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फेक करेंसी का आतंकी कनेक्शन! बिहार में एक परिवार छाप रहा था जाली नोट, डिलीवरी देने के दौरान गिरोह पकड़ाया

मुजफ्फरपुर हिन्दुस्तान टीमPublished By: Malay Ojha
Mon, 02 Aug 2021 10:59 PM
फेक करेंसी का आतंकी कनेक्शन!  बिहार में एक परिवार छाप रहा था जाली नोट, डिलीवरी देने के दौरान गिरोह पकड़ाया

मुजफ्फरपुर जिले की मोतीपुर पुलिस के हत्थे चढ़े मोतिहारी के आठ सहित नौ जाली नोट तस्कर से दूसरे दिन सोमवार को भी पूछताछ की। इस दौरान पुलिस को उनके नेटवर्क की जानकारी मिली। इसके आधार पर पुलिस की टीम मोतिहारी के पताही और रक्सौल इलाके में छापेमारी करने में जुटी है।

सोमवार को सिटी एसपी, एएसपी वेस्ट ने जाली नोट के तस्करों से गहनता से पूछताछ की। चर्चा यह भी है एनआईए के दो इंस्पेक्टर ने भी मोतीपुर थाना जाकर तस्करों से करीब दो घंटे तक गहनता से पूछताछ की है। हालांकि, इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। आतंकी कनेक्शन से जोड़कर पुलिस की खुफिया विंग ने भी तस्करों से पूछताछ की है। पूछताछ पूरी होने के बाद मंगलवार को सभी को कोर्ट में पेश किया जा सकता है।

सिटी एसपी राजेश कुमार ने बताया मोतिहारी के पताही थाना क्षेत्र के रतन सायर निवासी अजय महतो जाली नोट को छापकर उसे ठिकाने लगाने का धंधा करता है। उसके इस धंधे में उसकी पत्नी व दो बेटे भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि उसके गांव के चार लोग भी इस धंधे में शामिल थे। सभी को पुलिस ने मोतीपुर के रतनपुरा में वाहन चेकिंग के दौरान दबोच लिया। इनकी स्कॉर्पियो को भी पुलिस ने जब्त किया है। उनके पास से मिले 10 मोबाइल की छानबीन में जिले की डीआईयू और तकनीकि सेल जुट गयी है। इससे उनके नेटवर्क की जानकारी पुलिस को मिलने की संभावना है।

बताया जाता है कि अजय के गिरोह में दो दर्जन से अधिक लोग सक्रिय हैं। वे मुजफ्फरपुर, मोतिहारी, बेतिया, सिवान, गोपालगंल, दरभंगा, मधुबनी व सीतामढ़ी के रहने वाले हैं। मुजफ्फरपुर पुलिस सभी जिलों की पुलिस को इसकी जानकारी दे दी है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। इन जाली नोटों को पंचायत चुनाव और शराब के धंधे में भी खपाने की तैयारी थी।

घर में करता था छपाई, पत्नी बेटा भी करते थे सहयोग

सिटी एसपी राजेश कुमार ने बताया कि अजय पताही स्थित अपने घर में भारतीय जाली नोट छापा करता था। वह हाई क्वालिटी मशीन से इसकी प्रिंटिंग करता था। इसमें उसकी पत्नी सुनीता देवी, बेटा मधुरंजन कुमार और चितरंजन कुमार भी सहयोग करते थे। इसके अलावा गांव के राजा कुमार, राकेश महतो, पताही बड़ा शंकर का गोलू सिंह, पकड़ीदयाल का मनोज कुमार भी उसके धंधे में उसका सहयोग करते थे। उन्होंने बताया कि अजय खुद नोटों को एडिट कर उसकी प्रिंटिंग करता था। नोट को हाई क्वालिटी पेपर पर प्रिंट किया जाता था। सामान्य नजर से उसे पहचाना कठिन था। उक्त नोट में सिक्यूरिटी थ्रेड नहीं होता है। यह जाली होने की स्पष्ट पहचान है।

परिवार के साथ नोटों की डिलीवरी करने जाता था

एएसपी वेस्ट सैयद इमरान मसूद ने बताया कि अजय जाली नोटों की सप्लाई खुद करता था। वह अपनी स्कॉर्पियो से परिवार के साथ डिलीवरी देने जाता था। यानी स्कॉर्पियो में उसके अलावा उसकी पत्नी और दोनों बेटे भी होते थे। इससे वह पुलिस को चकमा भी देने में सफल होता था। लेकिन, इसबार मुजफ्फरपुर पुलिस को चकमा नहीं दे सका। पुलिस को उसकी गाड़ी का नंबर मिल चुका था। वाहन जांच के दौरान उसे दबोच लिया गया। स्कॉर्पियो में आठ लोग चालक समेत सवार थे।

चांदनी चौक से बालू कारोबारी की हुई गिरफ्तारी

मोतीपुर के रतनपुरा से पुलिस ने मोतिहारी के तस्करों और धंधेबाजों को दबोचा। इनके पास से 7.50 लाख जाली भारतीय नोट एक बैग में बरामद किए गए। पूछताछ में बताया कि उनको ब्रह्मपुरा थाना के चांदनी चौक पर गायघाट के रामनगर के बालू कारोबारी को डिलीवरी देना है। चांदनी चौक को मिटिंग प्वाइंट बनाया गया था। पुलिस ने अजय को लेकर चांदनी चौक पहुंची और बालू कारोबारी मंजीत कुमार को दबोच लिया। उसके पास से 50 हजार रुपये का असली भारतीय नोट भी बरामद किये गये। यह राशि वह अजय को एडवांड देने के लिए लाया था।

ग्राहकों को देता था जाली नोट

एएसपी वेस्ट ने बताया कि बालू कारोबारी मंजीत ने पूछताछ में बताया कि उसे हर दिन काफी संख्या में कैश पेमेंट करना होता है। इस वजह से वह एक लाख रुपये का असली नोट देकर अजय से तीन लाख रुपये का जाली नोट लेता था। एक बंडल में 15 से 20 जाली नोट फंसा कर वह ग्राहकों और बालू कोरोबारियों के अलावा ठेला व ट्रक चालकों को पेमेंट करता था। इससे उसे काफी बचत होती थी। लालच की वजह से वह मोतिहारी के अजय से नोटों की सप्लाई लेता था। वह कई बार जाली नोटों की सप्लाई ले चुका था।

अजय ने किया पुलिस को गुमराह

एएसपी वेस्ट ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद अजय ने पुलिस टीम को गुमराह किया। वह बताया कि उसका एक चचेरा भाई जो सीतामढ़ी के मेजरगंज में रहता है। वह इसका सरगना है। फिलहाल वे जेल से कुछ दिन पहले बाहर आया है। जब पुलिस उसे ठिकाने पर पहुंची तो वहां एक बैग मिला। उसमें कुछ नेपाली नोट रखे हुए थे। उसके नीचे कागज के बंडल रखे हुए थे। इसके अलावा पुलिस को मेजरगंज से अन्य कुछ हाथ नहीं लग सका। इसके बाद टीम मुजफ्फरपुर वापस लौट आयी। बताया जाता है कि अजय का चचेरा भाई सुभाष महतो ही उसे जाली नोट के धंधे में लगा था। कुछ दिनों पहले वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया था।

2008 में ब्रह्मपुरा से भी पकड़ा गया था जाली नोट छापने वाला

जानकारी हो कि, वर्ष 2008 में ब्रह्मपुरा पुलिस ने एक जाली नोट के धंधेबाज को दबोचा था। वह भी अजय महतो की तरह जाली नोट छापता था। हालांकि, पुलिस के पास वर्तमान में उस व्यक्ति की सूचना नहीं है। वर्तमान में वह क्या कर रहा है, कहां है। पुलिस को इसकी कोई जानकारी नहीं है।

 

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