना में कुल जनसंख्या का कृषि और गैर कृषि आधारित आबादी का अलग आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। इसी के चलते राज्य कैबिनेट ने इस साल छह मई को शहरीकरण के मानकों में बदलाव कर नए निकाय गठन का रास्ता साफ कर दिया था। नए बदलाव में अब कार्यशील जनसंख्या की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी खेती पर निर्भर नहीं होनी चाहिए। यानि सौ में से 51 लोग खेती न करते हों।

बार-बार सदन में उठता था मामला
यह मामला बार-बार विधानसभा और विधान परिषद में उठता रहा है। तब सरकार की ओर से मंत्री कोर्ट से जुड़ा मामला बताते रहे हैं। राज्य सरकार ने पूर्व में गठित हरनौत व बिहटा नगर पंचायत के मामलों में हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इसीलिए मानकों में बदलाव जरूरी था।

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