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जेडीयू के इन 3 नेताओं ने चिराग तले किया अंधेरा, जानें एलजेपी में पड़ी फूट की इनसाइड स्टोरी

पटना, हिन्दुस्तान टीमPublished By: Malay Ojha
Mon, 14 Jun 2021 10:09 PM
जेडीयू के इन 3 नेताओं ने चिराग तले किया अंधेरा, जानें एलजेपी में पड़ी फूट की इनसाइड स्टोरी

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में लोजपा के रुख से अपनी तीन दर्जन ‘कम्फर्टेबल’ सीटें गंवाने वाले जनता दल यूनाइटेड ने इस पार्टी को तात्कालिक जवाब पहले ही इकलौते जीते मटिहानी विधायक राजकुमार सिंह को पाले में कर के दे दिया था। विधान परिषद में भी लोजपा की शून्यता इकलौती विधान पार्षद नूतन सिंह के भाजपा में शामिल होने से हो गयी थी। अब लोजपा में नेतृत्व को लेकर हुए तख्तापलट में भी जदयू के तीन बड़े नेताओं की भूमिका सामने आने के गहरे निहितार्थ हैं।  

जदयू के इन तीन कद्दावर नेताओं में लोकसभा में संसदीय दल के नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ललन सिंह, रामविलास पासवान के रिश्तेदार और बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी तथा जदयू के मुख्य प्रवक्ता व विधान पार्षद संजय सिंह शामिल हैं। बताया जाता है कि इस पूरे मिशन को अनुभवी नेता ललन सिंह लीड कर रहे थे। इसको लेकर लोजपा सांसद पशुपति पारस और पूर्व सांसद सूरजभान सिंह संग उनका लगातार सम्पर्क जारी था। पूर्व मंत्री महेश्वर हजारी पासवान परिवार के नजदीकी रिश्तेदार हैं और संजय सिंह रामविलास पासवान के काफी नजदीकी रहे हैं। इस नाते श्री हजारी और श्री सिंह लोजपा के इन-आउट को बखूबी जानते हैं। रविवार से ही ये दोनों दिल्ली में कैम्प कर रहे हैं। ललन सिंह तो पहले से ही दिल्ली में थे। 

सोमवार को जदयू के इन तीनों नेताओं की ‘मिशन लोजपा’ में सक्रियता सार्वजिनक रूप से भी दिखी। लोजपा सांसद वीणा सिंह के आवास पर पशुपति पारस को नेता चुनने को लेकर हुई बैठक के दौरान जदयू नेता ललन सिंह, महेश्वर हजारी और संजय सिंह भी पहुंचे थे। बताया जाता है कि यहां वीणा सिंह की ओर से दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गयी थी जिसमें जदयू के इन तीनों नेताओं और लोजपा के पांचों सांसदों ने साथ खाना खाया। आपको बताते चलें कि वीणा सिंह जदयू विधान पार्षद दिनेश सिंह की पत्नी हैं, इस नाते नीतीश कुमार के नेतृत्व के प्रति उनकी आस्था जगजाहिर है। 

लोजपा संसदीय दल के नेता चुने गये पशुपति पारस ने भी इस उठापटक के बीच मीडिया को दी गयी अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा कि नीतीश कुमार विकास पुरुष हैं। उन्हें वे अच्छा नेता मानते हैं। फिलहाल भले ही पारस ने साफ कर दिया हो कि लोजपा टूटी नहीं है और उसका जदयू में विलय नहीं होने जा रहा, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को जदयू की ताकत बढ़ाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। 

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