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बिहारः शराबबंदी से नीतीश कैबिनेट का यूटर्न, मकान जब्ती और गिरफ्तारी जैसे मामलों में मिलेगी राहत

CM nitish kumar at supaul

बिहार में शराबबंदी कानून में संशोधन के प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। विधानमंडल के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। वहां से पारित होने के बाद राज्यपाल की सहमति से यह संशोधन लागू होगा। संशोधन में सामूहिक जुर्माना को भी खत्म किया गया है।

साथ ही मकान-वाहन की जब्ती के कानून को भी समाप्त किया गया है। वहीं, शराबबंदी कानून का उल्लंघन करते हुए पहली बार पकड़े जाने पर 50,000 रुपये जुर्माना देना होगा या तीन महीने की जेल होगी। दूसरी बार पकड़े जाने पर एक लाख का जुर्माना अथवा छह महीने की सजा होगी। दो से अधिक बार पकड़े जाने पर जुर्माना और सजा की अवधि दोगुनी होती जाएगी। 

बताया जा रहा है कि इस कानून के कुछ अन्य प्रावधानों में भी फेरबदल किया गया है। कानून के दुरुपयोग के मामलों को रोकने के लिए भी आवश्यक बदलाव किए गए हैं। कोई किसी को शराबबंदी कानून के तहत झूठे आरोपों में नहीं फंसा सके, इसका इंतजाम नये कानून में किया गया है। गौरतलब हो कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कई बार अपने भाषण में कह चुके हैं कि संशोधन को लेकर लोगों की राय ली गई है। राय के आधार पर भी कुछ संशोधन होंगे। शराबबंदी की मूल भावना को बरकरार रखते हुए कोशिश की गई है कि कोई भी सरकारी तंत्र इसके प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं कर सके। 

बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 के संशोधन को मंजूरी मिली। चूंकि इस बाबत विधेयक को विधानमंडल में पेश किया जाना है, लिहाजा संशोधन की बाबत जानकारी कैबिनेट की ब्रीफिंग में नहीं दी गई। 

गौरतलब है कि शराबबंदी कानून में संशोधन को लेकर सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट को मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग ने कैबिनेट में प्रस्ताव रखा था। 

वर्तमान कानून में ये है प्रावधान
- शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने पर दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा व एक लाख से दस लाख तक जुर्माना। 
- शराब के नशे में पाए जाने पर सात साल तक की सजा और एक से 10 लाख तक का जुर्माना। 
- शराब के नशे में अपराध, उपद्रव या हिंसा की तो कम से कम दस वर्ष से लेकर आजीवन कारावास की सजा और एक लाख से दस लाख तक का जुर्माना। 
- किसी परिसर या मकान में मादक द्रव्य या शराब बनाने, बरामद, उपभोग, बनाया, बिक्री या वितरण पर 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले परिवार के सभी सदस्य जिम्मेवार माने जाएंगे जब तक वे अपने आप को निर्दोष होने का प्रमाणत न दे दें।
जहरीली शराब  
जहरीली शराब से मौत होने पर शराब बनाने वाले को मृत्यु दंड या आजीवन कारावास और दस लाख तक का जुर्माना। 
- विकलांग होने पर ऐसे शराब बनाने वाले को दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा और दो से 10 लाख तक जुर्माना।
- आंशिक चोट आने पर आठ वर्षों से आजीवन कारावास तक की सजा और एक से दस लाख तक का जुर्माना।
- कोई हानि नहीं होने पर भी बनाने वाले को आठ से दस वर्ष तक की सजा और एक से पांच लाख तक का जुर्माना।
- कपट व छद्म तरीके से शराब का कारोबार करने पर दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा और एक से दस लाख तक का जुर्माना।
- अवैध तरीके से शराब का भंडारण करने पर आठ से दस वर्ष तक की सजा और दस लाख तक का जुर्माना। 
- अवैध शराब व्यापार में महिला या नाबालिग को लगाया तो दस वर्ष से आजीवन कारावास तक की सजा और एक लाख से दस लाख तक का जुर्माना। 
- कोई व्यक्ति, वाहन या परिवहन के अन्य साधनों के माध्यम से इस कानून का उल्लंघन किया तो बिना वारंट के दिन-रात कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। लेकिन गिरफ्तारी की सूचना डीएम को देनी होगी। 
- इस अधिनियम के अधीन सभी अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे। 

मध्याह्न भोजन कर्मियों की मृत्यु पर चार लाख
मध्याह्न भोजन योजना में संविदा पर कार्यरत कर्मियों की सेवाकाल में मुत्यु होने पर उनके आश्रित को एकमुश्त चार लाख का अनुग्रह अनुदान राशि दी जाएगी। कैबिनेट ने बुधवार को इसकी भी मंजूरी दी। गौरतलब हो कि मध्याह्न भोजन योजना में संविदा पर करीब 80 हजार से अधिक कर्मी कार्यरत हैं। 

 

मुख्यमंत्री नीतीश बोले, मॉनसून सत्र में शराबबंदी कानून में संशोधन

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  • Web Title:bihar nitish cabinet decides to change in liquor prohibition act