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हिंदी न्यूज़ बिहारमधुबनी: पंडौल के इसहपुर गांव में मिले प्राचीन नगर सभ्यता के अवशेष, खुदाई में मिली ईंट की मोटी दीवार, मटका व सिक्का

मधुबनी: पंडौल के इसहपुर गांव में मिले प्राचीन नगर सभ्यता के अवशेष, खुदाई में मिली ईंट की मोटी दीवार, मटका व सिक्का

मधुबनी: हिन्दुस्तान टीमMalay Ojha
Wed, 26 May 2021 12:54 PM
मधुबनी: पंडौल के इसहपुर गांव में मिले प्राचीन नगर सभ्यता के अवशेष, खुदाई में मिली ईंट की मोटी दीवार, मटका व सिक्का

मधुबनी जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी. दूर पंडौल प्रखंड के इसहपुर गांव में प्राचीन नगर सभ्यता के अवशेष लगातार मिल रहे हैं जो गांव के लोगों के बीच कौतुहल का विषय बना हुआ है। 

इसहपुर गांव में एक मृतप्राय नदी है, जिसे ग्रामीण अमरावती नदी कहते हैं। नदी का कोई अस्तित्व नहीं बचा है। लोग उसमें खेतीबारी के साथ तालाब भी बना लिये हैं, जिसमें आये दिन खुदाई के दौरान प्राचीन नगर सभ्यता के अवशेष मिल रहे हैं। अभी तक ग्रामीणों को खुदाई में ईंट का मोटा दीवार, मटका, जात, सिक्का व पूजा पाठ की सामग्री मिल चुकी है। इससे लोगों में और भी जिज्ञासा बढ़ने लगी है कि आखिर इसके अंदर किस काल की नगर सभ्यता है। 

ग्रामीण आनंद कुमार झा, हर्षनाथ झा, ध्रुव झा, पंकज झा, सौरभ झा, आनंद झा सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि एक साल पहले आनंद झा ने एक तालाब खुदवाया। जिसमें ईंट का एक दीवार दिखाई पड़ा। जो सामान्य ईंट से बहुत अधिक लंबा व चौड़ा है। इससे पूर्व संकोर्थ गांव के एक व्यक्ति को एक प्राचीन सिक्का मिला। जिसकी कीमत लाख रुपये बतायी जाती हैं। चार मई को ग्रामीणों की एक टोली ने वहां खुदाई की तो नगर सभ्यता के और कई सामान मिले। जिसमें से एक ईंट डीएम मधुबनी को देखने के लिए गांव के युवाओं ने दिया। 24 मई को फिर खुदाई शुरू की तो दीवार का अंत नहीं ले रहा है। दीवार करीब तीन से चार फुट मोटा बताया जाता है। थकहार कर ग्रामीणों ने खुदाई बंद कर दिया। 

क्या कहते हैं अधिकारी
महराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय दरभंगा के सहायक संग्रहालयाध्यक्ष डा. शिव कुमार मिश्र ने बताया कि इस तरह का ईंट एक हजार से डेढ़ हजार वर्ष के बीच नगर सभ्यता में प्रयोग होता था। सिक्का दो सौ साल पहले का हो सकता है। सिक्का पर लिपी देवनागरी है। जबकि मिथिला में पहले मिथिलाक्षर एवं कैथी लिपी का प्रचलन था।  बिहार सरकार के पुरातत्व निदेशालय द्वारा संरक्षित स्मारकों की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। समुचित उत्खनन एवं संरक्षण की जरूरत है। वे इसको लेकर कला संस्कृति एवं युवा विभाग पटना के अपर सचिव व डीएम मधुबनी का ध्यान भी आकृष्ट किये हैं। 

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