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बिहार की लोकसभा सीटों का हाल: भागलपुर में भाजपा का दबदबा, दंगों के बाद कभी नहीं हुई कांग्रेस की वापसी

भागलपुर लोकसभा सीट की बात करें तो 1957 से लेकर 1984 तक इस सीट पर कांग्रेस का राज रहा। लेकिन 1989 में हुए दंगों के बाद से फिर कभी कांग्रेस की वापसी नहीं हो सकी। इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है।

बिहार की लोकसभा सीटों का हाल: भागलपुर में भाजपा का दबदबा, दंगों के बाद कभी नहीं हुई कांग्रेस की वापसी
Sandeepवरीय संवाददाता,भागलपुरTue, 30 Jan 2024 08:17 AM
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रेशम नगरी के नाम से मशहूर भागलपुर प्राचीन काल से राजनीति और शिक्षा का केंद्र रहा है। पाल वंश के राजा धर्मपाल ने यहीं विक्रमशिला विश्वविद्यालय की स्थापना करायी थी। पुराणों में और महाभारत में इस क्षेत्र को अंग जनपद की राजधानी बताया गया है। राजा रोमपाल और राजा कर्ण भी यहीं से अपने राज्य की कमान संभालते थे। इन्हीं वजहों से कहा जाता है कि भागलपुर और इसके आसपास के क्षेत्र की विरासत में राजनीति है।

भागलपुर लोकसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास भी कम समृद्ध नहीं है। पहले लोकसभा चुनाव (1952) तक भागलपुर, पूर्णिया लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था और तब जेबी कृपलानी जैसी हस्ती यहां के सांसद हुआ करते थे। वह देश के पहले गर्वनर जनरल रहे थे। 1957 में भागलपुर स्वतंत्र रूप से लोकसभा क्षेत्र बना तो यहां के पहले सांसद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बनारसी प्रसाद झुनझुनवाला बने। भागलपुर से निर्वाचित सांसदों में अधिकतर ने देश में अपनी अलग छवि और पहचान बनायी। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भागवत झा आजाद, गांधीवादी रामजी सिंह, पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी और पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन, केंद्र सकार में मंत्री अश्विनी कुमार चौबे यहां से सांसद रह चुके हैं।

पूरे भागलपुर लोकसभा क्षेत्र को गंगा नदी लगभग चीरती हुई निकलती है। गंगा के दोनों पार के इलाकों में मुद्दे अलग हैं। दोनों तरफ को साधने में जो कामयाब होते हैं, उनकी चुनावी नाव पार लग जाती है। 1977 को छोड़ दें तो 1957 से लेकर 1984 तक इस सीट पर कांग्रेस का राज रहा और पूर्व सीएम भागवत झा आजाद यहां से 5 बार लोकसभा पहुंचे। 1977 में जनता पार्टी के रामजी सिंह ने उन्हें हराया। हालांकि 1980 और 1984 में भागवत झा आजाद फिर चुनाव जीते। 1989 में हुए भागलपुर दंगे के बाद से कांग्रेस की जो जमीन खिसकी तो फिर उसके पांव नहीं जमे।

भाजपा के शहनवाज हुसैन भी यहां से जीते। 2014 में उन्हें राजद के शैलेश कुमार मंडल ने हरा दिया। 2019 में यह सीट जदयू के खाते में गई और अजय मंडल ने रिकॉर्ड जीत हासिल की। इस बार एनडीए प्रत्याशी जदयू या भाजपा से होगा, यह आनेवाला समय बताएगा।

भागवत झा आजाद भागलपुर के अकेले ऐसे सांसद रहे जो सांसद रहते हुए केन्द्र में मंत्री बने। इन्हें युवा तुर्क कहा जाता था। वे बिंदेश्वरी दुबे, अब्दुल गफूर, चन्द्रशेखर सिंह, सत्येन्द्र नारायण सिन्हा और केदार पांडे जैसे बिहार के नामचीन नेताओं के समकालीन थे। आजाद भागलपुर से तीसरी, चौथी, पांचवीं, सातवीं और आठवीं लोकसभा के लिए चुने गए। उन्होंने 1967 से 1983 तक कृषि, शिक्षा, श्रम और रोजगार, आपूर्ति और पुनर्वास, नागरिक उड्डयन और खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्रालयों में केंद्रीय राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया। 14 फरवरी 1988 से 10 मार्च 1989 तक बिहार के मुख्यमंत्री भी रहे।

कब-कौन जीता? भागलपुर लोकसभा क्षेत्र 

1957- बनारसी प्रसाद झुनझुनवाला, कांग्रेस

1962- भागवत झा आजाद, कांग्रेस

1967- भागवत झा आजाद, कांग्रेस

1971- भागवत झा आज़ाद, कांग्रेस

1977- रामजी सिंह, जनता पार्टी

1980- भागवत झा आज़ाद, कांग्रेस

1984- भागवत झा आज़ाद, कांग्रेस

1989- चुनचुन प्रसाद यादव, जनता दल

1991- चुनचुन प्रसाद यादव, जनता दल

1996- चुनचुन प्रसाद यादव, जनता दल

1998- प्रभास चंद्र तिवारी, भाजपा

1999- सुबोध राय, भाकपा (मार्क्सवादी)

2004- सुशील कुमार मोदी, भाजपा

2006- सैयद शाहनवाज़ हुसैन, भाजपा (उचु)

2009- सैयद शाहनवाज़ हुसैन, भाजपा

2014- शैलेश कुमार मंडल, राजद

2019- अजय कुमार मंडल, जदयू

1998 में पहली बार खिला कमल

1989-1996 तक इस सीट पर जनता दल के चुनचुन प्रसाद यादव सांसद रहे। 1998 में भाजपा के प्रभाष चंद्र तिवारी ने पहली बार कमल खिलाया। 1999 में कम्युनिस्ट नेता सुबोध राय ने कब्जा कर लिया। लेकिन 2004 में भाजपा के सुशील कुमार मोदी ने फिर से यह सीट वापस छीन ली।

भागलपुर लोकसभा सीट में कुल मतदाता 19,26,396 हैं। वहीं पुरुष वोटर्स- 10,19,774 और महिला वोटर्स- 9,06,510, थर्ड जेंडर- 112 है। वही अगर बात 2019 के लोकसभा चुनाव की करें तो भागलपुर सीट पर जेडीयू को सबसे ज्यादा 59.30%, आरजेडी को 32.67%, अन्य को 5% और नोटा को 3% वोट मिले थे। इस चुनाव में जेडीयू एनडीए का हिस्सा थी। 

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